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Kerala: जयराम रमेश ने दिया 'सतत, समावेशी और तेज विकास' का मंत्र, कहा- भविष्य की नीतियों का आधार बनेगा
Thu, 28 May 2026 09:30 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 28 May 2026 09:30 PM IST
सार
जयराम रमेश ने कहा कि आने वाले वर्षों में टिकाऊ, समावेशी और तेज विकास यानी ‘SIR’ मॉडल भारत की नीतियों का आधार बनेगा। उन्होंने रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समानता को देश के भविष्य के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकताएं बताईं।
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जयराम रमेश, कांग्रेस नेता
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को कहा कि आने वाले वर्षों में 'SIR' यानी टिकाऊ (Sustainable), समावेशी (Inclusive) और तेज (Rapid) विकास ही नीति निर्धारण का मुख्य आधार होगा। कोझिकोड में एम पी वीरेंद्रकुमार स्मृति व्याख्यान में उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो, देश को अगले 10 से 15 वर्षों में इन तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा।
उन्होंने समझाया कि 'S' का मतलब टिकाऊ विकास है जो पर्यावरण के अनुकूल हो। 'I' का अर्थ समावेशी विकास है, ताकि विकास का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहकर समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। 'R' का मतलब तेज विकास है, जो हर साल नौकरी की तलाश में आने वाले 70 से 80 लाख भारतीयों के लिए रोजगार पैदा कर सके। उन्होंने जोर दिया कि पर्यावरण को विकास के साथ जोड़ना, अमीरी-गरीबी की खाई को कम करना और रोजगार के लिए अर्थव्यवस्था का विस्तार करना भविष्य की प्राथमिकता होगी।
जयराम रमेश ने वीरेंद्रकुमार के साथ अपने करीब 30 साल पुराने रिश्तों को याद किया। उन्होंने बताया कि उनकी पहली मुलाकात तब हुई थी जब वीरेंद्रकुमार केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री बने थे। उन्होंने एक मजाकिया किस्सा भी सुनाया कि कैसे वीरेंद्रकुमार खुद को 'डबल एमपी' कहते थे क्योंकि उनके नाम की शुरुआत में भी 'एमपी' आता था।
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उन्होंने भारतीय समाजवादी परंपरा पर भी बात की। उन्होंने जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया और कमलादेवी चट्टोपाध्याय जैसे नेताओं का जिक्र किया। रमेश ने कहा कि समाजवादियों के बारे में कहा जाता है कि वे न तो छह महीने साथ रह सकते हैं और न ही छह महीने अलग। इसी वजह से समाजवादी आंदोलन कई हिस्सों में बंटा, जैसे कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी से लेकर जेडी(यू) तक। उन्होंने कहा कि समाजवादी परंपरा सत्ता के बजाय मूल्यों और लोगों के संघर्ष के लिए जानी जाती थी, जो अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है।
ये भी पढ़ें: U23 Wrestling: एशियाई चैंपियनशिप में भारतीय पहलवानों के दबदबे के मुरीद हुए पीएम मोदी, तारीफों के बांधे पुल
अंत में उन्होंने भारत की विविधता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत जैसी धार्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता दुनिया में कहीं और नहीं है। सोवियत संघ और यूगोस्लाविया जैसे देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी विविधता के बावजूद टिक नहीं सके। भारत इसलिए बचा हुआ है क्योंकि हमारा संविधान विविधता का न केवल सम्मान करता है, बल्कि उसका उत्सव भी मनाता है। वीरेंद्रकुमार का जीवन भी यही संदेश देता है।
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उन्होंने समझाया कि 'S' का मतलब टिकाऊ विकास है जो पर्यावरण के अनुकूल हो। 'I' का अर्थ समावेशी विकास है, ताकि विकास का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहकर समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। 'R' का मतलब तेज विकास है, जो हर साल नौकरी की तलाश में आने वाले 70 से 80 लाख भारतीयों के लिए रोजगार पैदा कर सके। उन्होंने जोर दिया कि पर्यावरण को विकास के साथ जोड़ना, अमीरी-गरीबी की खाई को कम करना और रोजगार के लिए अर्थव्यवस्था का विस्तार करना भविष्य की प्राथमिकता होगी।
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जयराम रमेश ने वीरेंद्रकुमार के साथ अपने करीब 30 साल पुराने रिश्तों को याद किया। उन्होंने बताया कि उनकी पहली मुलाकात तब हुई थी जब वीरेंद्रकुमार केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री बने थे। उन्होंने एक मजाकिया किस्सा भी सुनाया कि कैसे वीरेंद्रकुमार खुद को 'डबल एमपी' कहते थे क्योंकि उनके नाम की शुरुआत में भी 'एमपी' आता था।
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उन्होंने भारतीय समाजवादी परंपरा पर भी बात की। उन्होंने जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया और कमलादेवी चट्टोपाध्याय जैसे नेताओं का जिक्र किया। रमेश ने कहा कि समाजवादियों के बारे में कहा जाता है कि वे न तो छह महीने साथ रह सकते हैं और न ही छह महीने अलग। इसी वजह से समाजवादी आंदोलन कई हिस्सों में बंटा, जैसे कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी से लेकर जेडी(यू) तक। उन्होंने कहा कि समाजवादी परंपरा सत्ता के बजाय मूल्यों और लोगों के संघर्ष के लिए जानी जाती थी, जो अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है।
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अंत में उन्होंने भारत की विविधता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत जैसी धार्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता दुनिया में कहीं और नहीं है। सोवियत संघ और यूगोस्लाविया जैसे देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी विविधता के बावजूद टिक नहीं सके। भारत इसलिए बचा हुआ है क्योंकि हमारा संविधान विविधता का न केवल सम्मान करता है, बल्कि उसका उत्सव भी मनाता है। वीरेंद्रकुमार का जीवन भी यही संदेश देता है।