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Hindi News ›   India News ›   Jagannath devotees from 24 countries gather in Odisha, vow to spread awareness about ISKCON's Rath Yatra

ISKCON Rath Yatra: ओडिशा में जुटे 24 देशों के जगन्नाथ भक्त, इस्कॉन की रथयात्रा पर जागरूकता फैलाने का संकल्प

Mon, 05 Jan 2026 12:10 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी Published by: रिया दुबे Updated Mon, 05 Jan 2026 12:10 PM IST
सार

पुरी में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में भगवान जगन्नाथ के भक्तों ने इस्कॉन द्वारा विदेशों में शास्त्रों से हटकर असमय रथयात्रा आयोजित करने पर आपत्ति जताते हुए इसके खिलाफ दुनिया भर में जागरूकता फैलाने का निर्णय लिया। सम्मेलन में शंकराचार्य और गजपति महाराजा ने शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को ही रथयात्रा करने की जरूरत पर जोर दिया।

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Jagannath devotees from 24 countries gather in Odisha, vow to spread awareness about ISKCON's Rath Yatra
इस्कॉन द्वारा आयोजित भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ओडिशा के पुरी में आयोजित एक वैश्विक सम्मेलन में भगवान जगन्नाथ के भक्तों ने इस्कॉन द्वारा विदेशों में असमय रथयात्रा आयोजित किए जाने के खिलाफ विश्व भर में जागरूकता फैलाने का फैसला किया है। तीन दिवसीय यह सम्मेलन श्री जगन्नाथ चिंतन और चेतना वर्ल्डवाइड (एसजेसीसीडब्ल्यू) की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें 24 से अधिक देशों के श्रद्धालु शामिल हुए।

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शास्त्रों और पुराणों से हटकर रथयात्रा कराने पर आपत्ति 

सम्मेलन का उद्घाटन पुरी शंकराचार्य ने किया, जबकि गजपति महाराजा दिब्यसिंह देव ने इसे संबोधित किया। SJCCW के ट्रस्टी भगवन पांडा ने कहा कि हिंदू शास्त्रों और पुराणों से हटकर विदेशों में रथयात्रा आयोजित किए जाने के खिलाफ वैश्विक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

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जापान से आए प्रतिनिधि कालिंदी त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी स्थान पर रथयात्रा आयोजित करने में आपत्ति नहीं है, लेकिन इसका आयोजन शास्त्रों के अनुसार ही होना चाहिए।

कई वर्षों से यह मुद्दा है विवाद में

12वीं शताब्दी के इस तीर्थस्थल का प्रबंधन कई वर्षों से मायापुर स्थित इस्कॉन के साथ इस मुद्दे पर विवाद में है। इस्कॉन का तर्क रहा है कि लॉजिस्टिक कारणों से दुनिया भर में एक ही तिथि पर रथयात्रा कराना संभव नहीं है।



सभा को संबोधित करते हुए गजपति महाराजा, जो श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (एसजेटीएमसी) के अध्यक्ष भी हैं, ने इस्कॉन के रुख पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार रथयात्रा न कराना किसी भी सनातनी हिंदू को स्वीकार्य नहीं है। शास्त्रों के मुताबिक भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया (जून-जुलाई) को होती है।

पश्चिम बंगाल के दीघा में बना मंदिर भी रहा विवाद में

गजपति महाराजा ने पश्चिम बंगाल के दीघा में बने जगन्नाथ मंदिर को 'जगन्नाथ धाम' कहे जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ‘धाम’ केवल पुरी को ही कहा जा सकता है, क्योंकि भगवान वहीं विराजमान हैं। दिगा का यह मंदिर पुरी मंदिर की प्रतिकृति के रूप में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बनवाया गया है और इसका प्रबंधन इस्कॉन के पास है।

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