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Samudra Pratap: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘समुद्र प्रताप’ को किया जलावतरण; हिंद महासागर में बढ़ेगी ताकत

Mon, 05 Jan 2026 11:16 AM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 05 Jan 2026 11:16 AM IST
सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा शिपयार्ड में भारतीय तटरक्षक जहाज आईसीजीएस ‘समुद्र प्रताप’ को राष्ट्र को समर्पित किया। 60% स्वदेशी सामग्री से बने इस जहाज को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की बड़ी उपलब्धि बताया।

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ICGS Samudra Pratap Commissioned: Rajnath Singh Highlights Make in India at Goa Shipyard
समुद्र प्रताप’ जहाज में 60 प्रतिशत से अधिक सामग्री स्वदेशी - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

गोवा शिपयार्ड में भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की मौजूदगी में भारतीय तटरक्षक बल के नए जहाज ICGS ‘समुद्र प्रताप’ को औपचारिक रूप से कमीशन किया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ जैसे प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारते हैं। उन्होंने बताया कि इस जहाज में इस्तेमाल की गई 60 प्रतिशत से अधिक सामग्री स्वदेशी है, जो मेक इन इंडिया पहल की बड़ी सफलता है।
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पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ का उद्घाटन
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा इस जहाज में स्वदेशी तकनीक और संसाधनों का व्यापक इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि समुद्री संसाधन किसी एक देश की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा विरासत हैं और भारत एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। यही आत्मनिर्भर भारत की असली पहचान है। ‘मेक इन इंडिया’ का वास्तविक अर्थ ऐसे ही रक्षा प्रोजेक्ट्स में दिखाई देता है। 
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राजनाथ सिंह ने कहा कि इतने जटिल जहाज में भी 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल यह दिखाता है कि भारत का रक्षा औद्योगिक तंत्र अब परिपक्व हो चुका है। उन्होंने भविष्य में जहाजों में स्वदेशी सामग्री को 90 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य भी दोहराया। उन्होंने समुद्री प्रदूषण को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इसका असर मछुआरों की आजीविका, तटीय समुदायों और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। इसके साथ ही उन्होंने तटरक्षक बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की और कहा कि आज महिलाएं न केवल सहायक भूमिकाओं में, बल्कि अग्रिम मोर्चे पर भी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

क्या है पोत की खासियत?
इस 114.5 मीटर लंबे विशाल पोत के निर्माण में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। 4,200 टन वजनी इस जहाज की गति 22 समुद्री मील से अधिक है और यह बिना रुके 6,000 समुद्री मील तक का सफर तय करने में सक्षम है। यह पोत समुद्री प्रदूषण नियमों को लागू करने, समुद्री कानूनों के पालन, खोज और बचाव कार्यों तथा भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।


पोत अत्याधुनिक तकनीक से है लैस
तटरक्षक बल के अनुसार, यह पोत तेल के रिसाव की जांच करने वाली मशीनों और रासायनिक डिटेक्टरों से लैस है। इसमें 30 मिमी की सीआरएन-91 तोप, एकीकृत अग्नि नियंत्रण प्रणाली वाली दो रिमोट-संचालित बंदूकें, स्वदेशी एकीकृत ब्रिज प्रणाली और स्वचालित बिजली प्रबंधन प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है। साथ ही, इसमें आग बुझाने की उच्च क्षमता वाली बाहरी प्रणाली भी लगी है। अधिकारियों का कहना है कि इस जहाज के शामिल होने से भारत की समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता बढ़ेगी और रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश मजबूत होगा।

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