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स्कूल में मिलेगी जलवायु परिवर्तन की 'शिक्षा', ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बना इटली

Thu, 07 Nov 2019 12:14 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Thu, 07 Nov 2019 12:14 PM IST
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Italy first country in world which included climate change subject in school syllabus
जलवायु परिवर्तन - फोटो : pixabay

जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दे को इटली ने स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल कर लिया है और ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला देश बन गया है। वहां के शिक्षा मंत्री लॉरेंजो फिओरामोंटी ने बताया कि अगले साल सितंबर से शुरू होने वाले सत्र में देश के सभी स्कूल जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सप्ताह में कम से कम एक घंटा जरूर देंगे। स्थिरता और जलवायु को अपने शिक्षा मॉडल का केंद्र बनाने के लिए मंत्रालय को भी बदला जा रहा है। इसके अलावा बाकी विषयों भूगोल, गणित और भौतिकी की पढ़ाई को पहले की तरह जारी रखा जाएगा।

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शिक्षा मंत्री लॉरेंजो ने कहा कि वह इटली की स्कूली शिक्षा प्रणाली को पर्यावरण और समाज में सीखी गई चीजों को मूल में रखने वाली व्यवस्था सबसे पहले लागू करना चाहते हैं। साथ ही वह चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी जलवायु परिवर्तन की इस त्रासदी को पहले ही समझ सके। उन्होंने कहा कि हमारे यहां पर्यावरण मंत्रालय देश में स्कूली बच्चों के लिए अगले सत्र से नर्सरी पाठ्यक्रम लागू करेगा, इसमें बच्चे खुद पौधों के बीज लगाएंगे। 
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हालांकि अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रह चुके इटली के 42 वर्षीय शिक्षा मंत्री लॉरेंजो इस फैसले के बाद विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए हैं। कुछ दिनों पहले लॉरेंजो ने छात्रों से स्कूल छोड़कर जलवायु परिवर्तन पर कमद ना उठाने को लेकर प्रदर्शन करने को कहा था और खुद भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे। लॉरेंजो के इस काम की आलोचना पूरे देश में हुई थी।

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क्या है जलवायु को लेकर भारतीय स्कूलों की स्थिति

भारत में जलवायु परिवर्तन को लेकर स्कूलों में अलग से कोई विषय नहीं है, इसे केवल एकीकृत शैली में पढ़ाया जाता है। माना जाता है विज्ञान, भूगोल जैसे विषयों के साथ ही जलवायु विषय समाहित है। इस बारे में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के निदेशक ऋषिकेश सेनापति ने बताया कि साल 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा को लेकर आदेश दिया था, जिसमें स्कूलों में पर्यावरण को अनिवार्य रूप से पढ़ाने की बात कही गई थी। साथ ही बताया कि सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में इस दिशा में काम शुरू हो चुका है।


भारत भी कर रहा इस दिशा में काम

वन और पर्यावरण मंत्रालय देशभर में प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए अगले सत्र से 'स्कूल नर्सरी' प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। जिसमें बच्चों को स्कूल नर्सरी से जोड़ा जाएगा, जिसमें बच्चे खुद ही पौधे रोपेंगे और उनमी देखभाल भी करेंगे। साल के अंत में परीक्षा पास करने पर बच्चों को एक ट्रॉफी के साथ उनका उगाया पौधा भी दिया जाएगा।



इसके अलावा भारत के नेशनल एनवॉयरन्मेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने दुनिया का पहला वेब रिपॉजिटरी (कोष) शुरू किया है। इसमें इंडियन एयर क्वालिटी इंटरैक्टिव रिपॉजिटरी ने 1950-1999 के दौर के करीब 700 स्कैन किए हुए दस्तावेज, 1215 शोध लेख, 170 मामलों के अध्धयन, 100 अन्य मामले और 2000 से ज्यादा स्टैच्यू को संजोया है। ताकि देश में वायु प्रदूषण संबंधी अनुसंधान और इससे संबंधित कानूनों के इतिहास की जानकारी मुहैया कराई जा सके। यह वायु प्रदूषण को लेकर बनाया गया दुनिया का पहला कोष है।

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