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Hindi News ›   India News ›   Bombay High Court Updates: IT Rules against fake news: HC to pronounce verdict on pleas on January 5

बॉम्बे हाईकोर्ट: संशोधित IT नियमों के खिलाफ याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित, कहा- पांच जनवरी को सुनाएंगे निर्णय

Fri, 01 Dec 2023 07:52 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: आदर्श शर्मा Updated Fri, 01 Dec 2023 07:52 PM IST
सार

संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख दिया है। कोर्ट ने कहा कि पांच जनवरी को मामले में फैसला सुनाया जाएगा। 

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Bombay High Court Updates: IT Rules against fake news: HC to pronounce verdict on pleas on January 5
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

सोशल मीडिया पर सरकार से जुड़ी फर्जी खबरों के खिलाफ हाल ही में संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, मामले पर पांच जनवरी को फैसला सुनाया जाएगा। 
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बता दें खंडपीठ ने 29 सितंबर को मामले में दलीलें सुनी थी, जिसके बाद पीठ ने कहा था कि एक दिसंबर को फैसला देने का प्रयास किया जाएगा। वहीं शुक्रवार को सुनवाई में कोर्ट ने कहा, उसका फैसला अभी तैयार नहीं है।
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केंद्र सरकार ने इससे पहले कोर्ट को आश्वस्त किया था कि मामले में फैसला आने तक केंद्र सोशल मीडिया पर फर्जी, झूठे और भ्रामक तथ्यों की पहचान करने और उन्हें चिन्हित करने के लिए स्थापित की जाने वाली तथ्य जांच इकाई को सूचित नहीं करेगा। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील रजत नायर ने कहा कि अदालत इस मामले को क्रिसमस की छुट्टियों के बाद रख सकती है। पीठ ने इस पर हामी भरते हुए फैसले के लिए पांच जनवरी का दिन तय किया है। 
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इस वर्ष की शुरुआत में उच्च न्यायालय में नियमों को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दायर की गई थी। दलीलों में कहा गया है कि सरकार एकमात्र मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रही है और इन नियमों के माध्यम से नागरिकों की बोलने की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार को कम करने की कोशिश करेगी।


हालांकि, केंद्र ने कहा कि वह किसी भी प्रकार की राय, आलोचना, व्यंग्य या हास्य के खिलाफ नहीं है और नियम केवल सोशल मीडिया पर नकली, झूठे और भ्रामक तथ्यों को प्रतिबंधित करने के लिए है। याचिकाओं में अदालत से संशोधित नियमों को असंवैधानिक घोषित करने और सरकार को नियमों के तहत किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई है।
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