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सीजफायर का दिखावा: एक बार फिर खूनी खेल खेलने के लिए शांत हो गए हैं इस्राइल और हमास

Fri, 21 May 2021 07:22 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 21 May 2021 07:22 PM IST
सार

विदेश सेवा के अधिकारियों का कहना है कि यह तो अंतरराष्ट्रीय दबाव में केवल संघर्ष विराम हुआ है। दोनों देशों के बीच में टकराव के मुद्दे का समाधान नहीं हुआ है। बताते हैं यह समाधान बहुत आसान नहीं है। इस्राइल ने अमेरिका समेत अपने कुछ सहयोगी देशों के साथ पूरा दबदबा बना रखा है...

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Israel-Hamas ceasefire: A diplomat says without demarcation of the border between Israel and Palestine peace and stability cannot be established
इस्राइल-फिलिस्तीन संघर्ष - फोटो : ANI (File)

विस्तार

इस्राइल ने आकाश से अपने अत्याधुनिक रक्षा कवच आयरन डोम, बमों और रॉकेट के हमले के सहारे हमास की चाहे जितनी कमर तोड़ दी हो, लेकिन उसके इस प्रयास से फिलिस्तीन और खासकर गाजा पट्टी में हमास की स्थिति काफी मजबूत हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बारुद की राख के नीचे आग को दबा दिया है, लेकिन आने वाले समय में यह फिर भड़केगी। एक राजनयिक का कहना है कि जब तक इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच सीमा का स्पष्ट निर्धारण नहीं होगा, तब तक क्षेत्र में शांति और स्थायित्व की स्थापना नहीं हो सकती।

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सूत्र का कहना है कि स्थायित्व और शांति स्थापना को दुनिया में ताकत का लोहा मनवाने वाला इस्राइल और फिलिस्तीनियों का चरमपंथी संगठन हमास दोनों ही नहीं होने दे रहे हैं। सूत्र का कहना है कि इस बार भी इस्राइल ने फिलिस्तीन प्राधिकरण (पीए) के चुनाव में अड़ंगा न लगाया होता तो इतने भीषण पैमाने पर हुई गोलाबारी जैसे हालात से बचा जा सकता था। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर राजनयिक ने कहा कि मौजूदा फिलिस्तीन प्राधिकरण के स्टेक होल्डर पूरी तरह से इस्राइल के हाथ में खेल रहे हैं। प्राधिककरण के भीतर काफी भ्रष्टाचार है। इस स्थिति ने फिलिस्तीनियों के बीच में हमास की स्थिति को काफी मजबूत कर दिया था।
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हमास के नेताओं को उम्मीद थी कि वह चुनाव में प्राधिकरण में दबदबा बनाएंगे। बताते हैं इस्राइल को भी यही अंदेशा था। लिहाजा उसने चुनाव टाल दिए। इस बीच अल अक्सा मस्जिद के पास फिलिस्तीनियों और स्थानीय पुलिस में टकराव की स्थिति पैदा हुई और पहले से तैयार हमास ने रॉकेटों की बौछार कर दी। बताते हैं हमास ने कोई 4000 से अधिक रॉकेट दागे। फिलिस्तीन ने भी जवाबी कार्रवाई की। ऐसा माना जा रहा है कि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतेन्याहू, खुफिया एजेंसी मोसाद, इस्राइल के रक्षा मंत्री सबको उम्मीद थी हमास को घुटने के बल ला देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

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युद्धविराम के कारण हमास को मिल सकती है ऊर्जा

एक पूर्व विदेश सचिव का भी कहना है कि उन्हें अंदेशा है कि संघर्ष विराम के बाद हमास मजबूत होगा। उसे अब कुछ और इस्राइल विरोधी देशों का समर्थन मिल सकता है। हमास को अभी तक इस्राइल आतंकी संगठन कहता था, दुनिया के कुछ देश उसे उग्रवादी संगठन कहते हैं। लेकिन अब उसे फिलिस्तीनियों की बड़े पैमाने पर सहानुभूति मिल सकती है। ऐसा होने पर वह गाजा समेत फिलीस्तीन के अन्य क्षेत्र में लोकप्रियता बढ़ा सकता है। इसके समानांतर फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन के नेता यासिर अराफात के निधन के बाद पीएलओ की तकत कमजोर हुई है। हमास को उभरने में मदद मिली। वह बताते हैं कि इस्राइल में हमास के समर्थक तो अब जश्न मना रहे हैं।

भविष्य में फिर भड़क सकती है हिंसा

इस्राइल और फिलिस्तीन में आने वाले समय में फिर हिंसा भड़कने की पूरी संभावना है। विदेश सेवा के अधिकारियों का कहना है कि यह तो अंतरराष्ट्रीय दबाव में केवल संघर्ष विराम हुआ है। दोनों देशों के बीच में टकराव के मुद्दे का समाधान नहीं हुआ है। बताते हैं यह समाधान बहुत आसान नहीं है। इस्राइल ने अमेरिका समेत अपने कुछ सहयोगी देशों के साथ पूरा दबदबा बना रखा है। कूटनीतिक मोर्चे पर भी इस्राइल काफी मजबूत है। जबकि कभी यही मजबूती फिलिस्तीन के नेता यासर अराफात के पास होती थी। बताते हैं अराफात के बाद से फिलिस्तीन मुक्ति संगठन कभी भी वह समर्थन नहीं जुटा सका। अब धीरे-धीरे हमास अपनी ताकत बढ़ा रहा है। हमास कट्टरपंथी संगठन है और भविष्य में फिर संघर्ष छिड़ने की पूरी संभावना मौजूद है।

22 मई को होना था फिलिस्तीन नेशनल प्राधिकरण का चुनाव

फिलिस्तीन नेशनल प्राधिकरण का चुनाव 22 मई को होना था। 31 जुलाई को नए राष्ट्रपति चुन लिए जाते। इसके समानांतर फिलिस्तीन मुक्ति संगठन की नेशनल काउंसिल का चुनाव 31 अगस्त को होना था। लेकिन चुनाव की प्रक्रिया बाधित कराने, टालने की स्थिति पैदा करने में इस्राइल का बड़ा हाथ रहा। इस चुनाव से हमास को काफी उम्मीदें थीं। हालांकि माना जा रहा है कि निकट भविष्य में होने वाले चुनाव में हमास फिलिस्तीन में अपनी मजबूत पकड़ बना सकता है।

क्या है फिलिस्तीन की स्थिति

फिलिस्तीन संयुक्त राष्ट्र संघ में एक गैर-सदस्य ऑब्जर्वर स्टेट का दर्जा पा चुका क्षेत्र है। इसके नेता संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में शामिल होते हैं। यह इस्राइल से अपनी स्वतंत्रता और स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता के लिए संघर्ष कर रहा है। 2011 में फिलिस्तीन ने संयुक्त राष्ट्र संघ में पूर्ण सदस्यता पाने के लिए प्रयास किया था। फिलिस्तीन का दावा वेस्टर्न बैंक और गाजा पर है। वह यरुशलम को अपनी भविष्य की राजधानी मानता है और फिलिस्तीन नेशनल अथॉरिटी (पीएनए) रामाल्लाह से अपनी कार्यप्रणाली को संचालित करती है। 23 नवंबर से फिलिस्तीन यूनेस्को का सदस्य है। 2012 में फिलिस्तीन ने संयुक्त राष्ट्र में गैर-सदस्यीय देश का दर्जा पाने का भी प्रयास किया था। 138 अंतरराष्ट्रीय सदस्यों के समर्थन के बाद भी वह इसे हासिल नहीं कर सका।

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