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Million Miyawaki: हवा की गुणवत्ता सुधारने की कवायद, दिल्ली-NCR में 10 लाख पेड़ लगाए जाएंगे; इस्राइल से भी मदद
Tue, 23 Apr 2024 03:25 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Tue, 23 Apr 2024 03:25 AM IST
सार
इस परियोजना के तहत, दिल्ली-एनसीआर में 600 पेड़ों के जंगल जैसे मियावाकी वृक्षारोपण करके दस लाख पेड़ लगाने का प्रयास किया गया है। इसमें 30 विभिन्न स्थानीय-स्रोत वाली प्रजातियां शामिल हैं।
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नाओर गिलोन
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत में इस्राइल का दूतावास, एक गैर-लाभकारी संस्था के सहयोग से, आधिकारिक तौर पर 'मिलियन मियावाकी' परियोजना में शामिल हो गया है। यह एक समुदाय के नेतृत्व वाली पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर वनीकरण के माध्यम से वायु गुणवत्ता में सुधार करना है।
इस्राइली दूतावास ने सोमवार को जारी बयान में कहा, इस परियोजना के तहत, दिल्ली-एनसीआर में 600 पेड़ों का वृक्षारोपण करके दस लाख पेड़ लगाने का प्रयास किया गया है। इसमें 30 विभिन्न स्थानीय-स्रोत वाली प्रजातियां शामिल हैं।
बच्चों के साथ पेड़ लगाकर परियोजना में भागीदारी का नेतृत्व किया
दूतावास ने कहा कि वह पृथ्वी दिवस समारोह के हिस्से के रूप में 'मिलियन मियावाकी' पहल में शामिल हुआ है। भारत में इस्राइल के राजदूत नाओर गिलोन ने एक स्थानीय स्कूल के बच्चों के साथ मिलकर पेड़ लगाकर परियोजना में भागीदारी का नेतृत्व किया, जिससे युवाओं में पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति जागरूकता पैदा हुई।
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बयान के मुताबिक, 'हमारा सामूहिक लक्ष्य मियावाकी तकनीक का उपयोग करके दिल्ली-एनसीआर में और उसके आसपास दस लाख पेड़ लगाने में मदद करना है। इस तकनीक के जरिए दो वर्षों में पौधे पेड़ बनने तक का सफर तय कर सकेंगे। इससे अधिक CO2 को तेजी से अवशोषित करने में मदद मिलती है।' मिलियन मियावाकी फाउंडेशन के सह-संस्थापक साहिल सेठी ने कहा कि बड़े पैमाने पर ऐसा करने से निश्चित रूप से इस क्षेत्र के आसपास हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
मिलियन मियावाकी फाउंडेशन की एक अन्य सह-संस्थापक जूही किलाचंद ने कहा, मियावाकी 1980 के दशक में जापानी वनस्पतिशास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित एक तकनीक है जो कम समय (दो साल) में पूर्ण रूप से विकसित घने जंगलों (20 फीट ऊंचे) को विकसित करने में मदद करती है। छोटे भूखंडों को लघु वनों में परिवर्तित करके शहरी वनीकरण का प्रतिमान।
भारत प्रकृति के पोषण के लिए प्रतिबद्ध : मोदी
पृथ्वी दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत पृथ्वी की भलाई के लिए प्रकृति के पोषण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, पृथ्वी दिवस पर हम प्रकृति के पोषण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं, ताकि हमारे ग्रह का भविष्य बेहतर हो सके।
इसके साथ ही उन्होंने एक वीडियो क्लिप भी साझा की, जिसमें उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति हमें प्रकृति से उतना ही वापस लौटाना सिखाती है, जितना हमने उससे हासिल किया है, क्योंकि धरती हमारी मां है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन हमारी प्राचीन परंपरा का अहम हिस्सा रहा है, जिसे हम आत्मनिर्भर भारत की ताकत बना रहे हैं। एजेंसी
क्या है मियावाकी तकनीक
मियावाकी एक अनोखी तकनीक है, जिससे शहरी क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीन में तेजी से पेड़ों की वृद्धि को प्रोत्साहित किया जाता है। इस्राइल के राजदूत नाओर गिलोन ने कहा कि पृथ्वी दिवस के अवसर पर हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शहरों को फिर से हरा-भरा बनाने में अपनी भागीदारी की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। उन सभी लोगों के प्रति आभार, जो सामुदायिक सहभागिता के जरिये हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक साथ आए हैं। वहीं, मिलियन मियावाकी फाउंडेशन के सह संस्थापक साहिल सेठी ने कहा कि उनका लक्ष्य मियावाकी तकनीक का उपयोग करके 10 लाख पेड़ लगाना है। ये ऐसे पेड़ होंगे, जो केवल दो वर्षों में वयस्क होकर काफी ऊंचे हो जाते हैं और कार्बन डाई ऑक्साइड के अवशोषण में मददगार होते हैं।
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इस्राइली दूतावास ने सोमवार को जारी बयान में कहा, इस परियोजना के तहत, दिल्ली-एनसीआर में 600 पेड़ों का वृक्षारोपण करके दस लाख पेड़ लगाने का प्रयास किया गया है। इसमें 30 विभिन्न स्थानीय-स्रोत वाली प्रजातियां शामिल हैं।
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बच्चों के साथ पेड़ लगाकर परियोजना में भागीदारी का नेतृत्व किया
दूतावास ने कहा कि वह पृथ्वी दिवस समारोह के हिस्से के रूप में 'मिलियन मियावाकी' पहल में शामिल हुआ है। भारत में इस्राइल के राजदूत नाओर गिलोन ने एक स्थानीय स्कूल के बच्चों के साथ मिलकर पेड़ लगाकर परियोजना में भागीदारी का नेतृत्व किया, जिससे युवाओं में पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति जागरूकता पैदा हुई।
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बयान के मुताबिक, 'हमारा सामूहिक लक्ष्य मियावाकी तकनीक का उपयोग करके दिल्ली-एनसीआर में और उसके आसपास दस लाख पेड़ लगाने में मदद करना है। इस तकनीक के जरिए दो वर्षों में पौधे पेड़ बनने तक का सफर तय कर सकेंगे। इससे अधिक CO2 को तेजी से अवशोषित करने में मदद मिलती है।' मिलियन मियावाकी फाउंडेशन के सह-संस्थापक साहिल सेठी ने कहा कि बड़े पैमाने पर ऐसा करने से निश्चित रूप से इस क्षेत्र के आसपास हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
मिलियन मियावाकी फाउंडेशन की एक अन्य सह-संस्थापक जूही किलाचंद ने कहा, मियावाकी 1980 के दशक में जापानी वनस्पतिशास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित एक तकनीक है जो कम समय (दो साल) में पूर्ण रूप से विकसित घने जंगलों (20 फीट ऊंचे) को विकसित करने में मदद करती है। छोटे भूखंडों को लघु वनों में परिवर्तित करके शहरी वनीकरण का प्रतिमान।
भारत प्रकृति के पोषण के लिए प्रतिबद्ध : मोदी
पृथ्वी दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत पृथ्वी की भलाई के लिए प्रकृति के पोषण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, पृथ्वी दिवस पर हम प्रकृति के पोषण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं, ताकि हमारे ग्रह का भविष्य बेहतर हो सके।
इसके साथ ही उन्होंने एक वीडियो क्लिप भी साझा की, जिसमें उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति हमें प्रकृति से उतना ही वापस लौटाना सिखाती है, जितना हमने उससे हासिल किया है, क्योंकि धरती हमारी मां है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन हमारी प्राचीन परंपरा का अहम हिस्सा रहा है, जिसे हम आत्मनिर्भर भारत की ताकत बना रहे हैं। एजेंसी
क्या है मियावाकी तकनीक
मियावाकी एक अनोखी तकनीक है, जिससे शहरी क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीन में तेजी से पेड़ों की वृद्धि को प्रोत्साहित किया जाता है। इस्राइल के राजदूत नाओर गिलोन ने कहा कि पृथ्वी दिवस के अवसर पर हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शहरों को फिर से हरा-भरा बनाने में अपनी भागीदारी की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। उन सभी लोगों के प्रति आभार, जो सामुदायिक सहभागिता के जरिये हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक साथ आए हैं। वहीं, मिलियन मियावाकी फाउंडेशन के सह संस्थापक साहिल सेठी ने कहा कि उनका लक्ष्य मियावाकी तकनीक का उपयोग करके 10 लाख पेड़ लगाना है। ये ऐसे पेड़ होंगे, जो केवल दो वर्षों में वयस्क होकर काफी ऊंचे हो जाते हैं और कार्बन डाई ऑक्साइड के अवशोषण में मददगार होते हैं।