क्या भारत खरीद रहा है रूस से कोविड-19 वैक्सीन की 10 लाख डोज?
- भारतीय वैज्ञानिक रूस और चीन की वैक्सीन पर उठा रहे हैं सवाल
- वैक्सीन का कैसा है असर, ये है बड़ा मुद्दा
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क्या भारत अपने पुराने सामरिक साझेदार रूस से कोविड-19 वैक्सीन की 10 लाख डोज खरीद रहा है? खबर संवेदनशील है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी इसको लेकर अनभिज्ञता जता रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार से जुड़े एक उच्च पदस्थ सूत्र के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। सूत्र का कहना है कि वैक्सीन की 10 लाख डोज का आर्डर किया जा चुका है। हालांकि अभी वैक्सीन की लागत और इसके भारत में आने के सही-सही समय की जानकारी नहीं मिल पाई है।
रूस और चीन की वैक्सीन पर भारतीय विशेषज्ञों को है एतराज
फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के दिनेश दुआ हों या आईसीएमआर से अवकाश प्राप्त डा. रमन गंगाखेड़कर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सक आनंद कृष्णन हों या आईआईटी एलुमनाई काउंसिल के रवि शर्मा सभी को रूस और चीन की कोविड-19 वैक्सीन को लेकर काफी आश्चर्य हो रहा है।
सभी का कहना है कि विज्ञान या मजाक? आखिर आठ महीने के वायरस संक्रमण की इतनी जल्दी वैक्सीन? क्या वैक्सीन निर्माण के लिए आवश्यक इसके तीनों फेज पूरे हो सके हैं। दिनेश दुआ कहते हैं कि उन्हें चीन और रूस की इस वैक्सीन पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।
वह नहीं बता सकते कि इसके दुष्प्रभाव क्या होंगे या फिर यह कितनी कारगर होगी? इसके असर को लेकर भी कई तरह के सवाल हैं। इसलिए केंद्र सरकार को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
चीन ने तो वैक्सीन के प्रयोग की इजाजत भी दे दी
चीन के इस कदम से भारतीय वैज्ञानिक, वायरोलाजिस्ट और वैक्सीन पर अध्ययन करने वाले विशेषज्ञ भी हैरान हैं। उनका कहना है कि रूस की अभी कोविड-19 को लेकर वैक्सीन आने की घोषणा ही हुई थी, लेकिन चीन ने उससे भी एक कदम आगे बढ़ा दिया है।
चीन ने अपने नागरिकों को कोविड-19 संक्रमण से बचाने के लिए वैक्सीन के इस्तेमाल की इजाजत भी दे दी है। भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि हमें इस दिशा में बेहद सावधानी और सतर्कता के साथ कमद उठाने की आवश्यकता है।