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'तिरंगा फहराना गुनाह है क्या?': सीजेपी कार्यकर्ताओं के हिरासत पर भड़के अभिजीत दिपके, बोले- और उग्र होगा आंदोलन

Tue, 13 Oct 2026 12:48 PM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, मुंबई
एएनआई, मुंबई Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 13 Oct 2026 12:48 PM IST
सार

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस और सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया, हिरासत में लिए गए लोगों को वकील से बात करने देने की मांग की और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक तिरंगा फहराने का आंदोलन जारी रखने का एलान किया।

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Is hoisting Tricolour crime Deepak outraged over arrest of CJP activists warns intensifying agitation
अभिजीत दिपके - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने साथियों को हिरासत में लिए जाने पर सरकार और दिल्ली पुलिस को घेरा है। मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने को कानून का उल्लंघन मानता है, तो वह देशद्रोही है। दिपके के मुताबिक, तिरंगा फहराने पर लोगों को हिरासत में लेना समझ से परे है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई के विरोध में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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‘तिरंगा फहराने पर आखिर हिरासत क्यों?’
दिपके ने बताया कि उनकी टीम मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पहुंची थी और वहां तिरंगा फहराया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनके साथियों आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया। दिपके ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना कब से अपराध हो गया? उन्होंने मांग की कि अगर तिरंगा फहराने के लिए उनके साथियों पर आरोप लगाए जाते हैं, तो इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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‘हिरासत में लिए गए लोगों को वकील से बात करने दें’
मीडिया से बात करते हुए सीजेपी नेता ने हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के कानूनी अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली पुलिस सभी को अपने वकीलों से बात करने की अनुमति देगी। दिपके ने आरोप लगाया कि उनके साथ पहले भी ऐसा हो चुका है, जब उन्हें 24 घंटे तक वकील से बात करने की इजाजत नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि किसी को भी इस तरह हिरासत में लेकर उसके कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
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'हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जगह रखा' 
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में हिरासत में लिए गए पार्टी सदस्यों अशुतोष, अजिंक्य और सौरव को अलग-अलग रखा गया है, जबकि उनके साथ मौजूद 11 स्वयंसेवकों को किसी दूसरी जगह ले जाया गया है। दिपके ने बताया कि उन्होंने पार्टी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह से बात की थी, जिन्होंने उन्हें यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब पार्टी के वकील पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। दिपके के मुताबिक, पार्टी के अन्य सदस्यों को भी वहां हिरासत में लेने की धमकी दी गई। उन्होंने देश में तानाशाही चलने और नियमों की अनदेखी होने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि आखिर सरकार किस बात से डर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में यह भी सवाल किया कि ज्ञानेश कुमार को इतनी अहमियत क्यों दी जा रही है।

‘जंतर-मंतर सिर्फ जगह नहीं, विरोध की भावना है’
दिपके ने पुलिस की कार्रवाई को तानाशाही मानसिकता का उदाहरण बताया। उनका आरोप है कि सरकार सार्वजनिक जगहों को अपनी निजी संपत्ति समझने लगी है और नहीं चाहती कि लोग जंतर-मंतर पर जाकर विरोध दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर देश के 140 करोड़ लोगों का है और इसे विरोध की आवाज का प्रतीक माना जाना चाहिए। दिपके ने कहा, “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा। जंतर-मंतर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि प्रतिरोध की भावना है।” उनके मुताबिक, विरोध की आवाज को इस तरह की कार्रवाई से दबाया नहीं जा सकता।


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‘ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक फहराते रहेंगे तिरंगा’
सीजेपी नेता ने साफ कहा कि उनकी पार्टी का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं हो जाती। उन्होंने ऐलान किया कि वे जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराते रहेंगे और यह सिलसिला तब तक नहीं रुकेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते।

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