ट्रेनों में परोसा जा रहा खाना साफ है या नहीं, इस तकनीक से निगाह रखेगा रेलवे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाई डेफिनेशन कैमरे से अब ट्रेन में परोसे जाने वाले खाने की सामग्री पर नजर रखी जाएगी। सफाई सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेगा। इस तकनीक से ट्रेनों में खाना परोसने वाली भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) सफाई का ध्यान रखने के अलावा खाना बनाने की तकनीक में भी बदलाव करेगा।
खाना पैक करने के लिए भी बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। आईआरसीटीसी ने अपने सभी 16 बेस किचन में हाई डेफिनेशन कैमरा लगाया है। यह कैमरे बड़ी-बड़ी स्क्रीन से जुड़ी हुई है। यह सिस्टम इतना बारीक है कि खाने के सामान को दूषित करने वाले चूहों और कॉकरोच को भी ट्रैक करने में सक्षम है। इतना ही नहीं अगर खाना बनाने वाले के हाथ में गंदगी है तो इसे भी आसानी से कैमरे में कैद कर लेगा। इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहारे खाने पीने के सामान में होने वाली किसी भी गड़बड़ी की जानकारी सीधे आईआरसीटीसी के प्रबंध निदेशक को मिल जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार इस सिस्टम से रेलवे की कैटरिंग सर्विस को बेहतर बनाया जाएगा। अगर किसी शेफ ने यूनिफॉर्म नहीं पहनी है या फिर कैप नहीं लगाई है, ऐसे में यह सिस्टम उसे ट्रैक कर लेगा और इसकी सूचना सर्वर के सहारे सीधे खाना बनाने का ठेका लेने वाले ठेकेदार के मोबाइल पर सूचित करेगा। ऐसी गलती 15 मिनट में ठीक नहीं हुई तो फिर इसकी जानकारी आईआरसीटीसी अधिकारियों को दी जाएगी। आईआरसीटीसी के अधिकारियों ने भी इसपर कोई एक्शन नहीं लिया तो फिर इसकी जानकारी सीधे आईआरसीटीसी के प्रबंध निदेशक को पहुंच जाएगी।
बता दें कि ट्रेन में परोसे जाने वाले खाने-पीने के हाइजिन पर बराबर सवाल उठता है। कभी खाने में कॉकरोच मिलता है तो कई बार जहां खाना बनता है वहां चूहे दौड़ते नजर आते है। सीएजी ने भी ट्रेन में परोसे जाने वाले खाने पर सवाल उठा चुका है। ऐसे में रेलवे ने इंटेलिजेंस सिस्टम का सहारा लेकर खाने की गुणवत्ता व सफाई पर नजर रख रहा है।
2.82 लाख सर्विस सेंटर के लक्ष्य को पाने में तीन साल से अधिक लगेंगे
2.82 लाख खुदरा सेवा प्रदाताओं (आरएसपी) के माध्यम से आम जनता को ई-टिकटिंग सेवा प्रदान करने में आईआरसीटीसी को तीन साल और लगेंगे। अभी तक केवल 38,500 आरएसपी पंजीकृत हुए हैं।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम के साथ रोजाना केवल 200-300 आरएसपी पंजीकृत हो रहे हैं। इस रफ्तार से 2.82 लाख के लक्ष्य को पाना कठिन है। अभी तक आईआरसीटीसी सेवाओं के लिए हम केवल 38,500 आरएसपी को जोड़ पाए हैं।
सूत्र ने कहा कि इसकी जानकारी आईटी मंत्रालय को दे दी गई है। वहीं आईआरसीटीसी इसे युद्धस्तर पर पूरा करने की तैयारी कर रही है। बता दें कि अधिक व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करें इसके लिए सरकार ने सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) लांच किए थे। हाल ही में सीएससी की नाम बदलकर ‘डिजिटल सेवा केंद्र’ कर दिया गया था। सीएससी को खासकर ग्रामीण इलाकों में खोलना था। उसका उद्देश्य ऑनलाइन टिकट बुकिंग कराने, आधार पंजीकरण, प्रिंटिंग और प्रमाणन सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक सेवाओं के भुगतान में लोगों की सहायता करना था।
सरकार का दावा है कि 2.92 लाख ऐसे केंद्र देश में कार्यरत हैं। वहीं आईआरसीटीसी इनमें से 2.82 लाख केंद्रों से आरएसपी के माध्यम से ई-टिकटिंग सेवा प्रदान करना चाहती है। सीएससी ने पहले जून, 2017 में एक लाख आरएसपी को मंजूरी दी थी और फिर इस साल मार्च में 1.8 लाख और आरएसपी को मंजूरी दी।