गाजा नरसंहार पर ईरान बोला: सभी इंसानों के लिए शर्मनाक, दुख जताना नाकाफी; इस्राइल के दोस्त नेतन्याहू को रोकें
भारत में ईरान के राजदूत इराज इलाही ने गाजा संकट और ईरान-इस्राइल तनाव पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए गाजा की स्थिति को मानवता के लिए शर्मनाक बताया। उन्होंने इस्राइल पर कई बार युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि ईरान ने कभी संघर्षविराम की मांग नहीं की, बल्कि आत्मरक्षा में जवाब दिया।
विस्तार
भारत में ईरान के राजदूत इराज इलाही ने बुधवार को गाजा संकट, ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे तनाव को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने गाजा की स्थिति को मानवता के लिए शर्मनाक बताते हुए कहा कि जो देश इस्राइल से अच्छे रिश्ते रखते हैं, उन्हें प्रधानमंत्री नेतन्याहू को नरसंहार रोकने के लिए मनाना चाहिए। साथ ही उन्होंने ईरान और इस्राइल के बीच तनाव को लेकर भी बातचीत की। इलाही ने कहा कि हमने कभी युद्धविराम की मांग नहीं की थी। जब इस्राइल ने हमला बंद किया, तब हमने भी पलटवार रोक दिया। उन्होंने कहा कि हम खुद को बचाने के लिए तैयार थे और अगर जरूरत होती तो युद्ध जारी रखते।
बता दें कि ईरानी राजदूत इराज इलाही ने यह बात वॉइसेज ऑफ कॉन्शियंस: फॉर पैलेस्टाइन' नामक एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने शांति और स्थिरता स्थापित करने में भारत की भूमिका का भी जिक्र किया। इलाही ने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में बड़ी और प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
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इस्राइल पर लगाया युद्धविराम तोड़ने का आरोप
ईरानी राष्ट्रपति इलाही ने इस्राइल पर गाजा और लेबनान में कई बार युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस्राइल ने गाजा और लेबनान में कई बार युद्धविराम तोड़े इसीलिए हम सतर्क हैं और हर स्थिति के लिए तैयार हैं।
इसके साथ ही राजदूत इलाही ने इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा और डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की आलोचना की। उन्होंने इसे शांति का मज़ाक और प्रचार बताया। साथ ही कहा कि गाजा में नरसंहार अमेरिका की मदद के बिना मुमकिन नहीं है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (आईएईए) से सहयोग रोक दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान की जनता आईएईए के रवैये से खुश नहीं है, इसलिए संसद ने सहयोग बंद करने का कानून पास किया है।
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भारत-ईरान के बीच चाबहार पोर्ट को लेकर सहयोग
राजदूत ने चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर भी बात की। उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान भी चाबहार बंदरगाह चालू रहा। हर साल वहां से सामान का ट्रांजिट बढ़ रहा है और आने वाले महीनों में इसे ईरान की रेल व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। उन्होंने इसे दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और यूरोप तक जाने का सबसे छोटा, सस्ता और सुरक्षित मार्ग बताया। गौरतलब है कि भारत ने मई 2024 में चाबहार के शाहिद बेहश्ती पोर्ट को विकसित करने और चलाने के लिए ईरान के साथ 10 साल का समझौता किया है।
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