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रायसीना डायलॉग : 'अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है भारत'

Thu, 16 Jan 2020 01:56 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 16 Jan 2020 01:56 AM IST
सार

  • ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने कहा, खाड़ी क्षेत्र में स्थिति बेहद खतरनाक
  • अमेरिका-ईरान के बीच स्थिति बेहद खतरनाक, भारत को बताया महत्वपूर्ण पक्ष
  • अमेरिका पर वादाखिलाफी करने व अंतरराष्ट्रीय नियम तोड़ने का आरोप लगाया
  • सुलेमानी पर अमेरिकी दूतावास पर हमले की साजिश के आरोप खारिज किए

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Raisina Dialogue : Iran foreign minister says India can play big role in reducing tension in Gulf
विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष जवाद जरीफ - फोटो : एएनआई

विस्तार

ईरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद अमेरिका से जारी तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने कहा, भारत खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है क्योंकि वह एक महत्वपूर्ण पक्ष है। ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा स्थिति बेहद खतरनाक हैं।

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रायसीना डायलॉग के दूसरे दिन बुधवार को जरीफ ने अमेरिका पर वादाखिलाफी करने और अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और आतंकी संगठन आईएस सुलेमानी की हत्या का जश्न मना रहे हैं। आज आईएस के खिलाफ नया गठबंधन बनाना जरूरी है। तालिबान के खिलाफ अभियान छेड़ने वाला अमेरिका आज अफगानिस्तान से निकलने के लिए आईएस के साथ समझौता कर रहा है। इराक पर उसने मनमर्जी चलाई।
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जरीफ ने सुलेमानी पर अमेरिकी दूतावास पर हमले की साजिश के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, अमेरिका पश्चिम एशिया को अपनी एक खास निगाह से देखता है। यहां की जनता की निगाह से नहीं। जनरल सुलेमानी की मौत के बाद ईरान में 90 लाख लोग सड़कों पर उतरे। रूस, भारत सहित चार देशों के लोग भी इसके खिलाफ विरोध में उतरे। भारत में तो 430 शहरों में प्रदर्शन हुए। अमेरिका को अपने नजरिये में बदलाव लाने की जरूरत है। जनरल सुलेमानी की मौत के बाद ईरान की कार्रवाई आत्मरक्षा के लिए थी।

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यात्री विमान को मार गिराना एक भूल थी

जरीफ ने यूक्रेनी एयरलाइन्स को मार गिराने के लिए खेद व्यक्त किया और कहा कि यह तनाव के कारण हुआ। जरीफ ने कहा कि सुलेमानी की याद में ईरान की सड़कों पर करीब नौ लाख लोग उतरे थे। आप इतने लोगों को विरोध करने के लिए नहीं ला सकते हैं। एक विमान का नीचे गिरना एक गलती थी। 180 परिवार अपने प्रियजनों के खोने का शोक मना रहे हैं। यह तनाव के कारण हुआ।

अमेरिका के साथ बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं

ईरान द्वारा इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल हमले के कुछ देर बाद यह विमान हादसा हुआ था। यह पूछे जाने पर कि क्या मौजूदा संकट के कूटनीतिक समाधान का मौका है, जरीफ ने अमेरिका के साथ बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया। जरीफ ने कहा कि ईरान कूटनीति में रुचि रखता है। हमें अमेरिका के साथ बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं है। 

जो दोनों देश चाहेंगे वही होगा : एस जयशंकर

इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत के तटस्थ रहने का संदेश दिया। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के संबंध में उन्होंने कहा कि दोनों स्वायत्त देश हैं। ऐसे में दोनों देशों को अपने फैसले लेने का अधिकार है। जाहिर तौर पर आखिर में वही होगा जो दोनों देश चाहेंगे। इस दौरान ईरान के विदेश मंत्री जरीफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से भी मुलाकात की।

‘भारत का तरीका व्यवधान डालने वाला नहीं है। भारत कई मामलों में पुरानी छवि में कैद हो कर रह गया था। हम बोलते ज्यादा थे और काम कम करते थे। हम इस छवि से बाहर निकल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रकार की गड़बड़ी फैलाना, स्वार्थी व्यापारी की तरह व्यवहार करना भारत का तरीका नहीं है। अब हम वैश्विक मामलों में बचने की जगह निर्णय लेने में यकीन रखते हैं।’
- एस जयशंकर, विदेश मंत्री

भारत को मिले स्थायी सदस्यता : रूस  

रूस के विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता की पुरजोर वकालत की। लोवरोव ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे विकासशील देशों को यूएनएससी में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। रायसीना डायलॉग में लावरोव ने कहा, ब्रिक्स पर फैसला लेने के महत्व के मुद्दे जी-7 तय नहीं कर सकते। यह जी-30 होना चाहिए। भारत और ब्राजील को निश्चित तौर पर यूएनएससी का स्थायी सदस्य होना चाहिए।

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