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Iran: 'मुआवजा और तीसरे देश की गारंटी', ईरान ने बताईं युद्ध रोकने की शर्तें; भारत के जहाजों पर दिया बड़ा बयान

Tue, 24 Mar 2026 06:50 AM IST
Shivam Garg न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Shivam Garg Updated Tue, 24 Mar 2026 06:50 AM IST
सार

मुंबई में ईरान के महावाणिज्यदूत सईद रजा मोसयेब मोतलाघ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को युद्ध शुरू करने वाले पक्षों से बातचीत करनी चाहिए और ऐसे कृत्यों को बंद करने के लिए कहना चाहिए। उन्होंने सभी देशों से आग्रह किया कि वे आक्रमणकारियों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जवाबदेह ठहराएं। 

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Iran Demands War Reparations and Guarantees Before West Asia Talks, Assures Energy Transit for India
सईद रजा मोसयेब मोतलाघ, ईरान के महावाणिज्यदूत - फोटो : ANI

विस्तार

ईरान के मुंबई स्थित महावाणिज्यदूत सईद रेजा मोसायेब मोटलाघ ने पश्चिम एशियाई संघर्ष को लेकर किसी भी वार्ता में शामिल होने से पहले अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा सभी नुकसान और युद्ध की क्षतिपूर्ति का भुगतान होना चाहिए। विश्वसनीय गारंटी दी जानी चाहिए। ये गारंटी किसी भरोसेमंद तीसरे देश से आनी चाहिए, अमेरिका से नहीं, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। स्वाभाविक रूप से, हम कूटनीति और संवाद के लिए तैयार हैं।
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जब ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी के बारे में पूछा गया, तो मोटलाघ ने कहा कि ईरान ने यह केवल शत्रुतापूर्ण देशों के लिए किया है। उन्होंने कहा "ईरान की ओर से उन देशों को कौन सी गारंटी दी जा सकती है, जो ऊर्जा के सबसे बड़े आयातक हैं, जैसे भारत, इस पर महावाणिज्यदूत कहा हम भारत और दुनिया के लोगों की सहायता के लिए तैयार हैं, सिवाय उन शत्रुतापूर्ण देशों और उनके हितों के। ऐसे देश जैसे भारत, जिनका इस शत्रुता में कोई हिस्सा नहीं है, उन्हें अपने जहाजों के पारगमन और ट्रांजिट की अनुमति दी गई है।
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मोटलाघ ने सभी देशों से आह्वान किया कि वे आक्रमणकारी को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा उन्हें उस पक्ष के साथ बातचीत करके सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए जिसने युद्ध शुरू किया है और उसे विश्व स्तर पर ऐसे कार्य बंद करने के लिए मजबूर करना चाहिए। यह मुद्दा केवल ईरान तक सीमित नहीं है। इतिहास गवाह है कि ऐसा बार-बार हुआ है... अतीत में, उन्होंने जिस भी देश को चुना, उसे क्रूर उपायों का उपयोग करके नष्ट कर दिया... आज, हालांकि, उनका सामना एक ऐसे राष्ट्र से है जो दृढ़ता से विरोध करता है। इसलिए, हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सभी देशों से आग्रह करते हैं कि वे उन्हें जवाबदेह ठहराएं, उन्हें प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर करें और यह सुनिश्चित करें कि वे फिर कभी किसी भी देश के खिलाफ इस तरह की एकतरफा कार्रवाई न करें।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रखने पर सहमत हो गया है। ट्रंप ने आगे कहा "अब, ईरान के पास अमेरिका और हमारे सहयोगियों के लिए अपने खतरों को समाप्त करने का एक और अवसर है और हमें उम्मीद है कि वे इसका लाभ उठाएंगे। किसी भी तरह, अमेरिका और पूरी दुनिया जल्द ही बहुत सुरक्षित हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने ईरान के रक्षा औद्योगिक आधार और उसके नौसेना को नष्ट कर दिया है।

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