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पश्चिम एशिया संकट के बीच अहम फैसला: आईओसी खरीदेगी कच्चे तेल-एलपीजी के जहाज, शिपिंग पर होगा कंट्रोल
Sun, 08 Nov 2026 12:38 PM IST
नितिन गौतम
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 08 Nov 2026 12:38 PM IST
सार
जहाज खरीदने और देश में ही जहाज निर्माण को बढ़ावा देने की IOC की योजना भारतीय तेल कंपनियों की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत वे अपनी परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना चाहती हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात और विदेशी समुद्री मार्गों पर निर्भर है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री परिवहन में आ रही बाधाओं के बीच भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन अपने कच्चे तेल और एलपीजी की ढुलाई के लिए खुद के जहाज खरीदने की योजना बना रही है। माल ढुलाई की लागत में भारी बढ़ोतरी के बीच देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी कंपनी अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण मजबूत करना चाहती है। कंपनी के निदेशक मंडल ने पहले ही कुछ जहाज खरीदने की मंजूरी दे दी है और इसके लिए कई महीने पहले निविदाएं भी जारी की जा चुकी हैं। आईओसी के वित्त निदेशक अनुज जैन ने दूसरी तिमाही के नतीजों पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।
शिपिंग पर फोकस कर रही कंपनी
जैन ने कहा, 'अब देश की तेल क्षेत्र की कंपनियों को शिपिंग पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।'' उन्होंने बताया कि आईओसी सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत देश में ही जहाज बनाने की संभावनाएं भी तलाश रही है। इस कदम से कंपनी की जहाजों के इस्तेमाल से जुड़ी रणनीति में बदलाव आने के संकेत हैं। अब तक आईओसी मुख्य रूप से समय-आधारित और यात्रा-आधारित चार्टर व्यवस्था के तहत जहाजों का इस्तेमाल करती रही है। कंपनी अब तीन विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें मौजूदा चार्टर व्यवस्था को बेहतर बनाना, खुद के जहाज खरीदना और घरेलू जहाज निर्माण को बढ़ावा देना शामिल है।
पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई चिंता
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इससे माल ढुलाई की दरों और युद्ध जोखिम बीमा की लागत में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में जहाजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना पहले से ज्यादा अहम हो गया है। जैन के मुताबिक, आईओसी फिलहाल समय-आधारित चार्टर पर कच्चे तेल के तीन और एलीपीजी के नौ जहाजों का इस्तेमाल कर रही है। मौजूदा संकट के दौरान इस व्यवस्था से कंपनी को काफी लागत बचाने में मदद मिली है।
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तेल ढुलाई कई गुना महंगी हुई
उन्होंने बताया कि समय-आधारित चार्टर पर लिए गए कच्चे तेल के जहाजों से ढुलाई की लागत करीब 2 से 2.50 डॉलर प्रति बैरल आती है, जबकि खुले बाजार में यह दर बढ़कर 8 से 10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसी तरह, LPG की ढुलाई की दर सामान्य तौर पर करीब 40 डॉलर प्रति टन रहती है, लेकिन खुले बाजार में यह बढ़कर 160 से 180 डॉलर प्रति टन हो गई है। जैन ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आईओसी ने अपनी कुल जरूरत का 55 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से खरीदा। वहीं, पश्चिम एशिया से 24 प्रतिशत आपूर्ति हुई। इसके अलावा अफ्रीका से करीब 10 प्रतिशत, ब्राजील से 7 प्रतिशत, अमेरिका से 2 से 5 प्रतिशत और वेनेजुएला से 3 से 4 प्रतिशत कच्चा तेल खरीदा गया।
तेल की कीमतों में तेजी जारी
कंपनी ने खुले बाजार से कच्चे तेल की खरीद भी काफी बढ़ाई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कुल कच्चे तेल के आयात में खुले बाजार से की गई खरीद की हिस्सेदारी करीब 87 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह लगभग 50 प्रतिशत थी। कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों में विविधता लाने की यह रणनीति फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद तेल की कीमतों में आई तेज उछाल के बीच सामने आई है। जैन ने बताया कि फरवरी में भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल थी। यह पहली तिमाही के अधिकतर समय 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही और अक्टूबर में इसका औसत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल रहा।
आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के बावजूद आईओसी ने अपनी रिफाइनरियों का संचालन बेहतर स्तर पर बनाए रखा है। कंपनी ने कच्चे तेल का भंडार भी सामान्य 33 से 35 दिनों से बढ़ाकर करीब 39 दिनों का कर लिया है। इसके अलावा कंपनी के पास LPG का 20 दिनों और पेट्रोल-डीजल का 23 से 25 दिनों का भंडार है।
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शिपिंग पर फोकस कर रही कंपनी
जैन ने कहा, 'अब देश की तेल क्षेत्र की कंपनियों को शिपिंग पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।'' उन्होंने बताया कि आईओसी सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत देश में ही जहाज बनाने की संभावनाएं भी तलाश रही है। इस कदम से कंपनी की जहाजों के इस्तेमाल से जुड़ी रणनीति में बदलाव आने के संकेत हैं। अब तक आईओसी मुख्य रूप से समय-आधारित और यात्रा-आधारित चार्टर व्यवस्था के तहत जहाजों का इस्तेमाल करती रही है। कंपनी अब तीन विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें मौजूदा चार्टर व्यवस्था को बेहतर बनाना, खुद के जहाज खरीदना और घरेलू जहाज निर्माण को बढ़ावा देना शामिल है।
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पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई चिंता
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इससे माल ढुलाई की दरों और युद्ध जोखिम बीमा की लागत में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में जहाजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना पहले से ज्यादा अहम हो गया है। जैन के मुताबिक, आईओसी फिलहाल समय-आधारित चार्टर पर कच्चे तेल के तीन और एलीपीजी के नौ जहाजों का इस्तेमाल कर रही है। मौजूदा संकट के दौरान इस व्यवस्था से कंपनी को काफी लागत बचाने में मदद मिली है।
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तेल ढुलाई कई गुना महंगी हुई
उन्होंने बताया कि समय-आधारित चार्टर पर लिए गए कच्चे तेल के जहाजों से ढुलाई की लागत करीब 2 से 2.50 डॉलर प्रति बैरल आती है, जबकि खुले बाजार में यह दर बढ़कर 8 से 10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसी तरह, LPG की ढुलाई की दर सामान्य तौर पर करीब 40 डॉलर प्रति टन रहती है, लेकिन खुले बाजार में यह बढ़कर 160 से 180 डॉलर प्रति टन हो गई है। जैन ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आईओसी ने अपनी कुल जरूरत का 55 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से खरीदा। वहीं, पश्चिम एशिया से 24 प्रतिशत आपूर्ति हुई। इसके अलावा अफ्रीका से करीब 10 प्रतिशत, ब्राजील से 7 प्रतिशत, अमेरिका से 2 से 5 प्रतिशत और वेनेजुएला से 3 से 4 प्रतिशत कच्चा तेल खरीदा गया।
तेल की कीमतों में तेजी जारी
कंपनी ने खुले बाजार से कच्चे तेल की खरीद भी काफी बढ़ाई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कुल कच्चे तेल के आयात में खुले बाजार से की गई खरीद की हिस्सेदारी करीब 87 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह लगभग 50 प्रतिशत थी। कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों में विविधता लाने की यह रणनीति फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद तेल की कीमतों में आई तेज उछाल के बीच सामने आई है। जैन ने बताया कि फरवरी में भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल थी। यह पहली तिमाही के अधिकतर समय 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही और अक्टूबर में इसका औसत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल रहा।
आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के बावजूद आईओसी ने अपनी रिफाइनरियों का संचालन बेहतर स्तर पर बनाए रखा है। कंपनी ने कच्चे तेल का भंडार भी सामान्य 33 से 35 दिनों से बढ़ाकर करीब 39 दिनों का कर लिया है। इसके अलावा कंपनी के पास LPG का 20 दिनों और पेट्रोल-डीजल का 23 से 25 दिनों का भंडार है।