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ईडी के हाई प्रोफाइल अफसर के लिए चिदंबरम की जांच बनी जी का जंजाल

Tue, 30 Oct 2018 03:26 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Updated Tue, 30 Oct 2018 03:26 PM IST
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investigation of P Chidambaram role in Aircel Maxis case become problem for ED officer
राजेश्वर सिंह

एक ऐसी लड़ाई जिसमें एक तरफ वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हैं, तो दूसरी ओर भाजपा के एक चर्चित सांसद हैं और इनके बीच में वित्त मंत्रालय का टॉप अधिकारी यानी सेक्रेटरी और ईडी का एक ज्वाइंट डायरेक्टर है। ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय का वह तेज तर्रार और ईमानदार छवि वाले अफसर के लिए एयरसेल-मैक्सिस केस में चिदंबरम और उनके बेटे कीर्ति की भूमिका की जांच जी का जंजाल बन गई है। इस अफसर का विभाग जो कि वित्त मंत्रालय से जुड़ा है, उसके सचिव भी साथ नहीं दे रहे हैं। 

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मामला यहीं पर खत्म नहीं हुआ। ईडी के पूर्व निदेशक करनैल सिंह, जिन्हें अब तक इस अफसर की ढाल माना जाता था, वे अब रिटायर हो गए हैं। उनके जाते ही इस अफसर पर शिकंजा कसना शुरू हो गया। खास बात है कि इस लड़ाई में वह चर्चित भाजपाई नेता भी अब खुल कर सामने आ गए हैं और उन्होंने ईडी के अफसर को कारण बताओ नोटिस देने का कड़ा विरोध भी जता दिया है। 
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जानिये, कौन किस भूमिका में है और कैसा वार कर रहा है

अब हम आपको बताते हैं कि कौन किस भूमिका में है। कांग्रेसी नेता पी. चिदंबरम हैं, भाजपाई नेता सुब्रमणयम स्वामी हैं और ईडी अफसर राजेश्वर सिंह हैं, जबकि वित्त सचिव हसमुख अधिया हैं। स्वामी तो पहले भी कह चुके हैं कि अगर सरकार ने राजेश्वर सिंह को हटाया तो वे भ्रष्टाचार के उन सभी केसों को वापस ले लेंगे, जो उन्होंने चिदंबरम के खिलाफ किए थे। कहा जा रहा है कि राजेश्वर सिंह और हसमुख अधिया के बीच कथित तौर पर लंबे समय से विभागीय तनातनी चल रही है। 
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सुप्रीम कोर्ट के बीच में आने के कारण सरकार चाह कर भी कुछ केसों से राजेश्वर सिंह को दूर नहीं कर सकी। उन्होंने 11 जून 2018 को वित्त मंत्रालय के सचिव अधिया को एक चिट्ठी लिखी। इसमें उन्होंने अधिया पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए। सिंह के पत्र के मुताबिक, उनकी पदोन्नति की फाइल लंबे समय तक लटकाई गई। जब उन्होंने वित्त सचिव से अपनी बात कहने के लिए मुलाकात का समय मांगा जो नहीं मिला। सिंह लिखते हैं कि चिदंबरम या उपेंद्र राय, इन सभी केसों में मुझ पर गलत कार्य करने का भारी दबाव बनाया गया। 

जब पांच जून को वह चिदंबरम से पूछताछ कर रहे थे तो उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल लगा दी गई और उनके उपर आरोप लगाया गया कि वह जानबूझकर एयरसेल मैक्सिस केस की जांच में देरी कर रहे हैं। सिंह ने आगे लिखा कि बीस साल की सेवा में आईएएस, आईपीएस और आईआरएस अफसरों ने उनकी आउटस्टेडिंग रिपोर्ट दी है, लेकिन आप हैं केवल जो मेरे काम से संतुष्ट नहीं हैं। 

ईडी ने किया अपने अफसर का बचाव

सिंह पर आरोप लगा है कि उन्होंने दुबई में रहने वाले दानिश शाह से बातचीत की है। दानिश को पहले रॉ एजेंट बताया गया। बाद में सिंह ने क्लीयर कर दिया है कि यह गलत है। जांच में पता चला कि दानिश की शादी एक पाकिस्तानी महिला से हुई है और वह आर्मी परिवार से संबंध रखती है। सिंह ने अपने पत्र में लिखा, जांच में यह बात भी सामने आई कि दानिश दुबई आने वाले भारतीय वीआईपी का ब्यौरा पाक आईएसआई को देता था। सिंह ने साफ तौर पर कहा कि उनकी सिर्फ एक केस के सिलसिले में ही बातचीत हुई है। इससे ज्यादा कुछ नहीं। 

इस बाबत ईडी के तत्कालीन निदेशक करनैल सिंह ने भी उनका पूरा बचाव किया। उन्होंने 27 जून को प्रेस रिलीज जारी कर कहा, एक जिम्मेदार अफसर पर इस तरह के आरोप लगाना सही नहीं है। उन्होंने दुबई से आई एक कॉल रिसीव की थी। सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि दुबई से जो रॉ की रिपोर्ट मिली, उसे भी जानबूझकर मेरे खिलाफ इस्तेमाल करने का प्रयास किया गया। सिंह ने कहा, मंत्रालय के हर पैमाने पर काबिल पाए जाने के बावजूद मेरे प्रमोशन पर विचार नहीं किया गया। जब मुझे अहम केस की जांच से हटाने की कोशिश हुई तो आपने दूसरे अफ़सरों से कहा कि मैंने कथित रूप से न्यायपालिका के साथ सेटिंग कर ली है।

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पी चिदंबरम

आखिर राजेश्वर सिंह का कसूर क्या है

कोई नहीं बता सकता है कि राजेश्वर सिंह जैसे तेज तर्रार अधिकारी का कसूर क्या है। चर्चा है कि क्या सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की तरह राजेश्वर सिंह को भी ईडी से दूर करने की कोशिश शुरु हो गई है। वर्मा को तो छुट्टी पर भेजा गया है, लेकिन सिंह को अब ईडी के अहम कामकाज से हटाने की तैयारी हो रही है। सूत्र बताते हैं कि सरकार इस बात से भी नाराज है कि सुब्रमणयम स्वामी उनके समर्थन में क्यों खड़े हैं। 

एक केंद्रीय एजेंसी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि चिदंबरम केस में आलोक वर्मा, प्रशांत भूषण, राजेश्वर सिंह और स्वामी के बीच कई दौर की बातचीत हुई है। दूसरी ओर हसमुख अधिया 1981 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अफसर हैं। उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी का विश्वस्त माना जाता है। गुजरात में जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे तो भी हसमुख अधिया अहम भूमिका में रहे हैं। जब मोदी पीएम बने तो सबसे पहले उन्हें नवंबर 2014 में गुजरात से दिल्ली में वित्त मंत्रालय में सचिव के तौर पर लाया गया। साल 2015 में वे राजस्व सचिव बने। 

नवंबर 2017 में उन्हें वित्त सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने ही सिंह के मामले में रॉ की रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है। जानकार बताते हैं कि मौजूदा हालात में सिंह के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई हो, ऐसी संभावना कम ही है। वर्मा-अस्थाना के विवाद से अभी केंद्र सरकार बाहर भी नहीं निकल पाई है। ऐसे में फिर एक और विवाद में फिलहाल सरकार फंसना नहीं चाहती है। दूसरी ओर, सुब्रमणयम स्वामी का खुलकर राजेश्वर सिंह के समर्थन में उतरना, ऐसे में सिंह के खिलाफ कार्रवाई होगी, इसके आसार कम ही दिखते हैं।

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