फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Introduction of the literary and critic Namwar Singh

प्रख्यात साहित्यकार और आलोचक नामवर सिंह ने जब किया था राजनीति की ओर रुख

Wed, 20 Feb 2019 03:18 AM IST
sapna singla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: sapna singla Updated Wed, 20 Feb 2019 03:18 AM IST
विज्ञापन
Introduction of the literary and critic Namwar Singh
नामवर सिंह

28 जुलाई 1926 को उत्तर प्रदेश जीयनपुर, वाराणसी से आने वाले नामवर सिंह हिंदी आलोचना के शीर्षस्थ रचनाकार थे। वे एक समालोचक, निबंधकार, संपादक रहे। साहित्य के संसार में उनकी जीवन यात्रा हिंदी के अपभ्रंश साहित्य से लेकर समसामयिक साहित्य तक फैली हुई है। नामवर सिंह ने हिंदी साहित्य की पीढ़ियों को प्रभावित किया।

विज्ञापन


वे अपने समकालीन लेखकों से लेकर युवा रचनाशीलता तक को स्पर्श करते रहे। नई और पुरानी पीढ़ी पर उनकी छाया की छाप देखी जा सकती है।



उन्होंने 1959 में चकिया चन्दौली के लोकसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से चुनाव भी लड़ा था। इसके बाद वह दिल्ली आ गए थे, यहां उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र की स्थापना की।
विज्ञापन


बता दें कि प्रख्यात साहित्यकार व आलोचक नामवर सिंह को अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा 'शब्द सम्मान' से भी नवाजा जा चुका है। यह पुरस्कार नामवर सिंह को हिंदी भाषा में सतत् विशिष्ट रचनात्मक योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


साहित्य को लेकर नामवर सिंह का कहना था- साहित्य को लेकर मैं एक ही सिद्धांत मानता रहा हूं। साहित्य में सह शब्द है। साहित्य में शब्द भी सुंदर हो और अर्थ भी सुंदर हो तो साहित्य होता है। सह भाव साहित्य का धर्म है, इसलिए वही साहित्य श्रेष्ठ होगा जो साहित्य धर्म का पालन करेगा। 

मालूम हो कि अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा शब्द सम्मान के रूप में छः अलंकरणों की स्थापना की गई। यह सम्मान अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हर साल दिया जाएगा। सम्मान के अंतर्गत साहित्य के दो सर्वोच्च सम्मान, एक हिंदी और एक किसी अन्य भारतीय भाषा में सतत् विशिष्ट रचनात्मक योगदान के लिए दिया जाएगा। 


आलोचना में उनकी किताबें पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, कहानी नई कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज, वाद विवाद संवाद आदि मशहूर हैं। उनका साक्षात्कार ‘कहना न होगा’ भी साहित्य जगत में लोकप्रिय है। इसके अलावा उनकी छायावाद, नामवर सिंह और समीक्षा, आलोचना और विचारधारा जैसी किताबें भी चर्चित हैं। 



सम्मान

साहित्य अकादमी पुरस्कार - 1971 (कविता के नये प्रतिमान)
शलाका सम्मान -हिंदी अकादमी, दिल्ली की ओर से
साहित्य भूषण सम्मान- उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से
शब्दसाधक शिखर सम्मान - 2010 (‘पाखी’ तथा इंडिपेंडेंट मीडिया इनिशिएटिव सोसायटी की ओर से)
महावीरप्रसाद द्विवेदी सम्मान - 21 दिसम्बर 2010

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed