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कांग्रेस पर भारी पड़ रही अंदरूनी राजनीति, आगामी विधानसभा चुनावों में कैसे बहेगी पार्टी की हवा

Fri, 06 Sep 2019 07:57 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला
शशिधर पाठक, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 06 Sep 2019 07:57 PM IST
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Internal disputes is a biggest challenge for congress president sonia gandhi before state elections
सोनिया-राहुल गांधी - फोटो : PTI

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर कांग्रेसी नेताओं को भरोसा है, लेकिन उन्हें पार्टी की अंदरुनी हालत खाए जा रही है। पूर्वोत्तर से जुड़ी एक युवा नेता का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष निर्णय तो ले सकती हैं, लेकिन आगामी राज्यों के विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रचार कौन करने जाएगा? क्योंकि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी नई भूमिका तलाशना शुरू कर दिया है। जबकि पहले राहुल गांधी हर रोज तीन-चार जनसभा करके पार्टी में जान फूंकने के लिए उपलब्ध रहते थे। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने खुद को केवल उत्तर प्रदेश तक समेट लिया है।

केसी वेणुगोपाल से पूछ लीजिए

कांग्रेस के भीतर यह एक नई समस्या उभरी है। कोई नेता कुछ पूछना, जानना या मिलना चाहता है, तो कहा जा रहा है कि केसी वेणुगोपाल से पूछ लीजिए। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का स्वास्थ्य बहुत अच्छा नहीं रहता। वह स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर सक्रिय रहती हैं। वह जनसभा को संबोधित करने, पार्टी के प्रचार अभियान को धार देने से खुद को दूर रखकर चल रही हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की पूरी युवा ब्रिगेड खुद को काफी अलग-थलग पा रही है।

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वहीं, वरिष्ठ नेताओं का एक तबका ही काफी सक्रिय है। दूसरा और पार्टी का तीसरा धड़ा अपनी पारी का किनारे खड़ा होकर इंतजार कर रहा है। ऐसे में केसी वेणुगोपाल से पूछ लेने का उत्तर कांग्रेस पार्टी के अधिकांश नेताओं के गले नहीं उतर रहा है।

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किसके नाम पर जुटेंगे दस हजार लोग?

कांग्रेस के युवा और वरिष्ठ नेताओं में वह कौन सा चेहरा है, जो अपने गृहराज्य में दस हजार लोगों की भीड़ जुटा सकता है? वह कौन सा चेहरा है, जिसके दूसरे राज्य में दौरा करने पर उसके नाम पर करीब दस हजार लोग आ सकते हैं? यह सवाल मुख्यमंत्री पद की लाइन में लगे एक नेता का है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी कॉडर बेस्ड पार्टी की बजाय लीडर सेंट्रिक पार्टी हो गई थी। हमारे पास तमाम छत्रप थे, लेकिन मौजूदा समय में हमें ऐसा कोई चेहरा दिखाई नहीं देता। सूत्रों का कहना है कि जब तक पार्टी के पास नेता नहीं होंगे, कांग्रेस पार्टी को राष्ट्रीय स्तर की मजबूती नहीं दी जा सकती।



युवा नेता की तकलीफ है कि पार्टी इसे ध्यान में रखकर कोई रणनीति नहीं बना पा रही है। न ही कोई स्पष्टता दिखाई दे रही है। बताते हैं कांग्रेस पार्टी के तमाम नेता या तो दिल्ली में बैठना पसंद कर रहे हैं, या फिर किसी अवसर की प्रतीक्षा में रहते हैं। अपने क्षेत्र में भी कम उपलब्ध रहते हैं। इसी का नतीजा है कि लोकसभा चुनाव 2019 का नतीजा आने के बाद से पार्टी के भीतर लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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