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Manipur: सुरक्षा बलों की PLA के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 15 गिरफ्तार; असम राइफल्स के काफिले पर हमले में थे शामिल
Sun, 05 Oct 2025 06:20 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 05 Oct 2025 06:20 PM IST
सार
Manipur: मणिपुर में प्रतिबंधित पीएलए के खिलाफ सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई की और पिछले महीने असम राइफल्स काफिले पर हमले में शामिल इसके 15 सदस्य गिरफ्तार किए हैं। मुख्य आरोपी ठौंगराम सदानंद सिंह और खोंद्राम ओजित सिंह को घटना के 72 घंटे के भीतर पकड़ा गया। सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि पीएलए किसी राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहा है या नहीं।
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मणिपुर में तैनात सुरक्षा बल
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
मणिपुर घाटी स्थित प्रतिबंधित समूह पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के खिलाफ सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान पिछले महीने असम राइफल्स के काफिले पर हुए हमले में शामिल 15 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। काफिले पर हमले में दो जवानों का बलिदान हुआ था।
मुख्य आरोपी ठौंगराम सदानंद सिंह उर्फ पुरकपा (18 वर्षीय) और खोंद्राम ओजित सिंह उर्फ केइलाल (47 वर्षीय) को नंबोल घटना के 72 घंटों के भीतर पकड़ा गया। सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या पीएलए किसी राजनीतिक संरक्षण के तहत काम कर रहा है। यह जांच ऐसे समय में हो रही है जब एक और प्रमुख उग्रवादी समूह यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) ने हाल ही में युद्धविराम की घोषणा की है और 24 कुकी उग्रवादी समूहों द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ पहले से हस्ताक्षर किए गए ऑपरेशन निलंबन समझौते में शामिल होने के लिए सहमति जताई है।
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आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि कुछ समूह राष्ट्रपति शासन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जो राज्य में गंभीर जातीय हिंसा को रोकने में मददगार साबित हुआ है। ये समूह यह प्रचार कर रहे हैं कि वर्तमान प्रशासन असफल है और निलंबित विधानसभा को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए।
असम राइफल्स के काफिले पर 19 सितंबर को नंबोल साबल लैकेई में हमला हुआ था, जहां सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफ्सपा) लागू नहीं है और आमतौर पर सीआरपीएफ सड़क सुरक्षा करती है। इस हमले में नायब सूबेदार श्याम गुरूंग और राइफलमैन रंजीत सिंह कश्यप की मौत हुई। यह मणिपुर में केंद्रीय सुरक्षा बलों पर पहला हमला था, जब से मई 2023 में कुकी-जो और मेतेई समुदायों के बीच हिंसा शुरू हुई थी।
ये भी पढ़ें: TVK प्रमुख विजय के प्रचार वाहन के चालक के खिलाफ मामला दर्ज, हाईकोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया कदम
जांच के दौरान पता चला कि बरामद हथियारों में से छह हथियार पहले की जातीय झड़पों में पुलिस शस्त्रागार से लूटे गए थे, जिससे पता चलता है कि ये हथियार अब उग्रवादी समूहों के हाथ लग रहे हैं। नंबोल हमले में इस्तेमाल हुई एक वैन भी मूतुम यांगबी से बरामद हुई, जो हमले के स्थल से लगभग 12 किलोमीटर दूर है। यूएनएलएफ के सदस्य ठौंगराम सदानंद सिंह हाल ही में अपने समूह के हथियार डालने के बाद पीएलए में शामिल हुए थे। हालांकि, पीएलए ने नंबोल हमले की जिम्मेदारी नहीं ली। लेकिन अतीत में यह उग्रवादी समूह हमेशा अपने सभी हमलों की जिम्मेदारी लेता रहा है।
खुफिया एजेंसियों को ऐसा संदेह है कि यह हमला राजनीतिक कारणों से हो सकता है, जिसका मकसद राज्य की नाजुक स्थिति को खराब करना, राष्ट्रपति शासन को बदनाम करना या लोकप्रिय सरकार के पुनर्गठन को रोकना हो। हमले के बाद राज्यपाल अजय भल्ला की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें सभी सुरक्षा एजेंसियों को हमलावरों को जल्द पकड़ने और मुख्य मार्गों की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया गया।
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मुख्य आरोपी ठौंगराम सदानंद सिंह उर्फ पुरकपा (18 वर्षीय) और खोंद्राम ओजित सिंह उर्फ केइलाल (47 वर्षीय) को नंबोल घटना के 72 घंटों के भीतर पकड़ा गया। सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या पीएलए किसी राजनीतिक संरक्षण के तहत काम कर रहा है। यह जांच ऐसे समय में हो रही है जब एक और प्रमुख उग्रवादी समूह यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) ने हाल ही में युद्धविराम की घोषणा की है और 24 कुकी उग्रवादी समूहों द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ पहले से हस्ताक्षर किए गए ऑपरेशन निलंबन समझौते में शामिल होने के लिए सहमति जताई है।
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असम राइफल्स के काफिले पर 19 सितंबर को नंबोल साबल लैकेई में हमला हुआ था, जहां सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफ्सपा) लागू नहीं है और आमतौर पर सीआरपीएफ सड़क सुरक्षा करती है। इस हमले में नायब सूबेदार श्याम गुरूंग और राइफलमैन रंजीत सिंह कश्यप की मौत हुई। यह मणिपुर में केंद्रीय सुरक्षा बलों पर पहला हमला था, जब से मई 2023 में कुकी-जो और मेतेई समुदायों के बीच हिंसा शुरू हुई थी।
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जांच के दौरान पता चला कि बरामद हथियारों में से छह हथियार पहले की जातीय झड़पों में पुलिस शस्त्रागार से लूटे गए थे, जिससे पता चलता है कि ये हथियार अब उग्रवादी समूहों के हाथ लग रहे हैं। नंबोल हमले में इस्तेमाल हुई एक वैन भी मूतुम यांगबी से बरामद हुई, जो हमले के स्थल से लगभग 12 किलोमीटर दूर है। यूएनएलएफ के सदस्य ठौंगराम सदानंद सिंह हाल ही में अपने समूह के हथियार डालने के बाद पीएलए में शामिल हुए थे। हालांकि, पीएलए ने नंबोल हमले की जिम्मेदारी नहीं ली। लेकिन अतीत में यह उग्रवादी समूह हमेशा अपने सभी हमलों की जिम्मेदारी लेता रहा है।
खुफिया एजेंसियों को ऐसा संदेह है कि यह हमला राजनीतिक कारणों से हो सकता है, जिसका मकसद राज्य की नाजुक स्थिति को खराब करना, राष्ट्रपति शासन को बदनाम करना या लोकप्रिय सरकार के पुनर्गठन को रोकना हो। हमले के बाद राज्यपाल अजय भल्ला की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें सभी सुरक्षा एजेंसियों को हमलावरों को जल्द पकड़ने और मुख्य मार्गों की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया गया।
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