ICMR: देश में 15 साल में 284 बार फैला इन्फ्लूएंजा, हर साल मानसून के बाद फैलता है संक्रमण
आईसीएमआर के पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के शोधकर्ताओं ने बताया कि इन्फ्लूएंजा के मामलों में 2021 में काफी वृद्धि हुई है, जिस साल कोरोना महामारी की दूसरी लहर का पूरे देश ने सामना किया।
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भारतीय वैज्ञानिकों ने एक चिकित्सा अध्ययन में दावा किया है कि भारत में हर साल मानसून के बाद इन्फ्लूएंजा वायरस का प्रकोप फैलता है। 2006 से 2021 के बीच 15 साल में 284 बार एच5एन1 संक्रमण के मामले सबसे ज्यादा सामने आए हैं जो बीमार पक्षियों के संपर्क में आने से इन्सानों तक पहुंचता है।
शोधकर्ताओं ने 2016 से 2021 के बीच महज पांच साल में 57 बार एच5एन8 संक्रमण फैलने के सबूत एकत्रित किए हैं, जिसे बर्ड फ्लू कहा जाता है। देश के 24 राज्यों में सबसे ज्यादा इन्फ्लूएंजा के मामले सामने आए। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा है कि देश के अधिकांश राज्यों में हर साल मानसून के बाद इन्फ्लूएंजा वायरस फैलने के सबूत मिले हैं जो इस साल भी जोखिम रहने के संकेत दे रहे हैं।
शोधकर्ताओं ने बताया
आईसीएमआर के पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के शोधकर्ताओं ने बताया कि इन्फ्लूएंजा के मामलों में 2021 में काफी वृद्धि हुई है, जिस साल कोरोना महामारी की दूसरी लहर का पूरे देश ने सामना किया। एनआईवी के वरिष्ठ शोधकर्ता प्रो. शैलेश पवार ने बताया कि इन्फ्लूएंजा के मामले मुख्यतः जंगली पक्षियों में देखे गए हैं। हर साल अक्टूबर से लेकर मार्च माह के बीच सबसे ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं। पोल्ट्री के अलावा, उल्लू, मोर, कौआ और जंगली प्रवासी पक्षी जैसे डेमोइसेल क्रेन, उत्तरी पिनटेल और हंस में यह संक्रमण सबसे अधिक पाया गया है।
हाल में नए वायरस मिले
शोधकर्ताओं का कहना है कि मौसमी स्थिति के जरिये इन्फ्लूएंजा संक्रमण के प्रकोप की रोकथाम और नियंत्रण नीतियों पर काम करने में मदद मिल सकती है। हाल ही में सामने आए एच5एन1 और एच9एन2 जैसे वायरस जंगली, प्रवासी पक्षियों के अलावा पोल्ट्री फार्म से इन्सानों तक पहुंचे हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने के लिए सरकार को जल्द से जल्द नई नीतियों पर काम करना चाहिए।
पूर्वोत्तर से निकलकर 24 से ज्यादा राज्यों में फैला
आंकड़े बताते हैं कि 2010 से पहले तक इन्फ्लूएंजा के मामले पूर्वोत्तर राज्यों में ही दर्ज किए जा रहे थे, लेकिन 2010 से 2021 के बीच देश के बाकी हिस्सों में भी लोग इस संक्रमण की चपेट में आने लगे हैं। स्थिति यह है कि हिमाचल प्रदेश से लेकर केरल और मिजोरम से लेकर गुजरात तक 24 से ज्यादा राज्य इन्फ्लूएंजा को लेकर गंभीर स्थिति में आए हैं।