विकास के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की भी चैंपियन थीं इंदिरा गांधी: सोनिया

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Tue, 08 Sep 2020 04:16 AM IST
विज्ञापन
Sonia Gandhi(file photo)
Sonia Gandhi(file photo) - फोटो : PTI

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
प्रसिद्ध प्रकृतिवादी और प्रसारक डेविड एटनबरो को सोमवार को इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि एटनबरो को सम्मानित किया जा रहा है जो करीब सात दशकों से दुनिया में प्रकृति के प्रति लोगों का प्रेम जगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी विकास की पक्षधर होने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की भी चैंपियन थीं। इसी के परिणामस्वरूप आज देश में जैव विविधता की सुरक्षा के लिए कानूनी व्यवस्था मौजूद है।
विज्ञापन

सोनिया ने प्रकृति के संरक्षण को लेकर एटनबरो के योगदान की सराहना की और पर्यावरण से संबंधित पूर्व पीएम इंदिरा के कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी खुद जीवन भर प्रकृति की प्रहरी बनी रहीं। वह एक राजनीतिक परिवार में पैदा हुईं, लेकिन खुद को प्रकृति की संतान के तौर पर देखा। वह ‘डेल्ही बर्ड वाचिंग सोसायटी’ नामक संस्था की संस्थापक सदस्यों में से एक थीं।
उन्होंने कहा कि जब इंदिरा प्रधानमंत्री बनीं तो वह उस वक्त पर्यावरण संरक्षण की चैंपियन रहीं जब भारत और विदेश में पर्यावरण संरक्षण का विषय लोकप्रिय नहीं हुआ था। उन्होंने स्टॉकहोम में जून 1972 में मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में ऐतिहासिक भाषण दिया जो वैश्विक पर्यावरण विमर्श में मील का पत्थर साबित हुआ।
उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी का विचार था कि बिना निरस्त्रीकरण के आप स्थायी शांति नहीं ला सकते और पर्यावरण का संरक्षण किए बिना विकास सतत नहीं हो सकता। स्टॉकहोम में दिए उसी भाषण में इंदिरा गांधी ने मौसम के बदलते मिजाज की ओर ध्यान खींचा था और उस वक्त इस वास्तविकता को बड़ी मुश्किल से स्वीकार किया जाता था।

सोनिया ने कहा कि इंदिरा गांधी इस तथ्य को लेकर सजग थीं कि वह एक ऐसे विकासशील देश की प्रधानमंत्री हैं जिसे नौकरियों का सृजन करना है और गरीबी से भी निपटना है। कार्यक्रम में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए।

एटनबरो ने प्रकृति के साथ हमें किया एकजुट : मनमोहन
मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर किसी को प्राकृतिक दुनिया के संदर्भ में एक जीवित दिव्य चरित्र के तौर पर वर्णित किया जा सकता है तो वह हैं डेविड एटनबरो। वह पिछले सात दशकों से प्रकृति की मानवीय आवाज रहे हैं। उन्होंने हमें प्रकृति के साथ एकजुट किया है। उन्होंने एटनबरो की फिल्म अ लाइफ इन आवर प्लैनेट पर कहा कि कैसे इंसान प्रकृति के खिलाफ न जाकर उसके साथ साथ काम कर सकता है।

उन्होंने कहा कि हमें प्रकृति की ताकत को पहचानने के लिए किसी आपदा का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को याद करते हुए उनके फैसले को सराहा।

प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले निर्णायक मंडल ने किया था चयन
दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले अंतरराष्ट्रीय निर्णायक मंडल ने शांति, पर्यावरण और विकास के लिए 2019 के पुरस्कार के लिए एटनबरो को चुना था। इंदिरा गांधी स्मारक न्यास द्वारा आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एटनबरो को यह पुरस्कार दिया। पुरस्कार के तहत 25 लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X