Indian Navy: आईएमटी त्रिपक्षीय युद्धाभ्यास में शामिल होगी भारतीय नौसेना, INS तिर और सुजाता का दिखेगा जलवा
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, अभ्यास की शुरुआत सम्मेलन से होगी। इसके बाद क्षति नियंत्रण, अग्निशमन, विजिट बोर्ड खोज और जब्ती प्रक्रियाओं, चिकित्सा व्याख्यान, हताहत निकासी और गोताखोरी संचालन जैसी संयुक्त बंदरगाह प्रशिक्षण गतिविधियों का संचालन किया जाएगा।
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भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस तिर और आईएनएस सुजाता भारत-मोजाम्बिक-तंजानिया (आईएमटी) त्रिपक्षीय युद्धाभ्यास में शामिल होंगी। रक्षा मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी कर इसकी जानकारी दी। त्रिपक्षीय अभ्यास का यह दूसरा चरण है। इसका पहला चरण 22 अक्तूबर को आयोजित किया गया था, जिसमें भारत की ओर से आईएनएस तरकश शामिल हुआ था।
अभ्यास दो चरणों में आयोजित की जाएगी
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, अभ्यास की शुरुआत सम्मेलन से होगी। इसके बाद क्षति नियंत्रण, अग्निशमन, विजिट बोर्ड खोज और जब्ती प्रक्रियाओं, चिकित्सा व्याख्यान, हताहत निकासी और गोताखोरी संचालन जैसी संयुक्त बंदरगाह प्रशिक्षण गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। अभ्यास दो चरणों में आयोजित की जाएगी- पहला चरण 21 से 24 मार्च तक चलेगा तो वहीं, समुद्री चरण 24-27 मार्च तक आयोजित होगा।
भारतीय नौसैनिक जहाज आगंतुकों के लिए खुले रहेंगे
विज्ञप्ति के मुताबिक, समुद्री चरण में एक संयुक्त ईईजेड निगरानी की भी योजना बनाई गई है। बंदरगाह प्रवास के दौरान, भारतीय नौसैनिक जहाज आगंतुकों के लिए खुले रहेंगे। इस दौरान भारतीय नौसेना मेजबान नौसेनाओं के साथ खेल और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में भी भाग लेगी।
देश का सबसे बड़ा नौसेना युद्धाभ्यास पिछले माह हुआ था आयोजित
पिछले माह नौसेना का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास ‘मिलन 24’ आयोजित हुआ था। अभ्यास 19 फरवरी से 27 फरवरी तक चला था। इसमें 50 से अधिक देशों की नौसेनाएं शामिल हुईं थीं। युद्धाभ्यास की पूर्वसंध्या पर नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा था कि समुद्री क्षेत्र में राष्ट्रीय हितों की रक्षा सर्वोपरि है। समुद्र की सुरक्षा के लिए नौसेना का समर्पण उल्लेखनीय है। वास्तव में अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास है।
नौसेना प्रमुख ने कहा था कि वियतनाम पीपुल्स नेवी के कार्वेट 20 और यूनाइटेड स्टेट्स नेवी के यूएसएस हैल्सी (डीडीजी-97) जहाज के साथ-साथ 50 देशों के उच्च जहाज विशाखापत्तनम आएंगे। अभ्यास का सार सहयोग, सामंजस्य और बातचीत में निहित है। यह प्रमाण है कि सभी देश समुद्री सुरक्षा के लिए साझे रूप से प्रतिबद्ध हैं।