Metro: विदेशी पत्रिका के दावे को केंद्र सरकार ने किया खारिज, सफाई में कही यह बात
मंत्रालय का कहना है कि लेख में इस संदर्भ का नितांत अभाव नजर आता है कि भारतीय शहरों का विस्तार हो रहा है। वैसे भी, देश में एक करोड़ दैनिक यात्रियों का आंकड़ा पार कर चुकी सभी मेट्रो प्रणालियों में अगले एक-दो वर्षों में यह संख्या बढ़कर 1.25 करोड़ होने की आशा है।
विस्तार
देश की सभी मेट्रो प्रणालियों में प्रतिदिन सफर करने वाले यात्रियों का आंकड़ा बढ़कर एक करोड़ पहुंच चुका है। मेट्रो यात्रियों की संख्या में यह वृद्धि तेजी से शहरीकरण की तरफ बढ़ते युवा भारत की उभरती आकांक्षाओं का प्रतीक है। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने यह बात कहते हुए द इकोनॉमिस्ट के एक लेख को पूरी तरह निराधार बताया है। मंत्रालय के मुताबिक, पत्रिका ने भारत की मेट्रो रेल प्रणालियों पर अपने लेख में इस तथ्य की गलत व्याख्या की है कि भारत की विशाल मेट्रो व्यवस्था पर्याप्त संख्या में यात्रियों को आकर्षित करने में विफल हो रही है।
मेट्रो रेल नेटवर्क का अध्ययन करना चाहिए
मंत्रालय के मुताबिक, इसमें तथ्यात्मक अशुद्धियां होने के साथ उन आवश्यक संदर्भों की भी अनदेखी की गई है, जिनके आधार पर भारत के बढ़ते मेट्रो रेल नेटवर्क का अध्ययन किया जाना चाहिए। लेख में इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया गया है कि भारत के मौजूदा मेट्रो रेल नेटवर्क के तीन-चौथाई से अधिक हिस्से की कल्पना और उसका निर्माण एवं संचालन 10 साल से भी कम समय पहले शुरू किया गया है।
लेख में दावा-अन्य साधनों का उपयोग बना पसंद
द इकोनॉमिस्ट ने 23 दिसंबर 2023 के अपने साल के आखिरी क्रिसमस डबल शीर्षक वाले अंक में प्रकाशित लेख में कहा था कि छोटी दूरी की यात्राएं करने वाले लोग परिवहन के अन्य साधनों का उपयोग करना पसंद करते हैं। इससे संकेत मिलता है कि महंगे परिवहन वाला बुनियादी ढांचा समाज के सभी वर्गों की सेवा नहीं कर पा रहा है।
शहरों के विस्तार की अनदेखी की
मंत्रालय का कहना है कि लेख में इस संदर्भ का नितांत अभाव नजर आता है कि भारतीय शहरों का विस्तार हो रहा है। वैसे भी, देश में एक करोड़ दैनिक यात्रियों का आंकड़ा पार कर चुकी सभी मेट्रो प्रणालियों में अगले एक-दो वर्षों में यह संख्या बढ़कर 1.25 करोड़ होने की आशा है। जैसे-जैसे हमारी मेट्रो प्रणाली विकसित होगी, यह संख्या और बढ़ती जाएगी।
सरकार के तर्क : युवाओं की पसंद, अर्जित कर रहीं लाभ
भारत की अधिकांश मेट्रो प्रणालियां पांच या दस वर्ष से कम पुरानी हैं, और इन्हें अगले 100 वर्षों की जरूरतों के लिहाज से योजनाबद्ध किया गया है। साक्ष्य पहले ही इस बात की गवाही दे रहे हैं कि मेट्रो रेल प्रणाली महिलाओं और शहरी युवा वर्ग के लिए यात्रा का सबसे पसंदीदा साधन है।