{"_id":"68f3657abec3ef98fd004325","slug":"indian-army-jawan-saves-infant-life-in-rajdhani-express-train-by-performing-cpr-news-and-updates-2025-10-18","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"WB: ट्रेन में थम गईं आठ महीने के बच्चे की सांसें, सफर कर रहे जवान ने सीपीआर देकर बचाई जान","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
WB: ट्रेन में थम गईं आठ महीने के बच्चे की सांसें, सफर कर रहे जवान ने सीपीआर देकर बचाई जान
Sat, 18 Oct 2025 03:31 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 18 Oct 2025 03:31 PM IST
सार
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, सिपाही सुनील, जो उत्तर-पूर्व में तैनात सेना के एक फील्ड अस्पताल में कार्यरत हैं, छुट्टी से ड्यूटी पर लौटते समय इस ट्रेन में यात्रा कर रहे थे।
विज्ञापन
भारतीय सेना।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय सेना के एक जवान ने अपनी सूझबूझ और तत्परता से एक आठ महीने के नवजात की जान बचा ली। बताया गया है कि सुपरफास्ट ट्रेन नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान जब शिशु की सांसें थम गईं, तब जवान ने सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रीससिटेशन) देकर उसकी जान बचा ली।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, सिपाही सुनील, जो उत्तर-पूर्व में तैनात सेना के एक फील्ड अस्पताल में कार्यरत हैं, छुट्टी से ड्यूटी पर लौटते समय इस ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। उसी दौरान ट्रेन में एक शिशु को अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई और उसने प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया। बच्चे की इस हालत को देखकर उसकी मां भी अचेत हो गईं। वहीं, उसके परिवार वाले घबरा गए।
विज्ञापन
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, सिपाही सुनील, जो उत्तर-पूर्व में तैनात सेना के एक फील्ड अस्पताल में कार्यरत हैं, छुट्टी से ड्यूटी पर लौटते समय इस ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। उसी दौरान ट्रेन में एक शिशु को अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई और उसने प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया। बच्चे की इस हालत को देखकर उसकी मां भी अचेत हो गईं। वहीं, उसके परिवार वाले घबरा गए।
विज्ञापन
इस स्थिति के बीच सिपाही सुनील ने तुरंत स्थिति को संभाला। उन्होंने देखा कि बच्चे की न तो सांस चल रही थी और न ही धड़कन बची है। उन्होंने तुरंत दो उंगलियों से शिशु के सीने पर दबाव देते हुए और मुंह से मुंह लगाकर सांस देकर दो बार सीपीआर प्रक्रिया दोहराई। कुछ ही क्षणों में बच्चे में हलचल दिखी और उसकी सांसें लौट आईं।
इसके बाद जवान ने ट्रेन के स्टाफ और रेलवे पुलिस के सहयोग से बच्चे को असम के रंगिया स्टेशन पर आगे के इलाज के लिए पहुंचाने की व्यवस्था की। रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सिपाही सुनील की त्वरित प्रतिक्रिया, पेशेवर प्रशिक्षण और कठिन परिस्थिति में शांत बने रहने की क्षमता ने एक अनमोल जीवन को बचाया।
इसके बाद जवान ने ट्रेन के स्टाफ और रेलवे पुलिस के सहयोग से बच्चे को असम के रंगिया स्टेशन पर आगे के इलाज के लिए पहुंचाने की व्यवस्था की। रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सिपाही सुनील की त्वरित प्रतिक्रिया, पेशेवर प्रशिक्षण और कठिन परिस्थिति में शांत बने रहने की क्षमता ने एक अनमोल जीवन को बचाया।