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IAF: क्या वायुसेना के पास हुई जहाजों के स्पेयर पार्ट्स की भारी कमी? तेजस के आने तक 'जुगाड़' से चलेगा काम
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भारतीय वायुसेना
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अमर उजाला।
विस्तार
कतर ने भारत को 12 मिराज-2000-5 लड़ाकू विमानों को बेचने का प्रस्ताव दिया है। इनकी कीमतों को लेकर मोलभाव चल रहा है। कतर 12 मिराज के लिए भारत को लगभग 5,000 करोड़ रुपये का ऑफर दे रहा है। इससे पहले ग्रीस भी ग्रीस भारत को अपने रिटायर हो चुके मिराज फाइटर जेट बेचने की पेशकश कर चुका है। इसके अलावा भारतीय वायु सेना ब्रिटेन की वायुसेना से भी नौ जगुआर खरीदने की योजना बना रही है। रक्षा मामलों के जानकारों कहना है कि भारत के पास पुराने पड़ गए एयरक्राफ्ट्स को उड़ाने के लिए स्पेयर पार्ट्स की जबरदस्त कमी है और जब तक एलसीए तेजस मार्क1ए पूरी संख्या में भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल नहीं हो जाता है, तब तक इस समस्या से जूझते रहना होगा।कतर ने भारत को अपने 12 मिराज-2000-5 लड़ाकू विमानों को बेचने की पेशकश की है। दोनों पक्षों यह चर्चा नई दिल्ली में हुई। भारत और कतर के पास मिराज-2000-5 लड़ाकू विमान हैं, दोनों के विमानों के इंजन एक जैसे हैं। कतर 12 जहाजों के लिए लगभग 5,000 करोड़ रुपये का ऑफर दे रहा है। साथ में, कतर के विमान फ्लाइंग ऑपरेशन के लिए मिसाइलों और अतिरिक्त इंजनों के साथ भारत के सामने पेश किए जा रहे हैं। इससे पहले ग्रीस ने भी 18 मिराज 2000 विमानों को बेचने के लिए भारत से संपर्क किया था। ग्रीस के फ्लीट में राफेल फाइटर जेट आने के बाद उसने इन विमानों को साल 2022 में ही रिटायर कर दिया था। ग्रीस ने 1980 के दशक में फ्रांस से मिराज 2000 विमानों को खरीदा था।
ब्रिटेन जगुआर को 2007 में ही कर चुका है रिटायर
इसके साथ ही, भारत के पास जगुआर विमान भी हैं। भारत यूनाइटेड किंगडम की रॉयल एयर फोर्स से जगुआर के नौ एयरफ्रेम हासिल करने की योजना बना रही है। रॉयल एयर फोर्स 2007 में ही इन विमानों तो रिटायर कर चुकी है। भारत वर्तमान में एकमात्र ऐसा देश है जो 1979 में इसकी शुरुआत के बाद से ही इस विमान को उड़ाता रहा है। एंग्लो-फ्रेंच डिजाइन और निर्मित यह विमान भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक और टोही क्षमता की रीढ़ रहा है।
जगुआर की छह स्क्वाड्रन हैं
भारतीय वायुसेना के सूत्रों का कहना है कि भारत के पास तकरीबन 120 जगुआर विमान हैं। जगुआर की छह स्क्वाड्रन हैं, जिनमें से प्रत्येक में तकरीबन 20 लड़ाकू विमान हैं, जो अंबाला, जामनगर और गोरखपुर में तैनात हैं। भारतीय वायुसेना ने ब्रिटेन से पांच एक सीट वाले जगुआर जीआर-1 और चार डबल सीट वाले जगुआर टी-2 विमानों के एयरफ्रेम का अनुरोध किया है, दोनों ही तरह के विमान अब रॉयल एयर फोर्स उपयोग नहीं करती है। उनका कहना है कि भारत को इन विमानों के संचालन के लिए तकरीबन 150 तरह के स्पेयर पार्ट्स की आवश्यकता है। इससे पहले भारतीय वायुसेना ने फ्रांस से अपने जगुआर बेड़े के लिए 31 इस्तेमाल किए गए एयरफ्रेम, इंजन और विभिन्न स्पेयर पार्ट्स लिए थे। भारतीय वायुसेना अपने बेड़े से 2027-28 से इन जगुआर विमानों को हटाना शुरू कर देगी और 2035 तक अपने जगुआर बेड़े को पूरी तरह से रिटायर कर देगी।
सरकार के पास पैसे की कमी
रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर, वीएम का कहना है कि हमें बड़ी संख्या में स्पेयर पार्टस की जरूरत है। पूरी दुनिया में भारत ही अकेला देश है, जो अभी तक जगुआर को उड़ा रहा है। फ्रांस, ब्रिटेन, ओमान, नाइजीरिया और इक्वाडोर जैसे देश इन्हें अपने बेड़े से हटा चुके हैं। लेकिन भारत अकेला देश है जिसने जगुआर को आधुनिक बनाया, उसमें ASRAAM जैसे मिसाइलें लगाई हैं। वह कहते हैं कि सरकार के पास नए एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए पैसे की कमी है। लेकिन इसके चलते एयरफोर्स उन्हें उड़ाना बंद नहीं कर सकती। वह अपनी जरूरतों के मुताबिक अरेंजमेंट्स कर रही है। दुनियाभर के देश अपनी फ्लीट को उड़ाने लायक बनाए रखने के लिए पुराने जहाज खरीदते हैं।
मिराज-2000 में "जुगाड़" से बढ़ेगा जीवनकाल
वायुसेना सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 31 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, और अगले डेढ़ दशक में इसके अधिकांश स्क्वाड्रन फेज आउट हो जाएंगे। जबकि भारत को 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है। सूत्रों का कहना है कि मिग-21 बाइसन और मिग-29 के स्क्वाड्रन 2025 और 2035 तक चरणबद्ध तरीके से रिटायर हो जाएंगे। 2019 में पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट स्ट्राइक करने वाले फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों मिराज 2000 भी 2035 तक रिटायर कर दिए जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि भारत के पास करीब 50 मिराज-2000 हैं, जबकि कतर के पास 2000-5 हैं, जो एडवांस वर्जन है। वहीं, कतर ने इन लड़ाकू विमानों का ज़्यादा इस्तेमाल नहीं किया है, उनका 30 फीसदी लाइफ अभी बाकी है, यानी लगभग 1,500 घंटे उड़ान भरने के बाद और "जुगाड़" उनके जीवनकाल को और भी बढ़ा सकती है। भारत में मिराज-2000 का रिकॉर्ड अच्छा है, इसका इस्तेमाल कारगिल युद्ध और बाद में पुलवामा के बाद पाकिस्तान के बालाकोट में जैश मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर पर हमले में किया गया था। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान भी अपनी मिराज फ्लीट को अपग्रेड करना चाहता है। ऐसे में अगर भारत को कतर से मिराज-2000-5 चाहिए, तो सौदे में तेजी लानी होगी।
वायुसेना के पास चीन, पाकिस्तान से निपटने की पूरी क्षमता
एचएएल को अगले 10 सालों में दो चरणों में 180 तेजस मार्क-1ए का निर्माण करना है। भारतीय वायुसेना ने एचएएल को 83 तेजस के अलावा 97 अतिरिक्त तेजस मार्क-1ए जेट के निर्माण के लिए अपनी व्यवसायिक बोली जमा करने के लिए कहा था, जिसके बाद यह संख्या 180 हो गई है। वहीं स्वदेशी एलसीए-तेजस मार्क 1ए की डिलीवरी में थोड़ी देरी हो सकती है और सरकार की तरफ से 12 सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों की खरीद पर अभी भी चर्चा चल रही है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायु सेना को अगले 14 से 15 सालों में 390 लड़ाकू जेट की आवश्यकता होगी। भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही 40 तेजस मार्क1 फाइटर जेट हैं, जो वायुसेना की नंबर 45 स्क्वाड्रन 'द फ्लाइंग डैगर्स' और नंबर 18 स्क्वाड्रन 'द फ्लाइंग बुलेट्स' का हिस्सा हैं। वहीं तेजस मार्क-1ए इसका एडवांस वर्जन है।
एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर कहते हैं कि एक तरफ चीन और दूसरी तरफ पाकिस्तान है, खतरा दोनों तरफ से है। हालांकि हमारी वायुसेना के पास उनसे निपटने की पूरी कैपेबिलिटी है। हमारे पास भी 4.5 जनरेशन वाले 36 राफेल एयरक्राफ्ट के दो स्क्वाड्रन हैं। लेकिन सरकार को चाहिए कि नए एयरक्राफ्ट की खरीद के लिए प्रक्रिया को लेकर तेजी से पॉलिटिकल डिसिजन ले। यह पूछने पर कि अगर हमारे पास 126 राफेल होते तो शायद ये दिक्कत न होती, तो इस पर वे कहते हैं कि 36 राफेल आने में ही इतना वक्त लग गया, अगर बाकी राफेल लेते तो उसमें तो और भी ज्यादा वक्त लगता। वह कहते हैं कि एलसीए-तेजस मार्क 1ए के आने से ये कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी। लेकिन उसके आने में अभी समय थोड़ा समय लग रहा है, तब तक वायुसेना कुछ न कुछ अरेंजमेंट जरूर कर लेगी।