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चीन की अकड़ ढीली नहीं पड़ी तो दक्षिण चीन सागर में उतरेगा भारत

Sat, 11 Jul 2020 01:57 AM IST
अवधेश कुमार हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अवधेश कुमार Updated Sat, 11 Jul 2020 01:57 AM IST
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India will land in the South China Sea if  China does not loosen
South China Sea
वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अगर चीन ने हरकतें बंद नहीं की, तो भारत दक्षिण चीन सागर में मुखर भूमिका निभाएगा। इस पर अपनी भूमिका तय करने के लिए भारत एलएसी पर चीन के भावी रुख का इंतजार कर रहा है। वहीं, अमेरिका चाहता है कि इस मुद्दे पर भारत खुलकर उसके साथ आए। चीन को घेरने के लिए अमेरिका की कोशिश भारत, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों को एक मंच पर लाने की है।
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उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक एलएसी पर तनाव के बीच अमेरिका चाहता था कि भारत दक्षिण सागर मामले में उसकी रणनीति का हिस्सा बने। भारत सहित कुछ देश संयुक्त रूप से इस इलाके में गश्त करे। इस विवाद पर भारत अब तक परोक्ष भूमिका निभाता रहा है। उसने सीधे-सीधे कभी चीन का नाम लेकर कोई बयान नहीं दिया है। हालांकि बदली परिस्थितियों में इस बात पर मंथन हो रहा है कि भारत को इस मामले में मुखर भूमिका निभानी चाहिए या नहीं। यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि चीन एलएसी पर आक्रामक भूमिका जारी रखता है या नरमी लाता है।
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दरअसल, दक्षिण चीन सागर मामले में अब तक अमेरिका की भूमिका मुखर रही है। भारत इस मामले में परोक्ष रूप से चीन की मुखालफत करता रहा है। इस इलाके में चीनी दबदबे को अमेरिकी नौ सेना ही उसे चुनौती देती रही है। केवल ब्रिटेन ने एक बार अमेरिका के साथ इस इलाके में संयुक्त रूप से पेट्रोलिंग की थी। अब अमेरिका चाहता है कि भारत खासतौर पर पेट्रोलिंग प्रक्रिया में उसके साथ आगे बढ़े।
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चीन ने ऐसे ही पीछे नहीं हटाई सेना

एलएसी पर चीन के रुख में अचानक आई नरमी को अब दक्षिण चीन सागर मामले से जोड़ कर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में भारत की मुखर भूमिका निभाने की मजबूत संभावना के संदेश के बाद ही चीन की अकड़ ढीली हुई। चीन को पता है कि इस मुद्दे पर भारत की मुखर भूमिका से उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी अमेरिका की स्थिति मजबूत होगी। फिर भारत के साथ आने के बाद ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ खड़े हो सकते हैं। यही कारण है कि एलएसी पर आक्त्रसमक भूमिका निभाने वाले चीन ने अचानक तनाव कम करने के लिए अपने सैनिकों को पीछे हटाने की भारत की शर्त मान ली।

विकल्प खुला रखेगा भारत

एलएसी पर हालांकि शांति बहाली के संकेत हैं, मगर भारत ने दक्षिण चीन सागर मामले में अपने विकल्प खुले रखने के संकेत दिए हैं। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर भविष्य में भारत की रणनीति चीन के भावी रुख पर निर्भर करेगा। अगर चीन नहीं माना तो निश्चित रूप से भारत इस संबंध में अमेरिका के प्रस्ताव पर नए सिरे से विचार करेगा।
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