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Trade Agreements: ब्रिटेन और इस्राइल के साथ व्यापार समझौते लागू; क्या बदलेंगे नियम, किसे मिलेगा बड़ा फायदा?

Sun, 05 Jul 2026 03:54 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी/ब्यूरो, नई दिल्ली।
एजेंसी/ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 05 Jul 2026 03:54 AM IST
सार

ब्रिटेन औ इस्राइल के साथ नए व्यापार व निवेश समझौते लागू हो रहे हैं,  जिनसे नियम और ज्यादा सख्त और पारदर्शी हो जाएंगे। अब रियायती शुल्क का लाभ केवल उन्हीं वस्तुओं को मिलेगा जो वास्तव में संबंधित देशों में निर्मित हों, इसके लिए मूल देश का प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। इन बदलावों से निर्यात बढ़ने और आर्थिक साझेदारियों के मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है। पढ़िए रिपोर्ट-

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)

विस्तार

केंद्र सरकार ने भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के तहत वस्तुओं के मूल देश (रूल्स ऑफ ओरिजिन) तय करने के नियम अधिसूचित कर दिए हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार ये नियम 15 जुलाई 2026 से लागू होंगे। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापार समझौते का लाभ केवल भारत और ब्रिटेन में बने उत्पादों को ही मिले।
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सरकार ने कहा कि व्यापार समझौते के तहत रियायती सीमा शुल्क का लाभ लेने के लिए निर्यातकों को मूल देश का प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन) प्रस्तुत करना होगा। यह प्रमाणपत्र दोनों देशों की अधिकृत संस्थाएं जारी करेंगी। इससे किसी तीसरे देश का सामान भारत या ब्रिटेन के रास्ते गलत तरीके से शुल्क छूट का लाभ नहीं उठा सकेगा। सीईटीए के तहत भारत के 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। इससे कपड़ा, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, खेल सामग्री, खिलौने, रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों के साथ इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पुर्जे और जैविक रसायन जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। 
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भारत-ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25.12 अरब डॉलर

आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 8.62 प्रतिशत बढ़कर 25.12 अरब डॉलर पहुंच गया। इसमें भारत का निर्यात 13.44 अरब डॉलर और आयात 11.68 अरब डॉलर रहा। इस दौरान भारत को 1.76 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष भी मिला। विशेषज्ञों के अनुसार नए नियम व्यापार समझौते को पारदर्शी और प्रभावी बनाएंगे। उन्होंने कंपनियों को सलाह दी है कि वे अपने कच्चे माल के स्रोत, उत्पादन प्रक्रिया, मूल्य संवर्धन और दस्तावेजों की समीक्षा करें, ताकि नए नियमों का पालन करते हुए व्यापार समझौते का पूरा लाभ उठाया जा सके।
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भारत-फ्रांस की आर्थिक साझेदारी को मिलेगी और अधिक मजबूती

भारत और फ्रांस के बीच व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी सहयोग बढ़ेगा और दोनों देश 2027 में अगली वार्ता आयोजित करेंगे। यह बात शुक्रवार को दोनों देशों के बीच फ्रांस के ऐक्स-एन-प्रोवेंस शहर में हुई आर्थिक और वित्तीय बातचीत में सामने आई। इस बात की सहअध्यक्षता भारत की केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण और फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त, उद्योग, ऊर्जा और डिजिटल संप्रभुता मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने की। भारतीय वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यह संवाद भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के तहत आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। इस दौरान दोनों देशों ने अहम खनिजों, वित्त, व्यापार और बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसमें कहा गया कि जैसे-जैसे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध गहरे हो रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण, द्विपक्षीय सहयोग पर उच्च-स्तरीय बातचीत फिर से शुरू करना जरूरी हो गया है।

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भारत-इस्राइल निवेश समझौता लागू, आर्थिक संबंध होंगे मजबूत

निवेश के लिए दोनों देशों में सुरक्षित माहौल बनेगा
भारत और इस्राइल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता (बीआईए) शनिवार से लागू हो गया। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को इस आशय की जानकारी देते हुए बताया कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच निवेश के लिए सुरक्षित व भरोसेमंद माहौल बनेगा और आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। दोनों देशों ने पिछले साल 8 सितंबर को समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।


वित्त मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच निवेश समझौता एक तरफ जहां निवेश और निवेशकों को पूरी सुरक्षा देता है, वहीं उनके हितों से जुड़े फैसलों के लिए सरकार को जरूरी नीतिगत छूट भी प्रदान करता है। 

निवेश बढ़ने की उम्मीद
अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत को इस्राइल से 371.35 मिलियन डॉलर (करीब 35.35 अरब रुपये) का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला है। इस समझौते को लागू करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देश एक मुक्त व्यापार समझौते पर भी बातचीत कर रहे हैं। लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण व्यापार समझौते पर बातचीत धीमी चल रही है।
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