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भारत ने सुखोई लड़ाकू विमान से किया एंटी-रेडिएशन मिसाइल 'रुद्रम' का सफल परीक्षण
Fri, 09 Oct 2020 02:17 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Fri, 09 Oct 2020 02:17 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : ANI
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। डीआरडीओ ने शुक्रवार को पूर्वी तट से सुखोई-30 लड़ाकू विमान से एंटी-रेडिएशन मिसाइल 'रुद्रम' का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस मिसाइल को डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है।
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डीआरडीओ ने कहा, 'रुद्रम भारतीय वायुसेना के लिए बनाई गई देश की पहली स्वदेशी एंटी रेडिएशन मिसाइल है जिसे डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है। इस मिसाइल को लॉन्च प्लेटफॉर्म के रूप में सुखोई एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में एकीकृत किया गया है, इसमें लॉन्च स्थितियों के आधार पर अलग-अलग रेंज की क्षमता है।'
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It has INS-GPS navigation with Passive Homing Head for the final attack. 'Rudram' hit the radiation target with pinpoint accuracy. Passive Homing Head can detect, classify and engage targets over a wide band of frequencies as programmed: DRDO
— ANI (@ANI) October 9, 2020
डीआरडीओ ने आगे कहा, 'इसमें अंतिम हमले के लिए पैसिव होमिंग हेड के साथ आईएनएस-जीपीएस नेविगेशन है। 'रुद्रम' ने रेडिएशन लक्ष्य को पिनपॉइंट सटीकता से मारा। पैसिव होमिंग हेड एक विस्तृत बैंड पर लक्ष्य का पता लगाने, वर्गीकृत करने और लक्ष्य को इंगेज करने (उलझाने) में सक्षम है।'
भारत में बनाई गई ये अपने आप की पहली मिसाइल है जिसे किसी भी ऊंचाई से दागा जा सकता है। मिसाइल किसी भी तरह के सिग्नल और रेडिएशन को पकड़ने में सक्षम है। साथ ही अपनी रडार में लाकर ये मिसाइल नष्ट कर सकती है। फिलहाल मिसाइल डेवलेपमेंट ट्रायल में जारी है।
ट्रायल पूरा होने के बाद जल्द ही इन्हें सुखोई और स्वदेशी विमान तेजस में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। बता दें कि सोमवार को डीआरडीओ ने सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो (स्मार्ट) का सफल परीक्षण किया था। डीआरडीओ ने इसका ओडिशा के तटीय इलाके में परीक्षण किया था।