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भारत में आज से खुलेगा मैडम तुसाद का पहला म्यूजियम, गांधी से लेकर कलाम तक 50 हस्तियों के पुतले

Fri, 01 Dec 2017 06:49 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
टीम डिजिटल/अमर उजाला Updated Fri, 01 Dec 2017 06:49 AM IST
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India's first  Madame Tussauds to open in Delhi today

दुनियाभर में सजीव दिखने वाला पुतले बनाने वाली मैडम तुसाद का भारत में पहला संग्रहालय शुक्रवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस में आम लोगों के लिए खुल जाएगा। मैडम तुसाद के इस संग्रहालय में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय 50 हस्तियों के पुतले रखे गए हैं।

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इन पुतलों की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है। बृहस्पतिवार को संग्रहालय का मीडिया प्रीव्यू कराया। संग्रहालय को पुरानी दिल्ली का टच दिया गया है। इसका एहसास संग्रहालय में प्रवेश करते ही लग जाता है।
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संग्रहालय में महात्मा गांधी के साथ अब्दुल कलाम, भगत सिंह, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जगह मिली है।

खेल जगत से सचिन तेंदुलकर, कपिल देव, मिल्खा सिंह, मैरीकॉम के अलावा फुटबाल में रोनाल्डो, मेसी, डेविड बेकहम और धावक उसेन बोल्ट को जगह दी गई है। बॉलीवुड व हॉलीवुड में अमिताभ बच्चन, राजकपूर, रणवीर कपूर, कैटरीना, सलमान खान, अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित, सोनू निगम, जेनिफर लोपेज, जस्टिन बीबर, टॉम क्रूज, टाइटेनिक फेम लिओनार्डो डीकार्पिओ, माइकल जैक्सन समेत अन्य को जगह मिली है। 
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मैडम तुसाद के महाप्रबंधक अंशुल जैन ने बताया कि हम तीन वर्षों से इसे खोलने को लेकर तैयारी कर रहे थे। अब यह जनता के लिए तैयार है। यह हमारे लिए भावुक पल है। यहां 50 हस्तियों को जगह दी गई है।

आगे यह संख्या और बढ़ेगी। एक दिन में 500 लोग इसे देख पाएंगे। यह सुबह 10 से शाम साढ़े सात बजे तक खुला रहेगा। बड़े लोगों को 960 रुपये तो 18 साल के कम उम्र के को 760 रुपये देने होंगे। एक बार प्रवेश करने पर अधिकतम दो घंटे तक अंदर रहा जा सकता है। पुतले छूने की आजादी मिलेगी। उसके साथ सेल्फी भी ले सकते हैं। 

नंबर वन एजेंसी को सुरक्षा का जिम्मा

India's first  Madame Tussauds to open in Delhi today
मैडम तुसाद संग्रहालय के मुताबिक, एक पुतला बनाने में चार से सात माह का समय लगता है। 20 लोगों की टीम इस काम को अंजाम देती है। एक पुतले की कीमत 1.5 करोड़ से लेकर 2.5 करोड़ रुपये होती है, यानी औसतन कीमत दो करोड़ रुपये आती है। इसकी सुरक्षा के लिए दुनिया की नंबर वन सिक्योरिटी एजेंसी को जिम्मा दिया गया है। 

हस्तियों के डिजाइनर ही तैयार करते है पुतलों के कपड़े 
आपको जानकर हैरानी होगी की असल जीवन में इन हस्तियों का ड्रेस तैयार करने वाले फैशन डिजाइनर ही इन पुतलों के लिए भी कपड़े डिजाइन तैयार करते हैं। कई बार कुछ हस्तियां खुद ही अपने कपड़े दान करते हैं, लेकिन ज्यादातर के कपड़े मैडम तुसाद प्रबंधन उनके डिजाइनर से संपर्क कर बनवाते हैं। दिल्ली में लगा अमिताभ बच्चन के पुतले का ड्रेस खुद बिग बी ने दान किया है।

जानें कैसे तैयार होते हैं पुतले 

India's first  Madame Tussauds to open in Delhi today
आठ चरण में तैयार होते हैं पुतले 

चार से सात माह में औसतन दो करोड़ रुपये में मैडम तुसाद संग्रहालय के लायक पुतला कुल आठ चरण में तैयार होते हैं। दिल्ली के पुतले को तैयार में ग्लोबल कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकारों की टीम भी शामिल हुई है। कुल 20 सदस्यों की टीम एक पुतले को तैयार करती है। अब तीन स्थानीय टीम दिल्ली के संग्रहालय में बने पुतलों का ख्याल रखेगी। एक पुतले को अंतिम रूप देने में आठ चरणों से गुजरना पड़ता है। 

पहला-
दो घंटे की सिटिंग, यह पहली प्रक्रिया है। इसमें हस्ती के साथ कलाकारों की एक टीम कम से कम दो घंटे गुजारती है। इस दौरान उसका 250 तरह के अलग-अलग माप व 150 फोटोग्राफ ली जाती है। इसमें चेहरा, कमर, हाथ व पैर भी शामिल हैं। आंखों व बाल का कलर भी मैच कराया जाता है। 

दूसरा-
स्कल्पटिंग (कलाकृति), शरीर के हिस्सों का माप लेने के बाद उस आकार की कलाकृति तैयार की जाती है। यह मेटल व तार के जरिए तैयार होता है। उसके बाद उस पर चिकनी मिट्टी से शरीर के माप के मुताबिक उसे तैयार किया जाता है। इसमें कुल 150 किलो चिकनी मिट्टी लगती है। 

तीसरा-
मोल्डिंग, चिकनी मिट्टी से तैयार कलाकृति को फाइबर ग्लास के सांचे में ढालकर आकार दिया जाता है। मोल्डिंग में कुल 170 घंटे का समय लगता है। फिर चिकनी मिट्टी से बने सिर के 13 टड़ों के प्लास्टर का ढांचा बनाया जाता है। इसे खास बीजवैक्स और जापान वैक्स के मिश्रण को 74 डिग्री सेंटीग्रेड तक गर्म किया जाता है। करीब साढ़े चार किलो मोट से सिर और हाथों को ढालने के लिए दो किलो मोम लगता है। एक मूर्ति की कुल वजन 25 किलो होता है। 

चौथा-
बाल लगाना, उसके बाद शेप तैयार करने के बाद सिर में बाल लगाने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके लिए वास्तविक बाल का इस्तेमाल किया जाता है। उसका कलर बारीकी से मिलाकर फिर उसे लगाया जाता है। 

पांचवां-
रंग करना, इसमें हस्तियों की कलाकृति को रंगने का काम शुरू होता है। इसमें शरीर के स्किन से लेकर आंख, भौ, एक-एक बाल व दाढ़ी के रंग तक का ध्यान रखा जाता है। 

छठा-
आंख व दांत बनाना, पुतला बनाने के छठे चरण में आंख व दांत तैयार किया जाता है। हस्तियों के वास्तविक आंख व दांत की ही तरह आंख का शेप, कलर और दांत का शेप तैयार किया जाता है। 

सातवां-
इस चरण में कलाकृति को पोशाक पहनाई जाती है। यह पोशाक या तो खुद हस्तियां डोनेट करती है या फिर उनके डिजाइन से तैयार कराया जाता है। 

आठवां-
आठवें चरण में फिनशिंग की जाती है। पूरे पुतले को अंतिम रूप दिया जाता है। कहीं कोई कमी रह जाती है तो उसे पूरा किया जाता है। 
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