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MEA On UK Report: भारत ने ब्रिटेन की संसदीय समिति की रिपोर्ट को किया खारिज, आरोपों को बताया बेबुनियाद

Fri, 01 Aug 2025 09:34 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 01 Aug 2025 09:34 PM IST
सार

India On Transnational Repression: भारत ने ब्रिटिश संसदीय रिपोर्ट में लगाए गए 'अंतरराष्ट्रीय दमन' के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे दुर्भावनापूर्ण, तथ्यहीन और पूर्वाग्रही करार दिया है। भारत का मानना है कि इस तरह की रिपोर्टें अविश्वसनीय स्रोतों पर आधारित होकर भारत के खिलाफ राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देती हैं।

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India rejects British parliamentary report naming India among countries engaging in transnational repression
रणधीर जायसवाल, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता - फोटो : ANI

विस्तार

भारत सरकार ने शुक्रवार को ब्रिटेन की एक संसदीय रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया गया है जो कथित रूप से ब्रिटेन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमन में शामिल हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस रिपोर्ट को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इसमें लगाए गए आरोप असत्यापित और संदिग्ध स्रोतों पर आधारित हैं, जिनका संबंध ऐसे व्यक्तियों और संगठनों से है जो भारत-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
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क्या है पूरा मामला?
ब्रिटिश संसद की संयुक्त मानवाधिकार समिति ने 30 जुलाई को एक रिपोर्ट जारी की जिसका शीर्षक- 'ब्रिटेन में अंतरराष्ट्रीय दमन' है। इस रिपोर्ट में भारत के अलावा चीन, पाकिस्तान, रूस, तुर्की, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इरिट्रिया, बहरीन, रवांडा और मिस्र जैसे देशों का नाम शामिल है, जिन्हें ब्रिटेन में ट्रांसनेशनल रेप्रेशन यानी सीमाओं से बाहर जाकर अपने विरोधियों को डराने-धमकाने या उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया है।
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भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह रिपोर्ट अविश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। इन स्रोतों में ऐसे संगठन और व्यक्ति शामिल हैं जो भारत में प्रतिबंधित हैं, जैसे कि सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) - एक खालिस्तान समर्थक संगठन, जिसे भारत ने गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित किया है। इन स्रोतों की पृष्ठभूमि भारत-विरोधी रही है और उनका उद्देश्य भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'इन दावों की विश्वसनीयता संदिग्ध स्रोतों पर निर्भर है, जिनकी पृष्ठभूमि भारत के खिलाफ पूर्वाग्रह से भरी हुई है। इस प्रकार की रिपोर्ट खुद अपनी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ी करती है।'


रिपोर्ट में भारत को लेकर क्या कहा गया?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रिटेन में रहने वाले कुछ भारतीय मूल के कार्यकर्ताओं, खासकर सिखों, को भारत सरकार की तरफ से प्रताड़ित किया जा रहा है या उन पर निगरानी रखी जा रही है। इसमें कुछ उदाहरण सिख फॉर जस्टिस और ब्रिटेन में स्थित अन्य सिख संगठनों के दिए गए हैं।

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क्या है भारत का पक्ष?
भारत का मानना है कि ब्रिटेन में रहने वाले कुछ संगठन और व्यक्ति खालिस्तान के नाम पर अलगाववादी एजेंडा चला रहे हैं। ये लोग न केवल भारत की संप्रभुता को चुनौती देते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झूठे प्रचार के माध्यम से भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश करते हैं। ऐसे समूहों को रिपोर्ट के लिए सूत्र मानना स्वयं रिपोर्ट की निष्पक्षता पर संदेह पैदा करता है।
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