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ओडिशा में इंडिया गठबंधन का बंद: राज्य में सड़कें जाम, थमे पहिये; जानें किन प्रमुख मांगों पर अड़ा है विपक्ष
Thu, 08 Oct 2026 11:44 AM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, भुवनेश्वर, ओडिशा
पीटीआई, भुवनेश्वर, ओडिशा
Published by: अमन मौर्या
Updated Thu, 08 Oct 2026 11:44 AM IST
सार
नए खनन कानून, किताबों में गलती और एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में ओडिशा में इंडिया गठबंधन के 12 घंटे के बंद से आम जनजीवन प्रभावित रहा। प्रमुख मार्ग जाम होने से यातायात प्रभावित रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।
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विरोध प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
ओडिशा के कई जिलों में गुरुवार को आम जनजीवन प्रभावित रहा। विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की पार्टियों के समर्थकों ने स्कूली किताबों में गलतियों, माइनिंग से जुड़े नए कानून और एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के विरोध में 12 घंटे के बंद के दौरान विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान सड़कें भी जाम रहीं। इससे यातायात प्रभावित रहा। सुबह के समय बाजार में दुकानें, पेट्रोल पंप, व्यापारिक प्रतिष्ठान और कई शिक्षण संस्थान बंद रहे। ऑटो-रिक्शा और बसों जैसे सार्वजनिक वाहन भी सड़कों से नदारद रहे। पार्टी के बैनर और झंडे लिए प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान भुवनेश्वर, कटक, बरगढ़, भद्रक, बालासोर, रायगढ़, केंद्रपाड़ा, बोलानगीर, बेरहामपुर और संबलपुर में सड़क और नेशनल हाईवे जाम रहा।
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प्रदर्शनकारियों ने पूरे राज्य में प्रमुख चौराहों पर धरना-प्रदर्शन किया, जगह-जगह टायर भी जलाए गए। कई जिलों में बसों, ट्रकों, टैक्सियों और ऑटो रिक्शा को रोका गया। यातायात प्रभावित होने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित होने से कई लोग बस स्टॉप पर इंतजार करते नजर आए। कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि एंबुलेंस, अस्पताल, अग्निशमन सेवाएं, मेडिकल शॉप और दूध की आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया है।
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पुलिस ने क्या कहा?
विपक्षी पार्टियों के ओडिशा बंद के आह्वान पर भुवनेश्वर के डीसीपी सरवण विवेक एम ने कहा कि हम पूरी तरह तैयार हैं और हमने जरूरी इंतजाम किए हैं। 150 से ज्यादा अधिकारी और फोर्स (लगभग 18 प्लाटून और कुछ रिजर्व फोर्स) तैनात की गई है। जहां भी वे रास्ता रोक रहे हैं, फोर्स तुरंत कार्रवाई कर रही है और हम रास्ता खाली करवा रहे हैं। स्थिति काफी हद तक शांतिपूर्ण है; किसी हिंसा की खबर नहीं है। अगर कोई हिंसा होती है, तो आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष की क्या है मांग?
कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), सीपीआई (एमएल) लिबरेशन, फॉरवर्ड ब्लॉक, एनसीपी (शरद पवार), समाजवादी पार्टी, राजद और जेएमएम समेत इंडिया गठबंधन के दल सुबह छह बजे से 12 घंटे का ओडिशा बंद कर रहे हैं। उनकी मांगों में नए खनन कानून को वापस लेना, स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों को लेकर राज्य मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा के साथ-साथ मतदाता सूची के एसआईआर में कथित अनियमितताओं का विरोध शामिल है।
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कांग्रेस ने क्या कहा?
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश राउत्रे ने भुवनेश्वर में बताया कि उनकी मांग है कि एमएमडीआर (संशोधन) अधिनियम को पूरी तरह वापस लिया जाए। उन्होंने वोट चोरी को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और स्कूली छात्रों को गलत जानकारी वाली किताब वितरित किए जाने के मामले में राज्य मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की भी मांग की। मामले पर जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रदेशभर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किया गया है कि बंद के दौरान विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से हों। भुवनेश्वर-कटक पुलिस आयुक्त एस. देव दत्ता सिंह ने बताया कि विभिन्न पक्षों के साथ चर्चा की गई है, जिससे कि प्रदर्शनकारी अपना प्रदर्शन संवैधानिक अधिकारों के दायरे में रहकर करें।
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प्रदर्शनकारियों ने पूरे राज्य में प्रमुख चौराहों पर धरना-प्रदर्शन किया, जगह-जगह टायर भी जलाए गए। कई जिलों में बसों, ट्रकों, टैक्सियों और ऑटो रिक्शा को रोका गया। यातायात प्रभावित होने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित होने से कई लोग बस स्टॉप पर इंतजार करते नजर आए। कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि एंबुलेंस, अस्पताल, अग्निशमन सेवाएं, मेडिकल शॉप और दूध की आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया है।
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पुलिस ने क्या कहा?
विपक्षी पार्टियों के ओडिशा बंद के आह्वान पर भुवनेश्वर के डीसीपी सरवण विवेक एम ने कहा कि हम पूरी तरह तैयार हैं और हमने जरूरी इंतजाम किए हैं। 150 से ज्यादा अधिकारी और फोर्स (लगभग 18 प्लाटून और कुछ रिजर्व फोर्स) तैनात की गई है। जहां भी वे रास्ता रोक रहे हैं, फोर्स तुरंत कार्रवाई कर रही है और हम रास्ता खाली करवा रहे हैं। स्थिति काफी हद तक शांतिपूर्ण है; किसी हिंसा की खबर नहीं है। अगर कोई हिंसा होती है, तो आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
#WATCH | Bhubaneswar, Odisha | On Opposition parties staging an Odisha bandh, DCP Bhubaneswar Saravana Vivek M says, "We are prepared and have arrangements in place. More than 150 officers and enough force, around 18 platoons and a few forces in Reserve, have been arranged. Wherever they are blocking, the force is immediately responding, and we are clearing the road. It is largely peaceful; no violence has been reported. If there is any violence, criminal cases will be registered, and appropriate action will be taken against them..."
— ANI (@ANI) October 8, 2026
विपक्ष की क्या है मांग?
कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), सीपीआई (एमएल) लिबरेशन, फॉरवर्ड ब्लॉक, एनसीपी (शरद पवार), समाजवादी पार्टी, राजद और जेएमएम समेत इंडिया गठबंधन के दल सुबह छह बजे से 12 घंटे का ओडिशा बंद कर रहे हैं। उनकी मांगों में नए खनन कानून को वापस लेना, स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों को लेकर राज्य मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा के साथ-साथ मतदाता सूची के एसआईआर में कथित अनियमितताओं का विरोध शामिल है।
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कांग्रेस ने क्या कहा?
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश राउत्रे ने भुवनेश्वर में बताया कि उनकी मांग है कि एमएमडीआर (संशोधन) अधिनियम को पूरी तरह वापस लिया जाए। उन्होंने वोट चोरी को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और स्कूली छात्रों को गलत जानकारी वाली किताब वितरित किए जाने के मामले में राज्य मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की भी मांग की। मामले पर जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रदेशभर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किया गया है कि बंद के दौरान विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से हों। भुवनेश्वर-कटक पुलिस आयुक्त एस. देव दत्ता सिंह ने बताया कि विभिन्न पक्षों के साथ चर्चा की गई है, जिससे कि प्रदर्शनकारी अपना प्रदर्शन संवैधानिक अधिकारों के दायरे में रहकर करें।