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Independence Day Special: मिलिए उन महिलाओं से जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में लिया था बढ़ चढ़कर भाग

Sun, 12 Aug 2018 03:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 12 Aug 2018 03:09 PM IST
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Independence Day Special: Women freedom fighters of India

हमारा देश 15 अगस्त, साल 1947 को आजाद हुआ था। आजादी के बाद से ही लोग हर साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हैं। लेकिन उनमें ज्यादातर पुरुष ही होते हैं। जैसे भगत सिंह, महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक आदि। महिला स्वतंत्रता सेनानियों का नाम बहुत कम ही लिया जाता है। जबकि उन्होंने भी देश को आजाद कराने के लिए पुरुषों के बराबर योगदान दिया था। चलिए मिलते हैं दुनिया के लिए मिसाल बनी उन महिलाओं से-

अम्मू स्वामीनाथन

Independence Day Special: Women freedom fighters of India

अम्मू का जन्म केरल के पालाघाट जिले के अनक्कारा में हुआ था। उन्होंने 1917 में मद्रास  में  एनि बेसेंट सहित कई महिलाओं के साथ मिलकर एक वुमन इंडिया एसोसिएशन का निर्माण किया था। वह 1946 में मद्रास कंस्टीट्यएंसी की हिस्सा भी थीं। जब 24 नवंबर 1949 में  बी आर अंबेडकर संविधान के बारे में अपनी बात रख रहे थे तब आत्मविश्वास से लबरेज अम्मू ने कहा था- भारत के बारे में दुनिया वालों का कहना है कि भारत में महिलाओं को बराबरी का अधिकार नहीं दिया गया है लेकिन अब हम कह सकते हैं कि भारतीयों ने अपना संविधान खुद बनाया है और दूसरे देशों की तरह अपने देश में भी महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया है। अम्मू 1952 में लोक सभा के लिए चुनी गईं थी जबकि 1954 में राज्यसभा की सांसद बनी थीं।

दक्क्षायानी वेल्याधन

Independence Day Special: Women freedom fighters of India

वेल्याधन का जन्म 1912 में कोचीन के बोलगट्टी में हुआ था। वह पुलाया समुदाय से आती थीं, वह अपने समुदाय की पहली महिला थीं जो पढ़ी लिखी थीं और आधुनिक कपड़े पहना करती थीं। 1945 में  दक्क्षयानी कोचीन लेजिसलेटिव काउंसिल के लिए नामित की गईं। वह पहली और अकेली दलित महिला थीं जो 1946 में कंस्टीट्यूट एसेंबली के लिए चयन की गईं। संविधान के निर्माण के दौरान दक्क्षयानी ने दलितों से जुड़ी कई समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया था। जिसके बाद संविधान में दलितों के लिए विशेष स्थान दिया गया था।

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बेगम ऐजाज रसूल

Independence Day Special: Women freedom fighters of India

ऐजाज मालेरकोट्ला के अमीर घर में पैदा हुईं थीं और उनकी शादी नवाब ऐजाज रसूल से हुई थी। 1935 में ऐजाज दंपत्ति ने मुस्लिम लीग ज्वाइन किया था लेकिन देश के आजाद होने के बाद 1950 में दोनों ने ही कांग्रेस को ज्वाइन कर लिया। देश की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाली ऐजाज ने संविधान निर्माण के दौरान कई मुद्दों पर अपनी बात अंबेडकर को बताई थी जिसे संविधान में शामिल भी किया गया। 1969-71 में वह सोशल वेलफेयर और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री भी रहीं। सन 2000 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।

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दुर्गा बाई देशमुख

Independence Day Special: Women freedom fighters of India

दुर्गा बाई का जन्म 1909 में राजमंड्री में हुआ था। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने नॉन को-ऑपरेशन मूवमेंट में भाग लिया। साथ ही उन्होंने 1930 में बापू के नमक सत्याग्रह आंदोलन में भी भाग लिया था। 1936 में उन्होंने आंध्र महिला सभा का निर्माण किया। उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में संविधान में अहम बातें जुड़वाई। वह शिक्षा और महिला से जुड़ी कई संस्थाओं से जुड़ीं और उसकी अध्यक्षता भी की। उन्हें 1975 में पद्म विभूषण से भी नवाजा गया।

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