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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, न्यायिक संस्थानों की गरिमा पर गंभीर असर डालते हैं असंगत फैसले

Thu, 25 Aug 2022 09:59 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 25 Aug 2022 09:59 PM IST
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Incoherent judgements have serious impact on dignity of judicial institutions: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि असंगत निर्णय न्यायिक संस्थानों की गरिमा पर गंभीर प्रभाव डालते हैं और फैसला लिखते समय अदालतों को सुझाए गए दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि निर्णयों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से विकलांग लोगों के लिए सभी न्यायिक संस्थानों को निर्णयों और आदेशों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।  

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न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ, जिसने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश को इस आधार पर रद्द कर दिया कि यह समझ से बाहर है, उसने कहा कि न्यायिक लेखन का उद्देश्य जटिल भाषा के लिबास के पीछे पाठक को भ्रमित करना नहीं होना चाहिए। पीठ ने एक कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से उत्पन्न मामले में भारतीय स्टेट बैंक और अन्य द्वारा दायर अपील पर 16 अगस्त को फैसला सुनाया।  
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शीर्ष अदालत ने कहा कि हालांकि इसने कुछ व्यापक दिशानिर्देश निर्धारित किए हैं, व्यक्तिगत न्यायाधीशों के पास निर्णय लिखने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं और उनकी अभिव्यक्ति की शैली में भिन्नता जारी रह सकती है। न्यायाधीश की अभिव्यक्ति मन के अंतराल का खुलासा है। हालांकि न्यायाधीशों की निर्णय लिखने की अपनी शैली हो सकती है, उन्हें इसमें स्पष्टता सुनिश्चित करनी चाहिए।
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फैसलों का फॉर्मूला...आईआरएसी
सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय लिखने के लिए इश्यू, रूल एप्लीकेशन और कंक्लूजन (आईआरएसी) का फॉर्मूला सामने रखा। कहा, यह जाना-माना फॉर्मूला जजों को निर्णय लिखने में सहूलियत देगा।

  • इश्यू का अर्थ है कि अदालत कानून के किस प्रश्न पर विचार कर रही है, यह एक से ज्यादा हो सकते हैं।
  • रूल के मायने हैं कि मामले पर वकील क्या तर्क रखते हैं और कौन से कानून व सिद्धांत पेश करते हैं।
  • एप्लीकेशन में अदालत के तर्कपूर्ण विचार के बाद निर्णय लेने की प्रक्रिया दर्ज होती है।
  • कंक्लूजन में पूरे प्रकरण के सार सहित निष्कर्ष दर्ज होता है, इसी में निर्णय लिखा जाता है।

वाटर मार्क पर भी टोका
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजों के दिए निर्णय समाज के हर वर्ग, खासतौर पर दिव्यांग जनों की पहुंच में भी होने चाहिए। सभी न्यायिक संस्थाएं यह सुनिश्चित करें कि उनके यहां से जारी हो रहे निर्णयों में वाटर मार्क गलत जगहों पर न लगे हों। इससे दृष्टिहीन नागरिकों को स्क्रीन रीडर का उपयोग कर उन्हें पढ़ना असंभव हो जाता है।

  • स्कैन करके भी अपलोड न करें : स्कैन कर अपलोड किए जा रहे निर्णयों पर कहा कि प्रिंटेड कागज को स्कैन कर अपलोड नहीं करना चाहिए। इसमें काफी समय लगता है और कई बार ये काम के भी नहीं रहते। जो निर्णय अपलोड किए जाएं, उन पर डिजिटल हस्ताक्षर भी होने चाहिए।

तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत अर्जी पर 30 को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका पर 30 अगस्त को सुनवाई करेगा। सीतलवाड़ को 2002 गोधरा दंगे के साक्ष्यों में छेड़छाड़ कर मासूम लोगों को फंसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जस्टिस यूयू ललित की पीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को गुजरात की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, सीतलवाड़ की याचिका पर जवाब तैयार है, उसमें कुछ सुधार करने की जरूरत है। हम हर हाल में शनिवार से पहले जवाब दाखिल कर दिया जाएगा। इस पर पीठ ने जवाब दाखिल करने के लिए 27 अगस्त तक का वक्त दिया और सुनवाई की अगली तारीख 30 अगस्त तय कर दी।  

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