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लॉकडाउन में औरंगाबाद के शख्स ने पंक्चर बनाने का ढूंढा अनोखा तरीका, रोजाना कमाए 500 रुपये

Sat, 18 Jul 2020 05:37 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: Rajeev Rai Updated Sat, 18 Jul 2020 05:37 PM IST
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In lockdown, Aurangabad's Imran found a unique way to make puncture, earned 500 rupees daily
पंक्चर (प्रतीकात्मक) - फोटो : social media

कोरोना महामारी की वजह से देशभर में लगे लॉकडाउन की वजह से कई लोगों के रोजगार छिन गए तो कई लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष करते नजर आए। हालांकि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कुछ लोगों ने आपदा को अवसर में बदलने का काम किया और नए तरीके अपनाकर काम ढूंढा। 

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ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र के औरंगाबाद से सामने आया है जहां टायर पंक्चर मरम्मत वाली एक दुकान के मालिक की रोजी रोटी पर भी संकट पैदा हो गया लेकिन उसने चुनौतीपूर्ण दौर में भी एक नायाब तरीका ढूंढा और अपना खर्चा निकाला। शहर के शाहनूर मियां दरगाह चौक पर पंक्चर ठीक करने की दुकान चलाने वाले 45 वर्षीय शेख इमरान ने कहा कि लॉकडाउन के कारण उन्हें भी अपनी दुकान बंद करनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने अपने दुपहिया वाहन पर सवार होकर गाड़ियों में पंक्चर लगाने का काम शुरू किया।
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इमरान ने कहा, ‘लॉकडाउन के दौरान भी महामारी को काबू में लाने के लिए काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहन सड़कों पर दौड़ रहे थे, ऐसे में मैंने एक तरीका इस्तेमाल करने का सोचा। 
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उन्होंने कहा, 'तीन साल पहले एक प्रयोग करते हुए मैंने अपने स्कूटर पर एयर कम्प्रेसर लगाया था जो स्कूटर के इंजन से ही चलता है और इसके बाद मैंने शहर में अलग-अलग दुकानों पर पहुंचकर पंक्चर ठीक करने का काम शुरू कर दिया। लॉकडाउन के दौरान यह मेरे काम आया।’

उन्होंने कहा, ‘आपात सेवाओं में लगे कुछ लोगों ने मेरा मोबाइल नंबर ले लिया। वे मुझे टायर पंक्चर लगाने के लिए बुलाने लगे।’

इमरान ने बताया, ‘मैंने लॉकडाउन के दौरान रोज कम से कम 500 रुपये कमाए। मैं पिछले 10 साल से पंक्चर ठीक करने की दुकान चला रहा हूं लेकिन घूम-घूम कर पंक्चर ठीक करने का काम मैंने तीन साल पहले शुरू किया था जिसने अब मेरी मदद की।’


यह पूछने पर कि क्या महामारी के दौरान काम करने से डर नहीं लगा, इस पर इमरान ने कहा, ‘मुझे पैसा कमाने के लिए बाहर जाना पड़ा। मैंने सुरक्षा के सभी कदमों का पालन किया।’

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