अमेरिका में ‘हाउडी मोदी’ का जबरदस्त क्रेज, सुनने वालों की संख्या 40 हजार के पार
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बजट सत्र के बाद व्यापारिक रिश्तों को मजबूत बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ह्यूस्टन दौरा पिछली यात्राओं से बेहद खास रहने वाला है। इस दौरे से पहले ही इसकी टैग लाइन को लेकर काफी चर्चा हो रही है। ‘हाउडी मोदी’...यानी मोदी आप कैसे हैं, कम्ज टू ह्यूस्टन (टेक्सास) टैग लाइन को पूरे अमेरिका में पहुंचा दिया गया है। इसकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि 22 सितम्बर को होने वाले सम्मेलन के लिए अभी तक 40 हजार से अधिक लोग पंजीकरण करा चुके हैं।
टेक्सास में भारी जोश, बढ़ी रजिस्ट्रेशन की तिथि
असल में दक्षिण पश्चिमी अमेरिका में हालचाल जानने के लिए 'हाउडी' हाऊ डू यू डू (आप कैसे हैं) बोला जाता है। भारतीय अमेरिकियों का मानना है कि ‘हाउडी मोदी’ दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करने में कारगर साबित होगा। 2014 में न्यूयॉर्क के मैडीसन स्क्वायर गार्डन और 2016 में सिलिकॉन वैली में आयोजित हुए समारोह में 22 हजार से अधिक लोगों ने शिरकत की थी, जबकि ह्यूस्टन में लोगों के जोश को देखते हुए टेक्सास इंडिया फोरम ने पंजीकरण की अंतिम तिथि को तीन दिन के लिए बढ़ा दिया है।
एनआरजी फुटबॉल स्टेडियम है वेन्यू
इससे पहले पीएम मोदी, मैडीसन स्क्वायर गार्डन और सिलिकॉन वैली में भारतीय समुदाय को संबोधित कर चुके हैं। मोदी, संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) की महासभा के वार्षिक सत्र में शामिल होने आ रहे हैं। टेक्सास के ह्यूस्टन में यह सम्मेलन एनआरजी फुटबॉल स्टेडियम में आयोजित होगा। एनआरजी फुटबॉल स्टेडियम' में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में करीब 50 हजार लोगों के आने की उम्मीद है। ह्यूस्टन को अमेरिका का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला शहर माना जाना जाता है। यहां पांच लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोग रहते हैं।
व्यापारिक रिश्तों को मजबूत बनाने में सफल होगा हाउडी मोदी!
ह्यूस्टन को व्यापार का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। यहाँ चार बड़े ट्रेड पार्ट्नर हैं, जिनमें ब्राजील, चीन, मैक्सिको और भारत शामिल हैं। ह्यूस्टन के गैर-सरकारी संगठन टेक्सास इंडिया फोरम के पदाधिकारी मानते हैं कि मौजूदा समय में अमेरिका-चीन ट्रेड वार चल रही है। वहीं यहां होने वाले व्यापार पर अमेरिका ने कुछ महीने पहले ही 25 फीसदी ड्यूटी लगा दी थी। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार पर असर पड़ा है।
ऐसे में भारत के लिए यह एक बेहतर अवसर है कि वह ह्यूस्टन के साथ अपने ट्रेड को नई राह दे सकता है। ह्यूस्टन में भारत से टेक्स्टाइल तो यहां से पेट्रोलियम, केमिकल, गैस और ट्रांसपोर्टेशन का निर्यात होता है। पिछले साल टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबोट भारत आए थे, जहां वे बंगलुरु और मुंबई भी गए थे। उन्होंने ट्रेड को लेकर पीएम मोदी और दूसरे मंत्रियों से बातचीत की थी। उम्मीद है कि ह्यूस्टन के सम्मेलन में भारत अमेरिकी व्यापारिक सम्बन्धों को लेकर एक नई राह तैयार होगी।
604 भारतीय-अमेरिकी संस्थाएं जुटी, ये हैं प्रमुख...
- फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन
- ग्लोबल हिंदू हेरिटेज फाउंडेशन
- ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायसपोरा
- हिंदू स्वयंसेवक संघ
- आईएसएसओ
- ह्यूस्टन खालसा
- ह्यूस्टन दुर्गाबाई सोसायटी
- पाटीदार फाउंडेशन
- ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ भाजपा यूएसए
- गुजरात कल्चरल एसो. शिकागो
- पाथ वे टू हेल्थ केयर करियर
- पीपल ऑफ इंडियन ओरिजन चेंबर ऑफ कामर्स
- अमेरिकन सोसायटी ऑफ इंडियन इंजीनियर एंड आर्किटेक्ट