Bharat Bandh: देश में कहां दिखा बंद का असर, कहां स्थिति रही सामान्य, पढ़िए पूरी रिपोर्ट
देश के किसान संघों ने केंद्र सरकारी की ओर से लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ मंगलवार की सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक देश व्यापी बंद का आह्वान किया था। बंद का असर देश में मिला-जुला दिखा। कुछ राज्यों में परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं। कुल मिलाकर स्थिति देखें तो भाजपा शासित राज्यों में जहां स्थिति नियंत्रिण में रही तो वहीं गैर भाजपा शासित राज्यों में भारत बंद का असर ज्यादा दिखा। यहां पढ़िए पूरी रिपोर्ट और जानिए देश में कहां कैसा रहा भारत बंद का असर...
दिल्ली के ज्यादातर बाजार खुले, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
‘भारत बंद’ के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए। वहीं, शहर में अधिकतर बाजार खुले रहे। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने दावा किया कि राष्ट्रीय राजधानी और देश के अन्य हिस्सों में परिवहन सेवाएं सामान्य हैं तथा बाजार भी खुले हैं और ‘भारत बंद’ का इन गतिविधियों पर कोई असर नहीं हुआ है। दिल्ली और गुरुग्राम में सुबह 10 से दोपहर साढ़े 12 बजे के बीच कई स्थानों के लिए एप आधारित कैब आने का समय (प्रतीक्षा समय) चार से पांच मिनट आ रहा था।
गाजीपुर मंडी के एपीएमसी अध्यक्ष एस. पी. गुप्ता ने बताया कि बाजार खुला है लेकिन कई व्यापारियों ने हड़ताल के समर्थन में अपनी दुकानें बंद कर दीं। व्यापार बहुत कम है क्योंकि वहां कोई ग्राहक नहीं है। दिल्ली के सरोजनी नगर बाजार के दुकानदारों ने भी हाथों में काला ‘रिबन’ बांध किसानों के साथ एकजुटता व्यक्त की। आजादपुर मंडी के एपीएमसी अध्यक्ष आदिल खान ने कहा कि मंडी लगभग बंद है। इसके साथ ही टीकरी बॉर्डर, जहां पिछले 13 दिनों से सैकड़ों किसान डटे हुए हैं, वहां भी कड़ी सुरक्षा के बीच दुकानें खुली रहीं।
बंगाल: तृणमूल कांग्रेस ने शुरू किया तीन दिन का धरना
तृणमूल कांग्रेस ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ मंगलवार को तीन दिनों का अपना धरना शुरू किया और इन जन-विरोधी कानूनों को फौरन वापस लिए जाने की मांग की है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बेचराम मन्ना के नेतृत्व में पार्टी के किसानों और कृषि श्रमिक शाखा ने आज दोपहर मध्य कोलकाता में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने अपना धरना शुरू किया। मन्ना ने कहा, 'हम किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दे का समर्थन करते हैं और प्रदर्शन करेंगे और धरना देंगे। लेकिन हम बंद के खिलाफ हैं और राज्य में ऐसा नहीं करेंगे।'
पार्टी कार्यकर्ताओं के हाथों में तख्तियां दिखीं और उन्होंने नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ आठ दिसंबर को किसानों द्वारा किए गए बंद के आह्वान का नैतिक समर्थन करने का फैसला किया है और पार्टी किसानों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए तीन दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में धरना देगी। ममता द्वारा 10 दिसंबर को विरोध-प्रदर्शन कार्यक्रम को संबोधित करने के साथ यह धरना संपन्न होगा।
छत्तीसगढ़ में दिखा भारत बंद का व्यापक असर
किसानों द्वारा आहूत ‘भारत बंद’ के मद्देनजर मंगलवार को राज्य के लगभग सभी बड़े शहरों में व्यापारिक संस्थान बंद रहे। छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल कांग्रेस ने भारत बंद का समर्थन किया है। सत्ताधारी दल के नेता और कार्यकर्ता बंद को सफल बनाने के लिए सड़क पर निकले और लोगों से समर्थन का अनुरोध किया। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कार्यकर्ताओं के साथ रायपुर जिले के दोंदे खुर्द गांव का दौरा किया और लोगों से किसानों का समर्थन करने की अपील की।
छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल के सदस्य संकेत ठाकुर ने बताया कि राज्य के 36 संगठनों ने बंद को समर्थन दिया है। इनमें किसान, मजदूर और सामाजिक संगठन शामिल हैं। बंद के दौरान राज्य के कई स्थानों पर रैलियों का आयोजन किया जा रहा है। ठाकुर ने बताया कि रायपुर के बूढ़ातालाब के करीब धरना स्थल पर किसानों ने सभा की है तथा जनता से अनुरोध किया है कि वे उनकी मांगों का समर्थन करें। उन्होंने बताया कि राज्य के मजदूर संगठनों तथा परिवहन संघों ने भी किसानों के बंद का समर्थन किया है।
राज्य में छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स तथा उद्योगों ने बंद का समर्थन किया है। छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स ने व्यापारिक प्रतिष्ठानों को शहरों में अपराह्न बाद दो बजे तक बंद रखने का फैसला किया था। राज्य में सार्वजनिक परिवहन और आटो रिक्शा चालकों ने भी बंद का समर्थन किया। सार्वजनिक वाहनों के न चलने के कारण लोगों को परेशानी हुई। पुलिसने बताया कि शांति बनाए रखने के लिए शहरों में कई स्थानों पर बल तैनात किया गया। रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर, जगदलपुर और राजनांदगांव समेत कई शहरों में बंद होने की जानकारी मिली है।
जम्मू-कश्मीर: किसानों के समर्थन में प्रदर्शन
ट्रांसपोर्टर सहित विभिन्न संगठनों ने मंगलवार को यहां शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया ताकि भारत बंद का आह्वान करने वाले किसानों के साथ एकजुटता दिखा सकें। बंद का जम्मू क्षेत्र में मिला-जुला असर रहा, जहां अधिकतर सार्वजनिक परिवहन सड़कों से नदारद रहे। यात्रियों को समस्याओं का सामना करना पड़ा और उन्हें पैदल जाते देखा गया लेकिन दुकानें एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान आंशिक रूप से खुले रहे।
मुख्य प्रदर्शन रैली जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन (जेकेटीडब्ल्यूए) ने बिक्रम चौक से दिगयाना तक निकाली जिससे जम्मू-पठानकोट राजमार्ग जाम हो गया। जेकेटीडब्ल्यूए और एक दर्जन से अधिक सामाजिक, धार्मिक तथा राजनीतिक संगठनों ने बंद के आह्वान का समर्थन किया है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारी शांत रहे और जम्मू जिले या प्रांत में कहीं से भी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई है।
गुजरात में भारत बंद का मिला-जुला असर
किसान संगठनों द्वारा आहूत भारत बंद का गुजरात में विपक्षी कांग्रेस ने समर्थन किया। बंद के समर्थन में मंप्रदर्शनकारियों ने कुछ जगहों पर राजमार्ग बाधित करने का प्रयास किया और मार्ग पर जलते हुए टायर रख दिए। हालांकि दोपहर तक राज्य में बंद का अधिक असर नहीं दिखा। राज्य में कुछ जगहों को छोड़कर सभी बाजार, दुकानें, सरकारी व निजी कार्यालयों समेत कारोबारी प्रतिष्ठान खुले रहे। प्रमुख शहरों में बंद का असर नहीं दिखा। सड़कों पर बसों की आवाजाही सामान्य रही। अहमदाबाद, राजकोट और सूरत समेत राज्य के प्रमुख शहरों में बीआरटीएस (बस रैपिड टांजिट सिस्टम) का कामकाज तय समय के अनुसार चला।
छानी गावं के पास प्रदर्शनकारियों के एक अन्य समूह ने अहमदाबाद-वडोदरा राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित किया। एक अन्य मामले में प्रदर्शनकारियों ने भरूच और दाहेज को जोड़ने वाले राजमार्ग को नंदेलाव के पास बाधित किया। राज्य में करीब 5,000 पेट्रोल पंप भी खुले रहे क्योंकि उनके संगठनों ने बंद को समर्थन नहीं दिया था। राज्य पुलिस नियंत्रण कक्ष के एक अधिकारी ने बताया, 'राज्य में बंद का अधिक असर नहीं दिखा। किसी भी तरह की हिंसा या किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। जनजीवन प्रभावित नहीं हुआ है।' किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए पूरे राज्य में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
राज्य में कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी)के कार्यालय खुले रहे। हालांकि अमरेली और मोरबी के वांकानेर में कांग्रेस के नियंत्रण वाले बाजार बंद रहे। पुलिस ने बताया कि अमरेली, जामनगर, राजकोट, गांधीनगर, सूरत, मोरबी, देहगाम, भावनगर और मोदासा में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रमुख मार्गों एवं राजमार्गों पर पुलिस की तैनाती होने के बावजूद गुजरात के ग्रामीण इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सुबह तीन राजमार्गों को बाधित किया और मार्ग पर जलते हुए टायर रख दिए। इससे मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। भारत बंद को देखते हुए राज्य सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लगाई गई थी।
महाराष्ट्र: सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित नहीं
महाराष्ट्र में मुंबई और अधिकतर हिस्सों में उपनगरीय ट्रेनों और बसों सहित सार्वजनिक परिवहन सेवाएं मंगलवार को किसानों द्वारा आहूत ‘भारत बंद’ के बावजूद लगभग सामान्य रहीं। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) शिवाजी सुतार ने बताया कि लोकल के साथ-साथ राज्य से बाहर जाने वाली ट्रेनों की सेवाएं भी अभी तक सामान्य हैं। टैक्सी और ऑटो-रिक्शा यूनियन के नेताओं ने बताया कि उनकी सेवाएं भी मुंबई में सामान्य रहीं।
बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं यातायात (बेस्ट) के प्रवक्ता ने बताया कि आज उनकी करीब 85 प्रतिशत बसें चलीं। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के जनसंपर्क अधिकारी अभिजीत भोंसले ने बताया कि राज्य में बसों का संचालन सामान्य है। केवल कुछ इलाकों में यात्री कम होने या एहतियाती उपायों के मद्देनजर बसें थोड़ी कम चलीं। भोसले ने कहा कि राज्य में अभी तक किसी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं है।
ट्रक ऑपरेटरों ने कहा कि माल की आवाजाही एक हद तक प्रभावित हुई क्योंकि कई ट्रक चालकों ने बंद के मद्देनजर गाड़ियां नहीं चलाई। महाराष्ट्र राज्य ट्रक टेंपो टैंकर वाहतूक संघ के सचिव दया नटकर ने कहा कि दूध, सब्जियों और फलों जैसी आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को बंद से छ्रट दी गई थी। टैक्सी यूनियन नेता एएल क्वाड्रोस ने बताया कि टैक्सियां सामान्य रूप राज्य में चल रही हैं, क्योंकि कोरोना के चलते पहले ही काफी नुकसान हुआ है।
सत्तारूढ़ शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस पार्टी ने बंद को अपना समर्थन दिया है, लेकिन साथ ही प्रदर्शनकारियों से सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के परिचालन में बाधा ना डालने की अपील भी की है। वही, पुणे में भी सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सामान्य रहीं। पुणे महानगर परिवहन महामंडल (पीएमपीएमएल) के एक अधिकारी ने कहा, 'शहर में हमारी सभी सेवाएं सामान्य हैं और बसों को रोके जाने जैसी किसी घटना की कहीं से कोई खबर नहीं मिली है।'
भाजपा शासित मध्यप्रदेश में बंद का मिला-जुला असर
भाजपा शासित मध्यप्रदेश में भारत बंद का मिला जुला असर रहा। इस दौरान प्रदेश में छिटपुट विरोध प्रदर्शन भी हुए। ग्वालियर जिले में एक कांग्रेस नेता के नेतृत्व में आंदोलनकारियों को खदेड़ने के लिये पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दुकानदारों से दुकानें बंद करने की अपील करने के साथ कई शहरों में रैली निकाली। शहरों में दुकानें हालांकि आम तौर पर खुली रहीं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के लोकसभा क्षेत्र मुरैना में बंद का मिला-जुला असर देखा गया। यहां किसान अपनी उपज बेचने के लिये कृषि उपज मंडी तक नहीं पहुंच सके। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में मंडियों का कामकाज प्रभावित रहा क्योंकि किसान अपनी उपज बेचने के लिए बाजार परिसर तक पहुंचने में असफल रहे। भोपाल में सब्जी मंडी में हालांकि सामान्य दिनों की तरह कामकाज हुआ।
आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तोमर के निवास के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस ने इसमें 50 लोगों को हिरासत में लिया है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के बैनर तले भोपाल में किसानों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासकीय आवास तक एक मार्च निकालने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने इसे चूनाभट्टी इलाके में ही रोक दिया। प्रदेश के गुना, बड़वानी, मंदसौर, झाबुआ, उमरिया और कुछ अन्य जिलों में बाजार खुले रहे। भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मिश्रा के नेतृत्व में न्यू मार्केट इलाके में विरोध प्रदर्शन किया। मिश्रा ने दावा किया कि बंद के तहत पुराने भोपाल में अधिकांश बाजार बंद रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विभिन्न इलाकों में दुकानदारों से दुकानें बंद करने का आग्रह किया। भोपाल में हालांकि ज्यादातर दुकानें खुली रहीं।
यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को ठंड में दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों से मिलना चाहिए और किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। इससे पहले, सुबह में होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया गया। क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन (केकेएमएस) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की। इंदौर में राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर के छावनी क्षेत्र स्थित संयोगितागंज अनाज मंडी में नए कृषि कानूनों पर विरोध जताते हुए मोदी सरकार और केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ नारे लगाए। दिग्विजय ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी लाने के बाद अब मोदी सरकार ने केवल बड़े-बड़े लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए कृषि क्षेत्र के काले कानून पेश किए हैं।
ग्वालियर जिले के डबरा से कांग्रेस विधायक सुरेश राजे ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और केंद्र सरकार का पुतला जलाया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार छोड़ कर उन्हें खदेड़ दिया। प्रदेश के श्योपुर, नरसिंहपुर, टीकमगढ़, विदिशा, राजगढ़, रीवा, भिंड, शहडोल, होशंगाबाद और अन्य जिलों में भी बंद का मिला जुला असर रहा। कई स्थानों पर कांग्रेस और किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किए गए। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश में बंद का कोई प्रभाव नहीं रहा। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस ने किसानों को गुमराह करने का असफल प्रयास किया। सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस कृषि सुधारों का समर्थन करती थी लेकिन विपक्ष में रहते हुए उसने अपना रुख बदल दिया। इससे कांग्रेस का दोहरा मापदंड उजागर होता है।'
तमिलनाडु-पुडुचेरी में द्रमुक-कांग्रेस का प्रदर्शन
तमिलनाडु में द्रमुक और कांग्रेस समेत उसके सहयोगी दलों ने मंगलवार को भारत बंद में हिस्सा लिया। पुडुचेरी में भी द्रमुक और कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। किसान संगठन केंद्र के तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस के शासन वाले केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में बंद का असर दिखा। बसें, टैक्सियां और ऑटो सड़कों पर नहीं दिखे। बंद के समर्थन में दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और राज्य सरकार के कार्यालयों में भी कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही।
तमिलनाडु में सार्वजनिक एवं निजी परिवहन पर असर कम दिखा और जनजीवन भी सामान्य रहा। हालांकि प्रदर्शन स्थलों के आस-पास यातायात जाम दिखा। चेन्नई, तिरुचिरापल्ली, तंजावुर, कुड्डालूर समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हुए। किसान संगठनों, द्रमुक, कांग्रेस, वाम दल समेत अन्य दलों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी बंद को समर्थन देते हुए कई प्रदर्शन स्थलों पर गए। उन्होंने कहा कि केंद्र को तुरंत बिना शर्त तीनों कानूनों को वापस लेना चाहिए।
तेलंगाना: टीआरएस और विपक्षी दलों ने किया प्रदर्शन
सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और विपक्षी दल कांग्रेस सहित कई राजनीतिक पार्टियों और विभिन्न यूनियनों ने ‘भारत बंद’ के समर्थन में राजग सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया। टीआरएस ने इस बंद का समर्थन करते हुए राज्य में सक्रिय रूप से प्रदर्शन करने का फैसला किया है ताकि यह सफल हो सके। राज्य के परिवहन मंत्री पुवडा अजय कुमार और लोकसभा में टीआरएस के नेता नागेश राव ने खम्मम में धरना दिया। राज्य में बंद के सर्मथन में वाम कार्यकर्ताओं में कई स्थानों पर प्रदर्शन किया।
राज्य की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री सत्यवती राठौड़ और धर्मार्थ मंत्री ए. इंद्रकरण रेड्डी ने क्रमश: महबूबाबाद और निर्मल नगर में प्रदर्शन किया। वहीं कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने पार्टी के अन्य नेताओं के साथ यहां शमिर्पेट में ‘रास्ता रोको’ अभियान में हिस्सा लिया। तेलंगाना जन समिति के नेता एम कोदंडाराम, भाकपा के राज्य सचिव चाडा वेंकट रेड्डी, माकपा के उनके समकक्ष तनमनी वीरभद्र और वाम दलों के कार्यकर्ता और वामपंथी-संबद्ध व्यापार और अन्य यूनियनों ने शहर में प्रदर्शन किया।
झारखंड में भारत बंद का मिला-जुला असर
‘भारत बंद’ के आह्वान का झारखंड में मंगलवार को मिला-जुला असर दिखा। यहां लगभग सभी सरकारी कार्यालय खुले रहे, लेकिन निजी संस्थान और दुकानें आंशिक तौर पर बंद रहीं। राज्य में स्थानीय यातायात अधिकतर सामान्य रहा, लेकिन अंतरराज्यीय यातायात ठप रहा। राजधानी रांची, धनबाद, हजारीबाग, जमशेदपुर, पलामू, दुमका, बोकारो, साहिबगंज और पाकुड़ समेत सभी 24 जिलों में बंद का मिला-जुला असर दिखा और कहीं से भी किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं है।
झारखंड के पुलिस महानिदेशक एमवी राव ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में स्थिति शांतिपूर्ण है और कहीं से भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। इस बीच, रांची में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के सभी कार्यालय सामान्य ढंग से खुले रहे लेकिन निजी संस्थानों, दुकानों तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बंद का आंशिक असर दिखा। सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के साथ वामपंथी दलों ने बंद का समर्थन किया और कई शहरों में प्रदर्शन किए।
झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को बयान जारी कर बंद का पूर्ण समर्थन किया था और कहा था कि किसानों की मांगें पूरी तरह उचित हैं और उनकी पार्टी इसका पूर्ण समर्थन करती है। इसी प्रकार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बंद का समर्थन करते हुए कहा कि किसानों के साथ केंद्र की मोदी सरकार लगातार नाइंसाफी कर रही है। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी भाजपा ने मुख्यमंत्री की ओर से बंद का समर्थन करने पर सवाल उठाया।
कर्नाटक में दिखा बंद का असर, जनजीवन प्रभावित
भारत बंद के तहत मंगलवार को कर्नाटक में किसानों और कामगारों के प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरने से जनजीवन प्रभावित हुआ। कर्नाटक राज्य रैयता संघ और हसिरू सेना (ग्रीन ब्रिगेड) द्वारा आहूत बंद का कई संगठनों और दलों ने समर्थन किया। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने बंद को ‘असफल’ बताया। राज्य में किसान कर्नाटक भूमि सुधार (संशोधन) कानून का विरोध कर रहे हैं, जिसके तहत किसानों से सीधे कृषि भूमि खरीदने की अनुमति दी गई है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इन कानूनों से कृषि क्षेत्र रियल इस्टेट क्षेत्र में बदल जाएगा। कई ट्रेड यूनियनों ने भी श्रम कानूनों में सुधार के विरोध में किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देने की घोषणा की है। इसके अलावा कांग्रेस, भाकपा, माकपा जैसे वाम दलों और उनसे जुड़े संगठनों ने भी बंद को अपना समर्थन दिया है। वेटल नागराज के कन्नड़ चलावली वेटल पक्ष जैसे कुछ कन्नड़ समर्थक संगठनों ने भी बंद को समर्थन दिया है।
बंगलूरू, मैसुरू, बेलगावी, हुब्बली-धारवाड, रायचुर, तुमकुरु, मंगलुरु, बीदर, विजयपुरा, हासन, चिकमंगलुरु, चामराजनगर, कोप्पल, कोलार, चिकबल्लापुर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन मार्च, रैलियां निकाली गईं। कुछ स्थानों पर दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखी। कुछ इलाके में प्रदर्शनकारियों ने दुकानें जबरन बंद कराईं। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार और बी जमीर अहमद खान शहर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे।
राजस्थान में मिला-जुला रहा भारत बंद का असर
राजस्थान के अनेक इलाकों में भारत बंद का शुरुआती असर मिला जुला रहा। राज्य में अभी अनाज मंडियां एवं प्रमुख बाजार बंद रहे, लेकिन कई जगह बाजारों में कुछ दुकानें सामान्य दिनों की तरह खुली रहीं। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास अपने समर्थकों के साथ बंद के समर्थन में जयपुर के अनेक इलाकों में ट्रैक्टर एवं अन्य वाहनों पर घूमे। किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा, ‘गांवों एवं कस्बों में बंद का स्पष्ट असर है। राज्य में सभी मंडियां बंद हैं। बंद शांतिपूर्ण ही रहेगा।’ राजस्थान की राजधानी जयपुर में कई जगहों पर सुबह दुकानें सामान्य दिनों की तरह खुलीं।
उधर, किसानों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे एनएसयूआई के सदस्यों और भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं के बीच जयपुर में भाजपा कार्यालय के बाहर झड़प हो गई। किसानों को समर्थन देने के लिये कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर रैली निकाल पर प्रदर्शन किया। वहीं, एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का एक समूह प्रदर्शन करने के लिए भाजपा प्रदेश मुख्यालय के बाहर एकत्र हुआ, जहां उनकी भाजपा युवा मार्चा के कार्यकर्ताओं के साथ झड़प हो गयी। एनएसयूआई के प्रवक्ता रमेश भाटी ने कहा कि हम शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन भाजयपमो के सदस्यों ने हमारे कुछ कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।
बंद के दौरान मेघालय में जनजीवन सामान्य रहा
मेघालय में मंगलवार को जनजीवन सामान्य रहा और किसान संगठनों द्वारा बुलाए गए 'भारत बंद' का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। राज्य में दुकानें और बाजार खुले रहे तथा निजी और सार्वजनिक वाहन चलते रहे। अधिकारियों ने बताया कि सरकारी कार्यालय, बैंक और डाकखाने खुले रहे तथा कर्मचारियों की मौजूदगी देखी गई।
'मेघालय जॉइंट कॉउंसिल ट्रेड यूनियन एंड एसोसिएशन' ने कहा कि वह बंद का नैतिक आधार पर समर्थन करते हैं लेकिन कोरोना के चलते उन्होंने शहर में कोई विरोध प्रदर्शन न करने का निर्णय लिया है। हिल्स किसान संघ के अध्यक्ष कमांड शंगप्लीयांग ने कहा कि उनके संगठन ने भी किसानों को नैतिक आधार पर समर्थन दिया है।
अरुणाचल प्रदेश: जनजीवन पर खास असर नहीं
किसान यूनियनों द्वारा मंगलवार को बुलाए गए भारत बंद के बीच अरुणाचल प्रदेश में इसका असर कम दिखा और जनजीवन सामान्य रहा। निजी कारों और सार्वजनिक परिवहन की सड़कों पर आवाजाही सामान्य रही। सभी बाजार और कारोबारी प्रतिष्ठान खुले रहे और बैंक समेत सरकारी एवं निजी कार्यालयों में कामकाज सामान्य रहा। पुलिस ने बताया कि लंबी दूरी की गाड़ियां सड़कों पर नहीं दिखीं।
त्रिपुरा में भारत बंद का कोई असर नहीं
केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों की ओर से मंगलवार को बुलाए गए बंद का त्रिपुरा में कोई असर नहीं दिखा। सड़कों पर रोज की तरह वाहन चलते रहे और राज्य में बाजार व दुकानें खुली रहीं। सरकारी कार्यालय, बैंक और वित्तीय संस्थानों में कर्मचारियों की मौजूदगी देखी गई। पुलिस ने कहा कि अभी तक राज्य के किसी भी हिस्से से हिंसा की कोई खबर नहीं मिली है।