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Punjab Sand Mining Case: राज्य में ईडी की कार्रवाई, क्यों चर्चा में है राज्य का अवैध रेत खनन
Tue, 18 Jan 2022 04:18 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Tue, 18 Jan 2022 04:18 PM IST
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रेत खनन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो :
फाइल फोटो
विस्तार
अवैध रेत खनन के मामले में प्रर्वतन निदेशालय ने पंजाब और हरियाणा में बड़ी कार्रवाई की है। जहां हरियाणा के पंचकूला में रेड पड़ी वहीं, पंजाब में मोहाली और लुधियाना में जांच चल रही है। मोहाली में मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी के करीबी रिश्तेदार के यहां भी रेड पड़ी है। इस बारे में सीएम चन्नी ने कहा कि उनके रिश्तेदार के घर पर छापेमारी की जा रही है। वे मुझे निशाना बना रहे हैं और आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मुझ पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।क्यों चर्चा में पंजाब
बीते कुछ सालों से पंजाब से अवैध रेत खनन की कई शिकायतें आ रही थीं। मोहाली, रोपड़, होशियारपुर और पठानकोट समेत 12 जिले ऐसे हैं जिसें अवैध खनन पर ईडी की खास नजर थी। अवैध रेत खनन का मुद्दा पंजाब विधानसभा चुनाव का एक अहम मुद्दा भी है। इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को बार-बार निशाना बनाती रही है। पिछले साल दिसबंर महीने में 'आप' ने आरोप लगाया था कि सीएम चन्नी के निर्वाचन क्षेत्र चमकौर साहिब में अवैध रेत खनन पाया गया है।
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया था कि पंजाब में अनुमानित रूप से 20,000 करोड़ रुपये का अवैध रेत खनन हो रहा है। इन्हीं आरोपों के मद्देनजर पंजाब के मुख्यमंत्री दिसबंर महीने में ही अवैध खनन की जानकारी सबूत सहित देने वाले को 25 हजार रुपये नकद देने का एलान किया। उन्होंने उपायुक्तों से खनन स्थलों पर कड़ी निगरानी रखने को भी कहा ताकि अवैध गतिविधि को रोका जा सके।
कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो :
ANI
इससे पहले पंजाब में अवैध खनन के मामले सामने आने के बाद पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंद सिंह ने एक बड़ा फैसला लेते हुए रात के अंधेरे में माइनिंग करने पर रोक लगा दी थी। अवैध खनन रोकने के लिए ड्रोन से निगरानी की जा रही है। बीते साल अप्रैल में ईडी माइनिंग के एडीजीपी कम डायरेक्टर आरएन ढोके ने मीडिया को दिए बयान में कहा था कि अवैध खनने के मामलों में अब तक 93 लोगों के खिलाफ 70 FIR दर्ज की गई हैं और 70 गाड़ियां जब्त की गई हैं।
क्यों होता है रेत का अवैध खनन
हवा और पानी के बाद रेत सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला प्राकृतिक संसाधन है। हम तेल का इस्तेमाल करने से ज्यादा इसका इस्तेमाल करते हैं। इसका इस्तेमाल शराब, टूथपेस्ट, कांच, माइक्रोप्रोसेसर, सौंदर्य देखभाल उत्पाद, कागज, पेंट और प्लास्टिक तक बनाने के लिए किया जाता है। वहीं सड़कों, घर, भवन, बांध आदि के निर्माण के लिए भी लोग इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।
क्यों होता है रेत का अवैध खनन
हवा और पानी के बाद रेत सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला प्राकृतिक संसाधन है। हम तेल का इस्तेमाल करने से ज्यादा इसका इस्तेमाल करते हैं। इसका इस्तेमाल शराब, टूथपेस्ट, कांच, माइक्रोप्रोसेसर, सौंदर्य देखभाल उत्पाद, कागज, पेंट और प्लास्टिक तक बनाने के लिए किया जाता है। वहीं सड़कों, घर, भवन, बांध आदि के निर्माण के लिए भी लोग इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।
रेत खनन
- फोटो :
अमर उजाला
क्यों बढ़ रहा है अवैध रेत खनन
एक अनुमान के अनुसार 2025 तक भारत में करीब दो अरब टन नदी की रेत की जरूरत होगी। शहरीकरण के बढ़ने और इस संसाधन की दिनों-दिन बढ़ती आवश्यकता के कारण ही रेत खनन की अवैध गतिविधियों और व्यवसाय ने अपने पैर पसार लिए हैं। इस वजह से इन गतिविधियों में लिप्त कई लोगों की जानें भी गई हैं। पिछले साल दक्षिण एशिया नेटवर्क द्वारा बांधों, नदियों और लोगों पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अवैध बालू खनन से जुड़ी गतिविधियों से दो साल में 190 लोगों की मौत हुई है।
रेत के अवैध खनन रोकने के लिए क्या है दिशानिर्देश
प्राकृतिक संसाधनों के अवैध खनन, परिवहन एवं भण्डारण को रोकने के लिए नियम बनाने की जिम्मेदारी एमएमडीआर, अधिनियम 1957 की धारा 23 सी के तहत राज्य सरकार को अधिकार दिया गया है। लेकिन हाल के दिनों में, यह देखा गया है कि देश में अवैध खनन के मामलों की संख्या बढ़ी है। कुछ मामलों में इस पर अंकुश लगाने के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अधिकारियों की जानें भी चली गई। अवैध और अनियंत्रित अवैध खनन राज्यों को राजस्व का नुकसान होता है और पर्यावरण की क्षति भी उठानी पड़ती है।
एक अनुमान के अनुसार 2025 तक भारत में करीब दो अरब टन नदी की रेत की जरूरत होगी। शहरीकरण के बढ़ने और इस संसाधन की दिनों-दिन बढ़ती आवश्यकता के कारण ही रेत खनन की अवैध गतिविधियों और व्यवसाय ने अपने पैर पसार लिए हैं। इस वजह से इन गतिविधियों में लिप्त कई लोगों की जानें भी गई हैं। पिछले साल दक्षिण एशिया नेटवर्क द्वारा बांधों, नदियों और लोगों पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अवैध बालू खनन से जुड़ी गतिविधियों से दो साल में 190 लोगों की मौत हुई है।
रेत के अवैध खनन रोकने के लिए क्या है दिशानिर्देश
प्राकृतिक संसाधनों के अवैध खनन, परिवहन एवं भण्डारण को रोकने के लिए नियम बनाने की जिम्मेदारी एमएमडीआर, अधिनियम 1957 की धारा 23 सी के तहत राज्य सरकार को अधिकार दिया गया है। लेकिन हाल के दिनों में, यह देखा गया है कि देश में अवैध खनन के मामलों की संख्या बढ़ी है। कुछ मामलों में इस पर अंकुश लगाने के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अधिकारियों की जानें भी चली गई। अवैध और अनियंत्रित अवैध खनन राज्यों को राजस्व का नुकसान होता है और पर्यावरण की क्षति भी उठानी पड़ती है।
अवैध रेत परिवहन के मामले में जब्त डंपर
- फोटो :
अमर उजाला
रेत के अवैध खनन की बढ़ती चुनौती को देखते हुए पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2020 में नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। वहीं खनन मंत्रालय ने एक भी फ्रेमवर्क तैयार किया है, जिसमें मांग-आपूर्ति की स्थिति, संचालन, निगरानी, परिवहन और रेत की बिक्री समेत सभी मुद्दों पर फोकस किया गया है।
दिशानिर्देशों की अनदेखी के लगते हैं आरोप
आरोप लगते हैं कि सरकार के दिशानिर्देशों के बाद भी भारत में अवैध रेत खनन और उसके परिणामों की अनदेखी की जाती है या उन्हें कम करके आंका जाता है। अवैध रेत खनन के खिलाफ कई मामले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के पास लंबित हैं। जानकार मानते हैं कि मौजूदा व्यवस्था अवैध रेत खनन को रोकने में कारगर और शक्तिशाली नहीं रही है। रेत और चट्टान खनन के अवैध खनन को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी के लिए मौजूदा तंत्र को संशोधित करने की आवश्यकता है।
दिशानिर्देशों की अनदेखी के लगते हैं आरोप
आरोप लगते हैं कि सरकार के दिशानिर्देशों के बाद भी भारत में अवैध रेत खनन और उसके परिणामों की अनदेखी की जाती है या उन्हें कम करके आंका जाता है। अवैध रेत खनन के खिलाफ कई मामले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के पास लंबित हैं। जानकार मानते हैं कि मौजूदा व्यवस्था अवैध रेत खनन को रोकने में कारगर और शक्तिशाली नहीं रही है। रेत और चट्टान खनन के अवैध खनन को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी के लिए मौजूदा तंत्र को संशोधित करने की आवश्यकता है।
अवैध खनन
- फोटो :
अमर उजाला
अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान
बालू के खनन को लेकर दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि निकाली गई बालू की मात्रा उसकी फिर से पूर्ति दर और नदी की चौड़ाई के अनुपात में होनी चाहिए। रेत खनन के लिए भारी मशीनों के उपयोग की मनाही है और मैनुअल खनन को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन देखा जाता है कि अवैध खनन में लिप्त लोग जल्दी-जल्दी रेत निकालने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। अवैध और अवैज्ञानिक रेत खनन भारत में सबसे बड़ी पारिस्थितिकी आपदाओं में से एक बन गया है।
पर्यावरणविद मानते हैं कि अत्यधिक खनन नदियों के तल को बदल सकता है और नदियां रास्ता बदलने के लिए मजबूर हो सकती हैं। इससे नदियों के आसपास और उसमें रहने वाले जीवों के लिए खतरा पैदा होता है। वहीं इसके कारण नदी में नजदीकी समुद्र के खारे पानी के मिल जाने का भी भय रहता है। माना जाता है कि अत्यधिक खनन के कारण समुद्र के जलस्तर में वृद्धि का प्रभाव नदियों के ऊपर अधिक पड़ेगा।
बालू के खनन को लेकर दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि निकाली गई बालू की मात्रा उसकी फिर से पूर्ति दर और नदी की चौड़ाई के अनुपात में होनी चाहिए। रेत खनन के लिए भारी मशीनों के उपयोग की मनाही है और मैनुअल खनन को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन देखा जाता है कि अवैध खनन में लिप्त लोग जल्दी-जल्दी रेत निकालने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। अवैध और अवैज्ञानिक रेत खनन भारत में सबसे बड़ी पारिस्थितिकी आपदाओं में से एक बन गया है।
पर्यावरणविद मानते हैं कि अत्यधिक खनन नदियों के तल को बदल सकता है और नदियां रास्ता बदलने के लिए मजबूर हो सकती हैं। इससे नदियों के आसपास और उसमें रहने वाले जीवों के लिए खतरा पैदा होता है। वहीं इसके कारण नदी में नजदीकी समुद्र के खारे पानी के मिल जाने का भी भय रहता है। माना जाता है कि अत्यधिक खनन के कारण समुद्र के जलस्तर में वृद्धि का प्रभाव नदियों के ऊपर अधिक पड़ेगा।