{"_id":"5a416f434f1c1b0d788b4f96","slug":"ignored-supreme-court-order-on-ioc-also-rebukes","type":"story","status":"publish","title_hn":"अदालती आदेश की अनदेखी पर आईओसी को भी फटकार","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
अदालती आदेश की अनदेखी पर आईओसी को भी फटकार
अमर उजाला ब्यूरो / नई दिल्ली
Updated Tue, 26 Dec 2017 03:06 AM IST
विज्ञापन
आईओसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंत्री या पब्लिक अथॉरिटी अपने विवेकाधीन कोटे से सरकारी संपत्तियां या ठेके देने में मनमानी नहीं कर सकते। मंत्री या पब्लिक अथॉरिटी ऐसे मामलों में दरियादिली नहीं दिखा सकते। न्यायमूर्ति एन वी रमण और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पब्लिक अथॉरिटी के काम के निष्पादन में पारदर्शिता और औचित्य दिखना चाहिए। इसमें मनमानी नहीं होनी चाहिए। भले ही अथॉरिटी को ऐसे मामलों में विशेषाधिकार मिला हुआ हो लेकिन वे अनियंत्रित नहीं हो सकते। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश में एक महिला को पेट्रोल पंप की डीलरशिप दिए जाने के मामले में की है।
पीठ ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) को विभागीय जांच करने का निर्देश देते हुए यह पता लगाने के लिए कहा है कि किन अधिकारियों ने शशिप्रभा शुक्ला को बस्ती में पेट्रोल पंप चलाने की इजाजत दी थी जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे 179 पेट्रोल पंपों का आवंटन निरस्त कर दिया था। वास्तव में 29 अगस्त 1997 को दिल्ली हाईकोर्ट ने 1993 से 1996 के बीच तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री द्वारा अपने विवेकाधीन कोटे से दिए गए 179 पेट्रोल पंप और 155 एलपीजी डीलरशिप को निरस्त कर दिया था।
अगले 20 साल तक नहीं घटेगी देश में पेट्रोल-डीजल की मांग
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद जिस तरीके से आईओसी ने काम किया, वह दुखद और स्तब्ध करने वाला है। पीठ ने आईओसी को दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि अगर आईओसी इसमें नाकाम रहती है तो उसे न्यायालय की अवमानना करार दिया जाएगा। हालांकि पीठ ने वर्ष 2004 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार कर ली है। हाईकोर्ट ने शशिप्रभा शुक्ला को पेट्रोल पंप की डीलरशिप जारी रखने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए शीर्ष अदालत ने उस इलाके में नए सिरे से डीलरशिप आवंटन प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
पीठ ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) को विभागीय जांच करने का निर्देश देते हुए यह पता लगाने के लिए कहा है कि किन अधिकारियों ने शशिप्रभा शुक्ला को बस्ती में पेट्रोल पंप चलाने की इजाजत दी थी जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे 179 पेट्रोल पंपों का आवंटन निरस्त कर दिया था। वास्तव में 29 अगस्त 1997 को दिल्ली हाईकोर्ट ने 1993 से 1996 के बीच तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री द्वारा अपने विवेकाधीन कोटे से दिए गए 179 पेट्रोल पंप और 155 एलपीजी डीलरशिप को निरस्त कर दिया था।
विज्ञापन
अगले 20 साल तक नहीं घटेगी देश में पेट्रोल-डीजल की मांग
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद जिस तरीके से आईओसी ने काम किया, वह दुखद और स्तब्ध करने वाला है। पीठ ने आईओसी को दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि अगर आईओसी इसमें नाकाम रहती है तो उसे न्यायालय की अवमानना करार दिया जाएगा। हालांकि पीठ ने वर्ष 2004 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार कर ली है। हाईकोर्ट ने शशिप्रभा शुक्ला को पेट्रोल पंप की डीलरशिप जारी रखने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए शीर्ष अदालत ने उस इलाके में नए सिरे से डीलरशिप आवंटन प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।