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अगले 20 साल तक नहीं घटेगी देश में पेट्रोल-डीजल की मांग

Mon, 13 Nov 2017 04:33 PM IST
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला Updated Mon, 13 Nov 2017 04:33 PM IST
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Demand of petrol and diesel will not decrease in the next 20 years says ioc president sanjiv singh
संजीव सिंह, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, आईओसी

देश के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक तरफ सभी मोटर वाहन निर्माता कंपनियों को वर्ष 2030 तक ई-वाहनों की तरफ शिफ्ट होने का स्पष्ट संदेश दे दिया है, दूसरी तरफ देश में पेट्रोलियम पदार्थों के सबसे बड़े रिटेलर इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) का कहना है कि अगले 15-20 वर्षों तक पेट्रोल या डीजल की मांग में कोई कमी नहीं आएगी। यही नहीं, इनका मानना है कि अगले कुछ ही वर्षों में मोटर-वाहन के इंजन और पेट्रोलियम ईंधन इतने बेहतर हो जाएंगे कि इनसे ना के बराबर प्रदूषण होगा। शिशिर चौरसिया ने आईओसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजीव सिंह से इस बारे में विस्तृत बातचीत की। पेश है, इस बातचीत के मुख्‍य अंश:

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प्रश्न- देश के परिवहन मंत्री का जोर अब ई-वाहनों पर है। उन्होंने वाहन निर्माताओं को वर्ष 2030 तक इसे अपनाने का स्पष्ट संदेश दे दिया है। इससे पेट्रोल-डीजल की मांग में कमी नहीं आएगी?
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उत्तर- मेरा आकलन है कि आने वाले 15-20 वर्षों के दौरान भारत में पेट्रोल या डीजल की मांग में कोई कमी नहीं आएगी, बल्कि यह और बढ़ेगी। इस समय देखें, तो भारत में हर वर्ष पेट्रोल की मांग में 9-10 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है। 
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डीजल की मांग में तीन फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। आप यहां के वाहनों के लीट की विशेषता देखें, तो समझ जाएंगे कि यहां ईंधन की मांग क्यों नहीं घटेगी। 

पेट्रोल से चलने वाले वाहनों में 80 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी दोपहिया वाहनों की है। जब पेट्रोल की बिक्री का आंकड़ा देखेंगे, तो पाएंगे कि हम 65 फीसदी से ज्यादा पेट्रोल दोपहिया वाहनों को बेचते हैं। इस समय दोपहिया वाहनों की ज्यादा बिक्री ग्रामीण इलाकों या छोटे शहरों में हो रही है। 

एक बार वाहन खरीद लिया तो 15-20 साल तो चलाएंगे ही। इसलिए पेट्रोल की मांग इतने दिनों तक तो घटने वाली नहीं है। यही हाल डीजल का भी है। भारत में जल्दी वाहन बदलने की प्रवृत्ति तो है नहीं।

तकनीक में काफी तेज बदलाव हो रहा है

Demand of petrol and diesel will not decrease in the next 20 years says ioc president sanjiv singh
पेट्रोल डीजल - फोटो : SELF
प्रश्न- तो क्या प्रदूषण फैलता रहेगा?
उत्तर- बिल्कुल नहीं। हम बीएस 6 ईंजन की तरफ बढ़ रहे हैं। बीएस 6 मानक यूरो 6 मानक के ही अनुरूप है। इस मानक के डीजल इंजन को चाहे कार्य क्षमता (एफिशिएंसी) के लिहाज से देखें या प्रदूषण मानक (इमिशन नॉर्म) के हिसाब से, यह पेट्रोल से चलने वाले बीएस 6 इंजन के समान है। इसलिए इनसे प्रदूषण न के बराबर होगा। आप पावर के हिसाब से देखें, तो बीएस 6 डीजल इंजन में कम ईंधन में ज्यादा पावर मिलेगी। इस दिशा में तकनीक में काफी तेज बदलाव हो रहा है।

प्रश्न- जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों की तकनीक कितनी भी सुधर जाए, यह ई-वाहन से तो ज्यादा ही प्रदूषण करेगा?
उत्तर- नहीं, हम ऐसा नहीं कह सकते। हमें यह भी देखना होगा कि बिजली कैसे पैदा हो रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी किस मेटेरियल से बना है, उससे पर्यावरण की कोई समस्या तो पैदा नहीं हो रही है। वाहनों की बैटरी यहां बन रही है या उसे आयात किया जा रहा है। बैटरी को वाहन से निकालने के बाद उसे कैसे डिस्पोज किया जा रहा है। अभी तो आप देश ही रहे होंगे कि घरों में इन्वर्टर में उपयोग होने वाली बैटरी के खराब होने के बाद आमतौर पर लोग उसे कबाड़ी को बेच देते हैं। इससे तो प्रदूषण बढ़ता ही है।

प्रश्न- पेट्रोल एवं डीजल के क्षेत्र में आप निर्विवाद रूप से स्थापित खिलाड़ी हैं। आने वाले वर्षों में आप आईओसी की क्या प्राथमिकता तय करना चाहेंगे?
उत्तर- पेट्रोल-डीजल के अलावा, हम इस समय गैस से जुड़ी ढांचागत संरचना तैयार करने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। हमने इस दिशा में तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। यदि कोई उद्योग तरल ईंधन के बजाय प्राकृतिक गैस पर शिफ्ट होना चाह रहा है, तो उसे हम यह ईंधन देंगे। हमने गैस बेचना शुरू कर दिया है। हमने घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी के बजाय पीएनजी की आपूर्ति शुरू करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और ऐतिहासिक शहर आगरा में पीएनजी की आपूर्ति के लिए हमने गेल के साथ मिलकर बोली लगाई थी, जिसमें हम सफल रहे हैं। जब कुछ और शहरों के लिए बोली मंगाई जाएगी, तो हम उसमें भी बोली लगाएंगे। हम मोटर वाहनों में ऑटो एलपीजी भी देंगे। पेट्रोकेमिकल्स में तो हम अपनी उपस्थिति बढ़ा ही रहे हैं। हमने तय किया है कि जितनी भी पुरानी रिफाइनरी है, वहां पेट्रोकेमिकल कॉम्‍पलेक्स भी होगा। इस दिशा में हमने काम शुरू कर दिया है।
 

मिट्टी तेल की मांग में उल्लेखनीय कमी

Demand of petrol and diesel will not decrease in the next 20 years says ioc president sanjiv singh

प्रश्न- हवाई जहाज के ईंधन (एटीएफ) के बारे में क्या रणनीति रहेगी?
उत्तर- एटीएफ का तो शानदार बाजार है। भारत में एटीएफ का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों से यहां हवाई सेवा का जबरदस्त विस्तार हो रहा है। इस समय सरकार ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए जो उड़ान योजना शुरू की है, उससे टीयर टू और टीयर थ्री शहरों में भी एटीएफ की खपत शुरू हो रही है। हम इन शहरों में एटीएफ से जुड़ी ढांचागत संरचना बना रहे हैं।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के सफलता पूर्वक लागू करने से अब मिट्टी तेल की मांग में उल्लेखनीय कमी आई है। हम अब अपनी रिफाइनरी में मिट्टी तेल के बजाय एटीएफ बनाएंगे। हमारा अनुमान है कि आने वाले वर्षों में उड़ान योजना से जुड़ने वाले सभी शहरों में एटीएफ की मांग में काफी बढ़ोतरी होगी। इसके लिए भी तो अभी से ही तैयारी करनी होगी।
 
प्रश्न- सरकार ने पेट्रोल-डीजल की घर-घर डिलीवरी का खाका खींचा है, उस दिशा में क्या प्रगति है?
उत्तर- इस दिशा में काम चल रहा है। हमने पेसो, नागपुर से लाइसेंस केलिए अनुमति मांगी है। वहां से अभी तक अनुमति नहीं मिली है। एक बार वहां से अनुमति मिल जाए, फिर आगे की रणनीति के बारे में आपको बताएंगे। वैसे आपको बता दें कि डीजल की डोर टू डोर डिलीवरी की ज्यादा मांग रहेगी, क्योंकि इस समय ग्रामीण क्षेत्र से किसानों को सिर्फ डीजल खरीदने केलिए हाईवे पर आना पड़ता है।

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