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Bombay High Court: हाईकोर्ट की टिप्पणी- कानून की जानकारी न होने का बहाना बनाकर सजा से बचा नहीं जा सकता

Wed, 24 Jul 2024 06:18 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: बशु जैन Updated Wed, 24 Jul 2024 06:18 PM IST
सार

विवलविटा फार्मास्यूटिकल्स के निदेशक अजय मेलवानी के खिलाफ 2019 में मुंबई पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी। मेलवानी की फर्म के जरिये एक इतावली कंपनी को एक हजार किलोग्राम एन-फेनिथाइल -4 पाइपरिडोन का निर्यात किया गया था। जबकि इसे 2018 में ही प्रतिबंधित कर दिया गया था।

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Ignorance of law no excuse to break it says Bombay HC
Bombay High court - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक फार्मा कंपनी के निदेशक की ओर से दाखिल की गई 2019 में दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि कानून की जानकारी न होने का बहाना बनाकर कोई भी सजा या अपराध से बचा नहीं जा सकता। अगर कानून की अज्ञानता को बचाव के तौर पर स्वीकार कर लिया जाता है तो ऐसे तो कानून का पालन कराना ही असंभव हो जाएगा। 

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विवलविटा फार्मास्यूटिकल्स के निदेशक अजय मेलवानी के खिलाफ 2019 में मुंबई पुलिस के नारकोटिक्स विभाग ने रिपोर्ट दर्ज की थी। मेलवानी की फर्म के जरिये केमिकल बनाने वाली सैम फाइल ओ केम लिमिटेड ने एक इतावली कंपनी को एक हजार किलोग्राम एन-फेनिथाइल -4 पाइपरिडोन का निर्यात किया था। जबकि इसे 2018 में ही नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (नियंत्रित पदार्थों का विनियमन) आदेश के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था। साथ ही इसके निर्यात के लिए नारकोटिक्स विभाग के कमिश्नर का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के निर्देश थे। मगर मेलवानी कंपनी ने कमिश्नर से कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं लिया था। 
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रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मेलवानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा था केमिकल को रद्द करने के बारे में विभाग ने 2018 में जारी अधिसूचना का प्रचार नहीं किया। इसके चलते उसे और उसकी फर्म को एनओसी लेने के नियम की जानकारी नहीं थी। मेलवानी ने कोर्ट से एफआईआर को रद्द करने की मांग की
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न्यायाधीश एएस गडकरी और न्यायाधीश नीला गोखले की खंडपीठ ने 22 जुलाई को याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि कानून की जानकारी न होने की बात कहकर आपराधिक आरोप से बचा नहीं जा सकता। पीठ ने मार्च ने 2023 में हाईकोर्ट की ओर से पारित मेलवानी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने से रोकने के आदेश को चार सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया। 

कोर्ट ने कहा कि कानून की अज्ञानता की बात कहकर इसे तोड़ने का बहाना नहीं मिल जाता। यदि हर आरोपी कानून के बारे में जानकारी होने के बाद भी यही कहने लगेगा कि उसे कानून के बारे में पता नहीं था तो फिर कानून का पालन ही नहीं हो सकेगा। कोर्ट ने कहा कि इससे तो कानून तोड़ने वाले भी इसका दुरुपयोग कर सकते हैं।

कोर्ट ने कहा कि मेलवानी की कंपनी लगातार केमिकल की खरीद करती रहती है। वह 2012 से इस व्यवसाय में लगी है। फर्म के अधिकारियों और कंपनी को निर्यात-आयात कानून, नियमों में हो रहे बदलाव के प्रति खुद को अपडेट करते रहना चाहिए। यह तो कंपनी की नियमित गतिविधि होनी चाहिए।


कोर्ट ने कहा प्रथम दृष्टया आरोप अपराध का खुलासा करते हैं। ऐसे में याचिका खारिज की जाती है।  वहीं मामले में अभियोजन पक्ष ने निर्यात की जांच करने और नियम के पालन में विफल रहने पर सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई।

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