अगर आप कोरोना से संक्रमित हैं तो इन बातों का ध्यान रखना है जरूरी
- देश में कोरोना के मामले 3,33,000 से भी ज्यादा
- देश में कोरोना से अब तक 9,520 मरीजों की मौत
- संक्रमित मरीजों से दूर रहें और मास्क जरूर पहनें
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विस्तार
देश में कोरोना से संक्रमित मरीजों के आंकड़ें लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वो दिन दूर नहीं जब आप या आपका कोई जानने वाला भी कोविड-19 वायरस के संपर्क में आ जाए और संक्रमित हो जाए। कोरोना के लक्षण में मुख्य रूप से खांसी, जुकाम, बुखार और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं लेकिन बाद में कोरोना के ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें ऐसा कोई लक्षण नहीं दिखा।
अगर आपको जाने-अनजाने में किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ जाते हैं तो आपको कोरोना वायरस से संबंधित इन बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए...
कैसे फैलता है कोरोना संक्रमण?
अगर किसी व्यक्ति के शरीर के अंदर कोरोना वायरस है और वो व्यक्ति आपके आस-पास खांस या छींक रहा है आपके मुंह, नाक और आंख के जरिए वायरस आपके शरीर के अंदर आ सकता है। इसके अलावा अगर आपने वायरस वाली किसी सतह को छू लिया हो तो भी वायरस आपके अंदर आ सकता है।
- वायरस सांस की नली के जरिए आपके गले के पीछे श्लेष्मा झिल्ली में जाता है
- वायरस के शरीर में घुसने पर औसतन पांच दिन में कोरोना के लक्षण दिखते हैं, लेकिन ये दो से 14 दिन के बीच भी दिख सकते हैं
- आपका गला दर्द करने लगेगा और सूखी खांसी के लक्षण दिखने लगेंगे
- बुखार जैसा महसूस हो सकता है, जिसका तापमान 100 डिग्री हो सकता है
शरीर में कैसे फैलता है कोरोना वायरस?
- शरीर में घुसने के बाद वायुमार्ग के जरिए वायरस फेफड़ों की झिल्लियों तक पहुंचता है और उनमें जलन पैदा करता है, जिसके बाद आपको सांस लेने में दिक्कत होनी शुरू हो जाती है।
- इसके बाद न्यूमोनिया के लक्षण दिखाई देते हैं और वायुकोष एक तरल पदार्थ से भर जाता है जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है
- आपको सीने में भारीपन महसूस होने लगता है और सांस लेना मुश्किल सा हो जाता है
- गंभीर रूप से न्यूमोनिया होने के बाद सांस लेने के लिए ऑक्सीजन सिस्टम या वेंटिलेटर के इस्तेमाल की जरूरत पड़ती है
मानव तंत्र पर कैसे प्रभाव डालता है?
- वायरस पहले जठरांत्र सिस्टम की कोशिकाओं को संक्रमित करता है जिसके बाद डायरिया, बदहजमी और जी मिचलाना जैसी बीमारी होने लगती है
- वायरस के शरीर में घुसने के बाद आप काफी थकान महसूस करने लगते हैं
- जिनकी उम्र 65 साल है, जिन्हें पहले से डायबिटीज, हाइपरटेंशन और किडनी से संबंधित बीमारी है, उनके लक्षण ज्यादा गंभीर होते हैं
- कुछ मामलों में न्यूमोनिया बिगड़कर एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम बन सकते हैं
कोरोना वायरस का इलाज और दवाई
कोरोना वायरस का इलाज
- मुख्य तौर पर फेफड़ें, दिल और किडनी का इलाज किया जाता है
- ऑक्सीजन थैरेपी के जरिए मास्क या हाई-फ्लो नसल कैनुला के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है
- सांस लेने में दिक्कत होने पर मरीज को मैकेनिकल वेंटिलेटर पर लेटाया जाता है
- मरीज को ECMO मशीन की मदद दी जाती है, जो दिल-फेफड़े के बायपास मशीन की तरह काम करती है
कोरोना वायरस से बचने के लिए दवाई
- फिलहाल दुनिया में कोरोना से बचने के लिए ना ही कोई दवाई है और ना ही कोई वैक्सीन
- अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए रेमडेसिविर दवा से इलाज करने की मंजूरी है
- सामान्य से गंभीर रूप से बीमार मरीज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन दवा
कोरोना वायरस से ठीक होने की अवधि
- अगर उम्र 65 साल से ऊपर है और पहले से डायबिटीज और हाइपरटेंशन की बीमारी है तो तीन हफ्ते लग सकते हैं
अस्पताल का खर्च
- निजी अस्पतालों में तीन-पांच लाख रुपये लग सकते हैं
- सरकारी अस्पतालों में कोरोना का इलाज मुफ्त होता है
कोरोना टेस्टिंग का खर्च
- निजी लैब में कोरोना का टेस्ट करने पर 4,500 रुपये का खर्च
- सरकारी लैब में कोरोना की टेस्टिंग मुफ्त होती है
मेडिकल सुविधाओं की जरूरत कब पड़ेगी?
- अगर आपके आस-पास कोई कोरोना संक्रमित मरीज है तो और आपके अंदर कोरोना के लक्षण हैं तो नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें
- देश में 69 फीसदी ऐसे मरीज हैं, जिनमें कोई लक्षण नहीं होते और उन्हें मेडिकल सुविधाओं की जरूरत नहीं होती
- डॉक्टर आपको कोरोना का टेस्ट करना या ना करने की सलाह देगा
- अगर किसी में कोरोना के हल्के लक्षण भी हैं तो उसे दो हफ्ते के लिए होम आइसोलेट होना जाना चाहिए
होम आइसोलेशन में क्या करें?
- घर में भी मेडिकल मास्क पहनकर रखें, आइसोलेटेड रूम में अलग से रहें और निजी सामान साझा ना करें
- मरीज की देखभाल कर रह लोगों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीर दवा लेने की सलाह
- शरीर का तापमान मापने के लिए अपने पास एक डिजिटल थर्मामीटर जरूर रखें
अस्पताल में भर्ती होने के बाद कब मिलती है छुट्टी?
- अस्पताल में भर्ती होने पर मेडिकल स्टाफ आपमें लक्षण को मॉनिटर करता है
- मध्यम श्रेणी के मरीजों को तीन दिन में छुट्टी दे दी जाती है
- ऑक्सीजन देने वाले हालात में मरीज को दस दिन भर्ती किया जाता है
- गंभीर रूप से बीमार मरीजों को क्लिनिकल रिकवरी के बाद छुट्टी दे दी जाती है
- RT-PCR टेस्ट नेगेटिव आने पर भी मरीज को छुट्टी दे दी जाती है
- अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी एक हफ्ता होम आइसोलेशन की सलाह दी जाती है