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UGC: व्हाट्सएप ग्रुप से जूनियर्स को परेशान किया तो माना जाएगा रैगिंग, होगी कार्रवाई; यूजीसी का सख्त निर्देश

Wed, 09 Jul 2025 06:17 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 09 Jul 2025 06:17 AM IST
सार

छात्रों से रैगिंग के मामले में यूजीसी ने सख्ती दिखाई है। इसके तहत यूजीसी ने कहा है कि व्हाट्सएप ग्रुप में जूनियर छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना रैगिंग के दायरे में आएगा। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होगी और नियम न मानने वाले संस्थानों का अनुदान भी रोका जा सकता है।

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If juniors are harassed through WhatsApp group, it will be considered ragging Strict instructions from UGC
रैगिंग पर यूजीसी की सख्ती - फोटो : एजेंसी

विस्तार

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में यदि व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये जूनियर विद्यार्थियों को परेशान किया जाता है तो इसे रैगिंग माना जाएगा। ऐसे मामलों में रैगिंग विरोधी नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों को अनौपचारिक व्हाट्सएप ग्रुप की निगरानी करने का निर्देश दिया है। यूजीसी ने निर्देश में कहा, कई मामलों में वरिष्ठ विद्यार्थी अनौपचारिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाते हैं, जूनियर विद्यार्थियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। यह भी रैगिंग के समान है और इसके लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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नियमों का पालन न हुआ तो अनुदान बंद
यूजीसी की ओर से सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि परिसर में छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जो भी संस्थान रैगिंग विरोधी मानदंडों को लागू करने में विफल रहेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है। यहां तक कि संबंधित संस्थान का अनुदान भी रोका जा सकता है।
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बात न मानने पर वरिष्ठ छात्र करते हैं उत्पीड़न
यूजीसी की एडवाइजरी में उन घटनाओं का भी हवाला दिया गया है, जिनमें जूनियर छात्रों को सीनियर्स की बात नहीं मानने पर बहिष्कार और सिर मुंडवाने की धमकी दी जाती रही है। जूनियर छात्रों को लंबे समय तक जागते रहने और अन्य तरीकों से परेशान किया जाता है। ऐसे कृत्य शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कष्ट का कारण बनते हैं। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
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