सीएम बन अफस्पा खत्म करना चाहती हूं : इरोम शर्मिला
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मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) के खिलाफ बीते 16 वर्षों से भूख हड़ताल पर बैठीं इरोम शर्मिला ने मंगलवार को अपना अनशन तोड़ दिया। आयरन लेडी कही जाने वाली 44 साल की इरोम ने शहद लेकर अपनी भूख हड़ताल समाप्त करते हुए कहा कि अब मैं आंदोलन का तरीका बदल रही हूं।
उन्होंने कहा कि अगले साल चुनाव जीत कर मुख्यमंत्री बनने के बाद वह सबसे पहले अफस्पा को खत्म करेंगी। लोग कहते हैं कि राजनीति गंदी चीज है लेकिन समाज भी तो ऐसा ही है।
सरकारी अस्पताल के बाहर इरोम ने कहा, ‘मुझे ताकत की जरूरत है। मणिपुर में राजनीति बहुत गंदी है और हर कोई इसके बारे में जानता है। लेकिन लोग यह महसूस नहीं करते कि इस गंदगी में वे भी शामिल हैं।
मैं 20 निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित करती हूं ताकि मुख्यमंत्री इबोबी का तख्ता पलट किया जा सके।’ प्रधानमंत्री के बारे में उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, आपको इस वक्त अहिंसा की जरूरत है। अफस्पा के बिना आप हमसे जुड़ सकेंगे। प्रधानमंत्री मोदी को गांधीजी का अहिंसा का रास्ता अपनाने की जरूरत है।’
इससे पहले मंगलवार सुबह इरोम को अस्पताल से अदालत ले जाया गया। वहां इरोम ने अपना आंदोलन खत्म करने का हलफनामा दिया जिसके बाद अदालत ने 10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर उनको रिहा करने का निर्देश दिया।
अदालत ने उनसे आत्महत्या का प्रयास करने के मामले में अपनी गलती कबूल करने को भी कहा। लेकिन इरोम ने इससे इनकार कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी। अदालत परिसर में सुरक्षा का भारी इंतजाम किया गया था।
इरोम के अनुसार, लंबे आंदोलन के दौरान उन्होंने कई प्रधानमंत्रियों से मुलाकात करने का प्रयास किया था लेकिन कोई भी प्रधानमंत्री उनसे मुलाकात के लिए तैयार नहीं हुआ। वर्ष 2006 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन करने पर उनके खिलाफ आत्महत्या की कोशिश का मामला भी दर्ज किया गया था।
इरोम के फैसले पर अलग-अलग राय
राजधानी इंफाल के बाहरी हिस्से में बसे उनके गांव मालोम में इरोम की हैसियत किसी भगवान से कम नहीं है। इसी गांव में 10 बेकसूर लोगों की हत्या के बाद इरोम ने अपना आंदोलन शुरू किया था। उन लोगों के परिजन इरोम के समर्थन में हैं।
हर पखवाड़े कोर्ट जाने का सिलसिला थमा
प्रत्येक पखवाड़े जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस अस्पताल से पश्चिम इंफाल के सीजेएम कोर्ट जाने का इरोम का कार्यक्रम मंगलवार को समाप्त हो गया। यहां दंडाधिकारी उनसे हर पखवाड़े उनकी भूख हड़ताल तोड़ने के बारे में पूछते थे जिसका जवाब वह ‘ना’ में देती थीं। मंगलवार को यह सिलसिला खत्म हो गया।
ब्वायफ्रेंड के कारण अनशन खत्म करने का आरोप
कई लोग इरोम के फैसले को उनके ब्वायफ्रेंड डेसमंड कूटिन्हो से जोड़ कर देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि डेसमंड की वजह से ही इरोम ने अपना आंदोलन खत्म करने का फैसला किया। एक महिला ईमा का आरोप है कि डेसमंड भारत सरकार का जासूस है।
सरकार ने हर तरफ से थक-हार कर इरोम का आंदोलन खत्म कराने के लिए डेसमंड का सहारा लिया है। एक कालेज छात्रा मनोरमा ने सवाल उठाया कि इरोम ने तो अफस्पा खत्म नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला किया था। वह अधिनियम तो जस का तस है। फिर उन्होंने अचानक अपना आंदोलन खत्म क्यों कर दिया?
उग्रवादियों को मेरे खून से धोने दें अपना संदेह : शर्मिला
भूख हड़ताल खत्म करने पर कुछ उग्रवादी समूहों की नाराजगी की खबरों पर इरोम शर्मिला ने कहा कि उन्हें मेरे खून से अपने संदेह धोने दें। उन्होंने कहा कि अभी कुछ लोगों को नहीं समझाया जा सकता। जिस प्रकार हिंदू विरोधी होने का आरोप लगा कर कुछ लोगों ने गांधी की हत्या की थी, वैसे ही उन्हें मुझे भी मारने दीजिए। लोगों ने ईसा मसीह की भी हत्या की थी। उन्होंने कहा, ‘उन्हें अपनी भावनाएं और संदेहों को मेरे खून से साफ कर लेने दीजिए।’