I.N.D.I Alliance: ममता को राजीव गांधी छोटी बहन मानते थे, आज उसी 'ननद' के अपमान पर चुप रहीं भाभी, मौन रहा भतीजा
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान ने 'इंडिया गठबंधन' की बड़ी दरार को सार्वजनिक कर दिया है। ममता ने कहा, उनकी पार्टी अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ेगी। इस बयान को इंडिया गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है, कभी ममता बनर्जी को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, अपनी छोटी बहन मानते थे। आज उसी 'ननद' के अपमान पर भाभी यानी सोनिया गांधी चुप रहीं, तो भतीजा राहुल गांधी भी मौन रहे। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को अहंकारी और बेईमान कहा था। इतना ही नहीं, चौधरी ने यह भी कह दिया कि जिन लोगों की वजह से वे (ममता बनर्जी) नेता बनी हैं, उन्हीं को आज अहंकार दिखा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता और भाजपा के बीच सांठगांठ हो चुकी है। वो पीएम मोदी को धोखा नहीं देंगी। यही वजह है कि इंडिया गठबंधन में रहते हुए ममता बनर्जी, सीट शेयरिंग पर समझौता नहीं करना चाहती हैं।
चौधरी ने ममता बनर्जी पर लगाया था गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी के लिए जब इस तरह के अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, तो कांग्रेस पार्टी देखती रही। न ही सोनिया गांधी और न ही राहुल गांधी की तरफ से चौधरी के बयान पर कोई प्रतिक्रिया आई। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ममता बनर्जी की ओर से कांग्रेस को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है, लेकिन वे सोनिया गांधी और राहुल के प्रति कठोर शब्दों का इस्तेमाल करने से बचती रही हैं। चौधरी ने ममता बनर्जी पर यह गंभीर आरोप लगाया था कि उनकी पार्टी और भाजपा के बीच सांठगांठ हो चुकी है। वे, पीएम मोदी को धोखा नहीं देंगी। इस बयान पर भी सोनिया, राहुल व मल्लिकार्जुन खरगे चुप रहे।
राजीव गांधी के समय में बना था वो रिश्ता
पूर्व प्रधानमंत्री स्व: राजीव गांधी के समय से ही ममता बनर्जी और सोनिया गांधी के बीच मधुर संबंध रहे हैं। राजीव गांधी उन्हें अपनी छोटी बहन मानते थे। उन्होंने ममता दीदी को यूथ कांग्रेस के महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। बाद में उन्हें मंत्री बनाया और मुसीबत के वक्त उनका साथ भी दिया। नब्बे के दशक में जब ममता पर बेरहमी से हमला किया गया, तो राजीव गांधी ने उनके इलाज की व्यवस्था की थी। वे कई दिनों तक वुडलैंड्स अस्पताल में भर्ती रहीं। गांधी परिवार ने उनकी खूब देखभाल की। इसके बाद उनके रिश्ते और ज्यादा मजबूत हो गए। राजीव गांधी की हत्या के बाद 1996 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ी थी। इसके बाद भी सोनिया के साथ उनके रिश्ते कायम रहे। कई अवसरों पर देखा गया है कि पार्टी के बयानों से हटकर सोनिया और ममता, एक दूसरे का सम्मान करती रही हैं। पिछले साल कांग्रेस और टीएमसी के बीच जो तनातनी देखी गई, उससे पुराने रिश्तों में खटास आने की शुरुआत हो गई थी। अब कांग्रेस की तरफ से टीएमसी पर नहीं, बल्कि ममता बनर्जी को केंद्र में रखकर बयानबाजी की जाने लगी।
खरगे का जादू काम नहीं आ सका
कांग्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी बताते हैं, अगर सोनिया गांधी, सीधे ममता से बात करतीं तो मामला इतना नहीं बिगड़ता। राजीव गांधी के निधन के बाद ममता और गांधी परिवार के बीच रिश्तों में उतनी तल्लखी नहीं आई थी। वजह, सोनिया गांधी बीच बचाव कर मामला संभाल लेती थी। 2019 के लोकसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के बाद, रिश्तों की दूरी बढ़ती चली गई। मल्लिकार्जुन खरगे को पार्टी की कमान सौंपने के बाद सोनिया गांधी की राजनीतिक सक्रियता कम हो गई। ममता बनर्जी पर जब अधीर रंजन चौधरी ने तीखी टिप्पणी की तो उस पर सोनिया या राहुल की तरफ से खंडन नहीं आया। ममता बनर्जी को अधीर रंजन चौधरी ने अहंकारी व बेईमान कह दिया। सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस पार्टी ने चौधरी की बात पर भरोसा किया। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को जो रिपोर्ट दी, उसमें सीट शेयरिंग का ऐसा आंकड़ा था, जो ममता बनर्जी को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं होता। अगर बात पांच सात सीटों की होती तो ममता बनर्जी, कांग्रेस को देने के लिए सोचती, लेकिन यहां तो संख्या इससे भी कहीं ज्यादा बढ़ाकर दिखाई गई। इस मामले में खरगे का जादू काम नहीं आ सका। वे सीट शेयरिंग पर ममता को राजी करने में कामयाब नहीं हो सके। अगर सीट शेयरिंग का फार्मूला तय करने में सोनिया गांधी बीच में आती तो स्थिति इतनी ज्यादा नहीं बिगड़ती।