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सावधान: देश में सबसे ज्यादा शोरगुल हैदराबाद में, रात में सर्वाधिक ध्वनि प्रदूषण दिल्ली और चेन्नई में

Tue, 09 Mar 2021 05:39 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 09 Mar 2021 05:39 PM IST
सार

  • दिल्ली में दिन के समय ज्यादा ध्वनि प्रदूषण दिलशाद गार्डन, आईटीओ, आरके पुरम, मंदिर मार्ग, पंजाबी बाग में मापा गया है
  • वहीं रात में दिलशाद गार्डन, आईटीओ, सिविल लाइंस, आरके पुरम, आनंद विहार, मंदिर मार्ग, पंजाबी बाग में ज्यादा ध्वनि प्रदूषण होता है     

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Hyderabad is the most noisy city in the country, the highest noise pollution at night in Delhi and then in Chennai
Noise Pollution - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

वायु और जल प्रदूषण को लेकर एक ओर जहां सरकार और आम लोग गंभीर दिख रहे हैं, वहीं बढ़ता ध्वनि प्रदूषण भी लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रहा है। देशभर में ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन इसके बाद भी शहरों में ध्वनि प्रदूषण कम नहीं हो रहा है। देश में सबसे ज्यादा शोरगुल वाले शहरों में हैदराबाद पहले नंबर पर है। वहीं दिल्ली दूसरे और चेन्नई तीसरे पायदान पर है। खास बात यह है कि रात के समय दिल्ली में सबसे ज्यादा और उसके बाद हैदराबाद और चेन्नई में ध्वनि प्रदूषण मापा गया है।

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रिहायशी इलाकों और साइलेंस जोन में बढ़ा ध्वनि प्रदूषण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड के सहयोग से बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई में रियल टाइम बेसिस का राष्ट्रीय परिवेशी ध्वनि निगरानी नेटवर्क स्थापित किया गया है। हर शहर में 10 स्टेशन लगाए गए हैं।

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दिन के वक्त हैदराबाद में सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया है। इसके बाद दिल्ली और चेन्नई में ज्यादा ध्वनि प्रदूषण मापा गया है। रात में दिल्ली में सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण होता है। इसके बाद हैदराबाद और चेन्नई का नंबर है।
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दिन के समय में इन शहरों में रिहायशी इलाकों व्यावसायिक और साइलेंस जोन में सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण मापा गया है। वहीं रात के वक्त इन सभी शहरों में आवासीय, व्यावसायिक और साइलेंस जोन में भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ा हुआ मिला है। कुछ औद्यौगिक क्षेत्र जरूर ध्वनि प्रदूषण के तय मानकों का पालन कर रहे हैं जिससे वहां ध्वनि प्रदूषण में कमी देखी जा रही है।

दिल्ली में दिन के समय ज्यादा ध्वनि प्रदूषण दिलशाद गार्डन, आईटीओ, आरके पुरम, मंदिर मार्ग, पंजाबी बाग में मापा गया है। वहीं रात के समय भी दिलशाद गार्डन, आईटीओ, सिविल लाइंस, आरके पुरम, आनंद विहार, मंदिर मार्ग, पंजाबी बाग में ज्यादा ध्वनि प्रदूषण होता है।

ध्वनि प्रदूषण मानव ही नहीं जीव-जंतुओं पर भी डाल रहा है असर

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने अमर उजाला को बताया कि शहरों में सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण वाहनों के कारण होता है। शहरों में लगातार औद्योगिक इकाइयां चलती रहती हैं इससे प्रदूषण लगातार बना ही रहता है। वहीं आज के दौर में डीजे, आतिशबाजी के कारण भी प्रदूषण शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। सरकार इसे कम करने के लिए कई कोशिश कर रही है, लेकिन इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। सरकार को शहरों में ध्वनि प्रदूषण की निगरानी और सख्ती से करनी चाहिए। वहीं लोगों को भी इसके बारे में जागरुक करना चाहिए। आज लोगों को इसके मानकों के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।

चंडीगढ़ पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ रविंद्र खाईवाल ने बताया कि शहरों में ध्वनि प्रदूषण का बढ़ता स्तर मानव जीवन में बहुत ज्यादा असर डाल रहा है। इससे इंसान की श्रवण क्षमता को हानि पहुंच रही है। तेज ध्वनि मानव ही नहीं जीव-जंतुओं के जीवन पर भी बुरा असर डाल रही है। ध्वनि प्रदूषण के कारण लोग सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, हाई ब्लड प्रेशर, बेचैनी, सुनने की शक्ति कम होना, नींद कम हो जाना, याद्दाश्त कम होना जैसी बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं।

क्या है सामान्य ध्वनि का स्तर

दिन के वक्त आवासीय क्षेत्रों में 55 डेसीबल ध्वनि सामान्य मानी गई है, औद्योगिक क्षेत्रों में 75 डेसीबल ध्वनि, व्यावसायिक क्षेत्रों में 65 डेसीबल ध्वनि और शांत क्षेत्र में 50 डेसीबल सामान्य होती है। वहीं रात के समय में आवासीय क्षेत्रों में 45 डेसीबल ध्वनि सामान्य मानी गई है, औद्योगिक क्षेत्र में 70 डेसीबल ध्वनि, व्यावसायिक क्षेत्रों में 55 डेसीबल ध्वनि और शांत क्षेत्र में 40 डेसीबल सामान्य होती है।

ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर चालान काटने का प्रावधान

एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट के तहत ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर चालान की कार्रवाई का नियम है। ये कार्रवाई केवल गाड़ियों के लिए नहीं बल्कि तेज़ आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर बजाने पर भी है। अगर कोई व्यक्ति या संस्था धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में रात 10 बजे से रात 12 बजे तक अगर लाउडस्पीकर या तेज म्यूजिक वाला डीजे बजाना चाहता है तो इसके लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।

ये हैं नियम

  • रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर्स, ऊंची आवाज में संगीत और ड्रम का इस्तेमाल गैरकानूनी है।
  • रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर बजाना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन।
  • रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच खुली जगहों पर लाउडस्पीकर या म्यूजिक बजाना एक दंडनीय अपराध है।
  • साइलेंस जोन जैसे अस्पताल, नर्सिंग होम, शैक्षणिक संस्थान और अदालतों के 100 मीटर के दायरे में किसी भी वजह से शोर 50 डेसिबल से ज्यादा का नहीं होना चाहिए।

एक सामान्य व्यक्ति 0 डेसिबल तक की आवाज सुन सकता है

डब्ल्यूएचओ का मानना है कि रात में 40 डेसिबल से ज्यादा की आवाज और दिन में 80 डेसिबल से ज्यादा की आवाज़ शरीर के साथ साथ मन पर भी विपरित असर डालती है। ध्वनि प्रदूषण को मापने का पैमाना डेसिबल होता है। एक सामान्य व्यक्ति 0 डेसिबल तक की आवाज आसानी से सुन सकता है। ये आवाज पेड़ के पत्तों की सरसराहट जितनी होती है। आमतौर पर घर में जो लोग बात करते हैं वह 30 डेसिबल के आसपास होती है। वहीं 85 डेसिबल से ज्यादा की आवाज लोगों के कानों को नुकसान पहुंचा सकती है। 100 डेसिबल की आवाजज को लगातार 15 मिनट तक लगातार सुनने से व्यक्ति के कान खराब होने या कान का पर्दा फटने का खतरा हो सकता है।

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