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CAA: कितने लोगों को होगा इसका फायदा, अब तक कैसे मिल रही नागरिकता, कितने भारतीय दूसरे देशों के नागरिक बन रहे?

Fri, 15 Mar 2024 08:51 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 15 Mar 2024 08:51 PM IST
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सार
CAA: नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। संसद की संयुक्त समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि नए कानून से 31,313 लोगों को लाभ होगा। 
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How many people have benefited from CAA, how many people have been getting citizenship
नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

इस समय देशभर में नागरिकता कानून की चर्चा है। 11 मार्च से नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी CAA देश में लागू हो चुका है। इसके लागू होते ही सियासत भी शुरू हो चुकी है। जहां विपक्षी दल कानून को संविधान के खिलाफ बता रहे हैं तो वहीं सत्ताधारी पार्टी इसे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित लोगों के लिए सम्मान बता रही है। 




CAA लागू होने के बाद कानून से जुड़े कई सवाल भी हैं कि सीएए से किन लोगों को फायदा होगा? ऐसे कितने लोग देश में रह रहे हैं क्या इसका कोई आंकड़ा है? क्या सीएए से पहले भी लोगों को नागरिकता मिल रही है? क्या भारत के लोग भी तो दूसरे देशों की नागरिकता लेते हैं, इनकी संख्या कितनी है? आइये जानते हैं...

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए)
नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) - फोटो : AMAR UJALA
पहले जानते हैं कि सीएए क्या है?
नागरिकता संशोधन अधिनियम में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। इसके लागू होने से इन तीन देशों के हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी। कानून कहता है कि इन देशों के ऐसे अल्पसंख्यक जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में आए वो भारत की नागरिकता पाने के पात्र होंगे। 

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए)
नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) - फोटो : AMAR UJALA
ऐसे कितने लोग देश में रह रहे हैं क्या इसका कोई आंकड़ा है?
नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 पर संयुक्त समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि नए कानून से 31,313 लोगों को लाभ होगा। समिति को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने बताया था कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार, 25,447 हिन्दू, 5,807 सिख, 55 ईसाई, दो बौद्ध और दो पारसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 31,313 लोग इसके पात्र बनेंगे। इन लोगों को अपने संबंधित देशों में धार्मिक उत्पीड़न के दावे के आधार पर दीर्घकालिक वीजा दिया गया है और वे भारतीय नागरिकता चाहते हैं। इसलिए ये व्यक्ति तत्काल लाभार्थी होंगे।

आईबी के मुताबिक, इस श्रेणी के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए अन्य लोगों को यह साबित करना होगा कि वे धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए थे। यदि उन्होंने भारत आने के समय ऐसा घोषित नहीं किया होता, तो अब उनके लिए ऐसा दावा करना कठिन होता। निर्णय लेने से पहले भविष्य के किसी भी दावे की जांच की जाएगी, जिसमें रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) भी शामिल है।
 

...तो क्या केवल 31,313 व्यक्तियों को ही लाभ मिलेगा? 
संसद की संयुक्त समिति के इस सवाल के जवाब में आईबी निदेशक ने कहा था, 'हां, क्योंकि उन्होंने दावा किया है; उन्होंने आवेदन किया है। ऐसे कई अन्य लोग होंगे जो आए होंगे और उन्होंने पहले ही विभिन्न तरीकों से नागरिकता ले ली होगी। उन्हें पासपोर्ट, राशन कार्ड मिल गया होगा। अन्य सभी दस्तावेज उन्होंने प्राप्त कर लिए होंगे और वे पहले ही मतदाता सूची में अपना पंजीकरण करा चुके होंगे। इसलिए वे पहले से ही इस देश के नागरिक हैं। यह जांचने के लिए न्यायाधिकरण पहले से ही मौजूद हैं कि क्या उनमें से किसी ने फर्जीवाड़े से नागरिकता ली है। यह कानून उन लोगों के लिए है जिन्होंने आवेदन किया है और जिन्होंने दावा किया है कि उनके संबंधित देश में उन पर अत्याचार किया है।'

क्या सीएए से पहले भी लोगों को नागरिकता मिल रही है?
जिन लोगों के पास सभी जरूरी दस्तावेज हैं, वो नागरिकता की शर्तों को पूरा करते हैं तो नेचुरलाइजेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें भारत की नागरिकता मिलती है। इसके लिए उन्हें कम से कम 14 साल का इंतजार करना पड़ता है। इसी के तहत कई लोगों को देश की नागरिकता मिली है। मशहूर गायक अदनान सामी इसका चर्चित उदाहरण हैं। आंकड़ों की बात करें तो फरवरी 2022 में संसद में गृह मंत्रालय ने बताया था कि 2017 से 2021 के दौरान कुल 4,844 विदेशी लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई। साल दर साल के आंकड़े देखें तो 2017 में 817, 2018 में 628, 2019 में 987, 2020 में 639 और 2021 में 1,773 विदेशी व्यक्तियों को भारत की नागरिकता मिली।

भारत के लोग भी तो दूसरे देशों की नागरिकता लेते होंगे?
नागरिकता लेने वाले और छोड़ने वालों की तुलना करें तो भारत की नागरिकता त्यागने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2020 में अपनी भारतीय नागरिकता त्यागने वालों की संख्या 85,256 थी। वहीं 2021 में ये संख्या 1,63,370, 2022 में 2,25,620 और 2023 में 2,16,219 थी। 
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