Khalistan issue: Punjab में खालिस्तान की लपटों को कहां से मिल रहा समर्थन? जोखिम भरा है सियासत का मौन!
Khalistan issue: सूत्रों का कहना है कि इस तरह का अलगाववाद आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक उसे स्थानीय समर्थन न मिल जाए। हाल में अमृतपाल सिंह संधू, जो खुद को सिख प्रचारक एवं जरनैल सिंह भिंडरांवाले का समर्थक बताता है, का मामला सामने आया है। वह खुलेआम खालिस्तान का समर्थन कर रहा है...
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पंजाब को लेकर केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां बहुत सतर्क हैं। कई तरह के अच्छे-बुरे इनपुट आ रहे हैं। ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि क्या पंजाब में दोबारा से मिलिटेंसी के दौर जैसी कोई आहट सुनाई पड़ रही है। खालिस्तान (Khalistan issue) की लपटों को कहां से समर्थन मिल रहा है। उस वक्त वह जोखिम कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है, जब ऐसे मामलों पर सियासत की तरफ से 'मौन' धारण करने जैसा कुछ दिखाई पड़ता है। पंजाब की तरफ से इस तरह की घटनाओं का फन कुचलने के लिए 'केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों' को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। ऐसी संभावना भी है कि आने वाले समय में केंद्रीय सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों की कार्रवाई, पंजाब में बढ़ सकती है। केंद्र सरकार के विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि खालिस्तान अलगाववाद या आतंकवादी घटना, ये तभी फल फूल सकती हैं, जब इन्हें किसी भी तरह से कम या ज्यादा राजनीतिक समर्थन हासिल होता है।
पाकिस्तान से आए 250 ड्रोन
सूत्रों के मुताबिक, पंजाब में इस साल सीमा पार से लगभग 250 ड्रोन आ चुके हैं। इनमें से दो दर्जन ड्रोन भी नहीं पकड़े जा सके। मौजूदा संसाधनों में बीएसएफ अपना काम पूरी मुस्तैदी से कर रही है, लेकिन हर थाना क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल नहीं है। सर्च या अरेस्ट करने के लिए बीएसएफ का दायरा बढ़ाया गया है, इसका कुछ हद तक बीएसएफ को फायदा मिल रहा है। पंजाब में मोहाली स्थित पुलिस के इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर हमला हो चुका है। खुफिया एजेंसियों का अलर्ट आने के बाद भारत-पाकिस्तान सीमा से 40 किलोमीटर दूर सरहाली थाने पर राकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) से हमला हो गया। इसकी जिम्मेदारी भी खालिस्तान समर्थक आतंकियों ने ली है। राज्य के विभिन्न इलाकों में खालिस्तान के पोस्टर बैनर टंगे हुए देखे गए हैं। अब नववर्ष पर केंद्रीय एजेंसी का अलर्ट जारी हुआ है कि पंजाब में थानों पर आरपीजी से हमला हो सकता है।
सूत्रों का कहना है कि इस तरह का अलगाववाद आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक उसे स्थानीय समर्थन न मिल जाए। हाल में अमृतपाल सिंह संधू, जो खुद को सिख प्रचारक एवं जरनैल सिंह भिंडरांवाले का समर्थक बताता है, का मामला सामने आया है। वह खुलेआम खालिस्तान का समर्थन कर रहा है। सरकार की ओर से वह सख्ती नजर नहीं आई, जैसी अपेक्षित थी। 'वारिस पंजाब दे' संगठन से जुड़े अमृतपाल सिंह कहता है कि वह हर उस इंसान के साथ हैं, जो खालिस्तान का समर्थन करता है। एसजीपीसी को केंद्र के हिसाब से नहीं, बल्कि अपने संविधान के मुताबिक चलना चाहिए। विदेश में बैठे आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के बारे में संधू ने कहा, सरकार किसी को भी आतंकी या साधु घोषित कर देती है। आज भी सब पंजाबी गुलाम हैं। जो लोग सोचते हैं कि हम आजाद हैं, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इस तरह बातें करने वाले संधू को लेकर पंजाब सरकार चुप है।
पंजाब सरकार से सहयोग नहीं
सूत्रों का कहना है, केंद्रीय एजेंसियों को कथित तौर पर पंजाब सरकार की ओर से उतना सहयोग नहीं मिलता, जितना कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। एनआईए को खुद से आतंकवाद से जुड़े किसी केस में घुसना पड़ता है। सरकार की ओर से उस बाबत कोई मांग नहीं की जाती। हालांकि अब एनआईए को किसी केस की जांच करने के लिए स्वत: संज्ञान लेने का अधिकार मिल गया है। वहीं एनआईए इन दिनों नेशनल टेररिस्ट डेटाबेस पर काम कर रहा है और इसके अगले साल से शुरू होने की उम्मीद है। इससे आतंकी गतिविधियों को समय रहते पकड़ने में मदद मिलेगी। पंजाब में बीते एक वर्ष के दौरान आतंकवाद से जुड़े कई मामले सामने आए हैं, मगर वहां की सरकार ने बहुत कम अवसरों पर ऐसा कहा है कि फलां मामले की जांच हम एनआईए को सौंपते हैं। ये किसी से नहीं छिपा है कि पंजाब में ड्रग का दौर किसके समर्थन से आया है। आज ड्रग, खालिस्तान और आतंकी घटनाएं, क्यों बढ़ रही हैं। संभव है कि आने वाले समय में पंजाब में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका बढ़ जाए। एनआईए ने इस साल विभिन्न मामलों में 73 केस दर्ज किए हैं। इनमें बहुत से मामले एनआईए ने खुद अपने हाथ में लिए हैं। पिछले कई वर्षों में यह सर्वाधिक संख्या है। इससे पहले केस दर्ज करने का आंकड़ा साठ के आसपास रहता था। पीएफआई मामले में ही सात केस दर्ज हुए हैं। गैंगस्टर को लेकर तीन मामले दर्ज हुए हैं।
पन्नू के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं करता इंटरपोल
पंजाब में शिवसेना नेता सुधीर सूरी की दिन दहाड़े हत्या हो जाती है। कई शहरों में खालिस्तान के पोस्टर लग जाते हैं। कनाडा और यूएस से अपनी गतिविधियां चला रहे सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के संस्थापक एवं खालिस्तानी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं किया जाता। यह सरकार के हाथ में है कि इस उग्रवाद को आगे बढ़ाना है या उसे वहीं खत्म करना है। कोई खुद को दूसरा भिंडरावाला बता रहा है, तो यह छोटी बात नहीं है। खालिस्तान अलगाववाद के लिए जमीन तैयार की जा रही है। इसे किसी पार्टी, स्थानीय संगठन या विदेश में बैठे कुछ लोगों का समर्थन मिल रहा है। नशा और बेरोजगारी, इन मुद्दों की आड़ में कोई भी आसानी से युवाओं को बरगला सकता है। असमंजस और बहकावे में किसी को यह पता नहीं लगता कि कौन सा कदम सही या गलत है। राजनीतिक या कोई बाहरी ताकत, इसका फायदा उठा सकती है।
खुलेआम खालिस्तान का समर्थन करने वाले सिमरनजीत सिंह मान, पंजाब के संगरूर से लोकसभा सांसद चुने जाते हैं, ये कोई छोटी बात नहीं थी। केंद्र सरकार, पंजाब को लेकर गंभीर है। अगर वहां खालिस्तान अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए जबरदस्ती जमीन तैयार करने का प्रयास होता है, तो केंद्र सरकार, अपनी सुरक्षा एजेंसियों को मैदान में उतारने से पीछे नहीं हटेंगी। भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसियां, पाकिस्तानी आईएसआई, खालिस्तान उग्रवाद और स्थानीय सियासत पर पैनी नजर रख रही हैं।