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Kerala: 'बाहुबल का इस्तेमाल कर केरल विवि पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं गुंडे', कुलपति मोहनन का बड़ा आरोप

Sat, 12 Jul 2025 03:24 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 12 Jul 2025 03:24 PM IST
सार

केरल यूनिवर्सिटी में चल रही खींचतान अब एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकट बन चुकी है। एक ओर वाइस चांसलर खुद को धमकियों से घिरा बता रहे हैं, तो दूसरी ओर वामपंथी छात्र संगठन उन्हें विश्वविद्यालय से दूर रखने के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। फिलहाल स्थिति बहुत तनावपूर्ण है।

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'Hooligans' trying to control Kerala University using muscle power, alleges VC
मोहनन कुन्नूमल, केरल विश्वविद्यालय के कुलपति - फोटो : ANI

विस्तार

केरल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मोहनन कुनुम्मल ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यूनिवर्सिटी में कानून-व्यवस्था की हालत बिगड़ चुकी है और कुछ गुंडे बाहुबल के दम पर विश्वविद्यालय को चलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सीधे तौर पर सत्ताधारी सीपीआई(एम) से जुड़े छात्र संगठन एसएफआई और युवा संगठन डीवाईएफआई को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।
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क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब कुलपति ने 2 जुलाई को रजिस्ट्रार केएस अनिल कुमार को निलंबित कर दिया। रजिस्ट्रार पर आरोप था कि उन्होंने एक निजी कार्यक्रम को रद्द करने का आदेश दिया था, जिसमें राज्यपाल और यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में 'भारत माता' की एक तस्वीर लगी थी जिसमें वे भगवा झंडा थामे हुई थीं। इसे लेकर वामपंथी संगठनों ने विरोध जताया।
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रजिस्ट्रार की वापसी और झगड़ा
हालांकि यूनिवर्सिटी की प्रशासनिक समिति ने बाद में रजिस्ट्रार का निलंबन रद्द कर दिया, और वह अपनी ड्यूटी पर लौट आए। लेकिन वाइस चांसलर ने दावा किया कि रजिस्ट्रार अवैध रूप से पद पर बने हुए हैं और उन्होंने डीवाईएफआई व एसएफआई के कार्यकर्ताओं की मदद से बलपूर्वक कार्यालय में प्रवेश किया।

वाइस चांसलर को दी गई धमकी
डॉ. कुनुम्मल ने कहा, 'मैं यूनिवर्सिटी नहीं जा रहा हूं क्योंकि वहां जाने से हिंसा हो सकती है। अगर मैं गया, तो पुलिस छात्रों पर लाठीचार्ज करेगी और दोनों पक्षों को नुकसान होगा।' उन्होंने यह भी दावा किया कि छात्र संगठनों ने कंप्यूटर सेंटर और अन्य विभागों के कर्मचारियों को धमकाया है कि वे वाइस चांसलर के आदेश न मानें और उन्हें कोई फाइल न भेजें।

घर पर भी हमला करने की कोशिश
कुलपति ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले कुछ डीवाईएफआई-एसएफआई कार्यकर्ता उनके पत्नी के घर पहुंचे और उन्हें मारने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने समय रहते उन्हें रोक दिया। उन्होंने सीपीआई(एम) के राज्य सचिव एमवी गोविंदन की भी आलोचना की, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से वामपंथी छात्र संगठनों के विरोध को समर्थन दिया है। वाइस चांसलर ने कहा, 'जब सत्ताधारी पार्टी का प्रमुख ऐसे विरोधों को समर्थन देता है, तो यह सीधी गुंडागर्दी और कानून का मखौल है।'


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विश्वविद्यालय प्रशासन में दोहरी सत्ता
इस समय यूनिवर्सिटी में दो रजिस्ट्रार मौजूद हैं – एक जो कुलपति की तरफ से नियुक्त किए गए हैं और दूसरे केएस अनिल कुमार, जिन्हें प्रशासन का समर्थन मिला है। कुलपति का कहना है कि जब प्रशासन की बैठक चल रही हो, तब अधिकार उनके पास होते हैं, लेकिन बाकी समय निर्णय लेने की शक्ति वाइस चांसलर के पास ही होती है।

कामकाज पर क्या बोले वाइस चांसलर?
डॉ. कुनुम्मल ने कहा कि वह अभी भी यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक कामकाज को जारी रखे हुए हैं और अब तक 21 फाइलें उन्होंने मंजूर की हैं। उन्होंने कहा, 'मैं किसी भी अवैध गतिविधि का समर्थन नहीं करूंगा। रजिस्ट्रार न तो कोर्ट में सबूत दे पाए, न ही किसी वरिष्ठ अधिकारी के पास शिकायत लेकर गए। उन्होंने कोर्ट में अपना मामला सिर्फ आलोचना के डर से वापस ले लिया।'
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