होम आइसोलेशन के मरीजों की होगी सख्त निगरानी, लापरवाही से बिगड़ सकते हैं हालात
- अगर जुलाई तक गंभीर हुआ संक्रमण तो होम आइसोलेशन के मरीजों से नियमों का पालन कराना होगी बड़ी चुनौती।
- निगरानी तय करने के लिए बढ़ेगी नागरिक सुरक्षा बल और स्वयं सेवी संस्थाओं की भूमिका, केंद्र की सहायता लेने पर भी हो सकता है विचार।
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विस्तार
कोरोना मरीजों को होम आइसोलेशन में रखने के मुद्दे पर दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल और सरकार के बीच शनिवार को ही सहमति बन गई थी। अब रविवार को मुख्य स्वास्थ्य सचिव विक्रम देव दत्त द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि सभी कोरोना मरीजों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी। जांच के बाद डॉक्टर कोरोना संक्रमण की कैटेगरी तय करेंगे। इस सलाह के आधार पर ही उन्हें अस्पताल, क्वारंटीन सेंटर या होम आइसोलेशन में रखने पर फैसला किया जाएगा।
लक्षणहीन या माइल्ड कैटेगरी के मरीजों को होम आइसोलेशन का विकल्प चुनने की आजादी तभी दी जाएगी जब उनके पास घर पर न्यूनतम दो कमरे का मकान और टॉयलेट होगा और इस दौरान वे पूरी तरह आइसोलेशन में रह सकेंगे। इस दौरान घर के अन्य सदस्यों के लोगों से शारीरिक दूरी बनाए रखना और क्वारंटीन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इस दौरान मरीज के किसी एक करीबी के माध्यम से स्वास्थ्य अधिकारी इनके संपर्क में रहेंगे जिससे उनकी स्थिति बिगड़ते ही उन्हें अस्पतालों में दाखिल कराया जा सकेगा।
बनी चुनौती
लेकिन लगातार बढ़ते मामलों के बीच होम आइसोलेशन वाले मरीजों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। अगर इन सभी लोगों की उचित निगरानी न की गई और होम आइसोलेशन के नियमों का पालन नहीं किया गया तो आशंका है कि इससे दिल्ली के हालात बिगड़ सकते हैं।
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जैसा कि दिल्ली सरकार का अनुमान है, अगर जुलाई अंत तक कुल मरीजों की संख्या 5.5 लाख तक पहुंचती है तब भी अभी तक के ट्रेंड के अनुसार लगभग आधे से ज्यादा मरीज लक्षणहीन या माइल्ड कैटेगरी के होंगे। अगर आधे लोग भी होम आइसोलेशन में रहते हैं तो इनकी निगरानी बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।
ये है नई चुनौती
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के शीर्ष पदाधिकारी डॉक्टर एसके पोद्दार ने अमर उजाला को बताया कि कम गंभीर मरीजों को होम आइसोलेशन में रखने का दिल्ली सरकार का आइडिया बिलकुल सही है, लेकिन इस दौरान मरीजों के इलाज की उचित व्यवस्था रखना बेहद अनिवार्य है। अगर होम क्वारंटीन में रह रहे लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे तो वे गंभीर स्थिति पैदा करेंगे और कोरोना को काबू करने के सभी उपाय बेअसर साबित होंगे।
इस समय कितनी टीमें
दिल्ली सरकार ने सभी 11 जिलों में इस समय 495 टीमों को होम आइसोलेशन वालों की निगरानी का काम सौंप रखा है। इस समय लगभग 10 हजार मरीज होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे हैं। आने वाले दिनों में इन सबकी रोज चेकिंग करना बड़ी चुनौती का कार्य बनने वाला है। अगर इनकी सही निगरानी नहीं की गई तो आने वाले समय में स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।
क्या हैं विकल्प
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक निगरानी के कार्य में दिल्ली पुलिस का सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके आलावा नागरिक सुरक्षा बल के जवानों की तैनाती बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने समाज के विभिन्न वर्गों से कोरोना के मामले में स्वयं सहायता की अपील की है। उम्मीद है कि इसके माध्यम से बड़ी संख्या में एनसीसी, एसएसएस और अन्य लोग सामने आएंगे। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार से भी सहयोग लिया जाएगा।
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इतने हुए स्वस्थ
शनिवार तक दिल्ली में कोरोना मरीजों की कुल (Cumulative) संख्या 56746 तक पहुंच चुकी है। इनमें 31294 लोग स्वस्थ होकर अपने घरों को लौट चुके हैं और 2112 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इस समय एक्टिव मामलों की संख्या 23340 है।
कितने बेड्स
दिल्ली कोरोना एप के मुताबिक राजधानी में इस समय कुल 12639 कोरोना बेड्स हैं। कुल 11 संस्थागत क्वारंटीन सेंटर हैं। इनमें कुल मिलाकर 5974 बेड्स हैं। इस प्रकार दोनों को मिलाकर 18613 लोगों को विभिन्न जगहों पर रखकर इलाज करने की व्यवस्था है। जबकि शनिवार तक कुल एक्टिव मामलों की संख्या 23340 है।
दिल्ली सरकार का तर्क था कि अगर सभी लोगों को अनिवार्य रूप से अस्पताल या क्वारंटीन सेंटरों में रखा जाएगा तो इस समय भी सभी को बेड्स दे पाना संभव नहीं होगा। जबकि इस समय स्थिति यह है कि क्वारंटीन सेंटरों में (शनिवार तक) कुल 1143 लोग स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे और 4831 बेड्स अभी भी खाली पड़े हुए हैं।