बनी रहे सत्ता!: एक महीने में तीसरी बार हिमाचल पहुंचेंगे जेपी नड्डा, क्या भाजपा दोहरा सकेगी यूपी-उत्तराखंड वाला करिश्मा
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
भाजपा हिमाचल प्रदेश में अपनी सत्ता बचाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है। इसी साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी को सफलता दिलाने के लिए पार्टी संगठन अभी से सक्रिय हो चुका है। प्रदेश पदाधिकारियों की बैठकें आयोजित कर एक-एक विधानसभा की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्वयं अपने हाथों में ले रखी है। अगले वर्ष जनवरी माह में समाप्त हो रहे अपने कार्यकाल का अंत वे अपने गृहप्रदेश हिमाचल में जीत के साथ करना चाहेंगे, अतः उन्होंने प्रदेश में पूरी ताकत झोंक रखी है। क्या भाजपा यूपी-उत्तराखंड वाला करिश्मा हिमाचल प्रदेश में भी दोहरा पाएगी, इस पर लोगों की निगाह बनी हुई है।
जेपी नड्डा के लिए हिमाचल प्रदेश की कितनी अहमियत है, इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि वे पिछले एक महीने के अंदर तीसरी बार शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश पहुंच रहे हैं। इसके पहले उन्होंने 9 से 12 अप्रैल के बीच चार दिनों के लिए हिमाचल की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने शिमला और बिलासपुर में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों के पेंच कसे थे। इसके दस दिनों के भीतर वे दोबारा 22-23 अप्रैल को कांगड़ा पहुंचे और चुनावी तैयारियों की समीक्षा की।
इन दोनों यात्राओं के बाद एक महीने के अंदर यह उनकी तीसरी हिमाचल प्रदेश की यात्रा होगी। इस दौरान वे कुल्लू में एक रोड शो का आयोजन करेंगे। रोड शो के बाद वे एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। भाजपा संगठन इस जनसभा को सफल बनाने के लिए कमर कस चुकी है।
पार्टी ने अपना 'लोकल' हीरो मैदान में उतारा
जेपी नड्डा का जन्म पटना में हुआ था, लेकिन उनकी उच्च शिक्षा हिमाचल प्रदेश में हुई थी। उन्होंने वहां पार्टी संगठन के लिए पूर्व में भी काम किया था। वे अकसर हिमाचल प्रदेश को अपने गृह प्रदेश की तरह बताते हैं। माना जाता है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही है कि इस प्रदेश में उन्हें भरपूर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया। पार्टी के प्रदेश संगठन पर उनकी जबरदस्त पकड़ है और जनता के बीच भी वे बेहद लोकप्रिय हैं। माना जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश से उनके इसी जुड़ाव के कारण पार्टी ने उन्हें हिमाचल में झोंक रखा है। यहां पार्टी को उनके संबंधों का लाभ मिल सकता है।
पार्टी के लिए चुनौती
दरअसल, हिमाचल प्रदेश में सरकारों को बदलने का इतिहास रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 68 सदस्यीय विधानसभा में 48.8 फीसदी वोटों के साथ 44 सीटों पर सफलता मिली थी। इसके पहले 2012 के चुनाव में कांग्रेस को सफलता मिली थी, जिसने उस चुनाव में 42.81 फीसदी वोटों के साथ बहुमत से ठीक एक ज्यादा यानी 36 सीटों पर सफलता पाई थी।
इसके पूर्व यानी 2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सफलता मिली थी। उसने राज्य में 43.78 प्रतिशत वोटों के साथ 41 सीटों पर सफलता पाई थी। इसके पहले यानी 2007 के विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस ने 43 सीटों के साथ सफलता हासिल कर सरकार बनाई थी।
इस प्रकार हिमाचल प्रदेश की जनता लंबे समय से हर बार सरकार पलट देने की सोच से वोटिंग करती है। इसे देखते हुए भाजपा की चुनौती कठिन हो सकती है। लेकिन चूंकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी इसी तरह का मतदान हुआ करता था, लेकिन बीते चुनाव में भाजपा ने दोनों ही राज्यों में सरकार बनाने में सफलता हासिल की, पार्टी को उम्मीद है कि वह इस पहाड़ी राज्य में भी जीत हासिल कर नया इतिहास रचने में कामयाब रहेगी।
किन मुद्दों का सहारा
दरअसल, उत्तराखंड की तरह हिमाचल प्रदेश में भी ज्यादातर परिवार सैनिक पृष्ठभूमि से संबंध रखते हैं। कहा जाता है कि यहां के हर दूसरे घर का एक बेटा सेना में अवश्य होता है। चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सैनिकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं, केंद्र सरकार ने ओआरओपी जैसी पूर्व सैनिकों की 40 सालों से चली आ रही मांगों को मानकर सैनिक परिवारों के बीच अपनी लोक्रियता बढ़ाई है, माना जा रहा है कि इस राज्य में भी सैनिक परिवारों का समर्थन भाजपा की ओर जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश में यह एक नया इतिहास होगा।
आम आदमी पार्टी की चुनौती कितनी
कांग्रेस भी अपने इस गढ़ में दोबारा सरकार बनाने के लिए हांथ-पांव मार रही है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए ही आम आदमी पार्टी एक नई चुनौती बनकर उभर रही है। पंजाब में मिली जीत से उत्साहित आम आदमी पार्टी को उम्मीद है कि कभी पंजाब का ही हिस्सा रहे हिमाचल प्रदेश में भी वह जीत हासिल कर सकती है। अरविंद केजरीवाल ने इस राज्य में भी मुफ्त बिजली और पेंशन जैसी योजनाओं का ढिंढोरा पीटकर राज्य में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश की है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस राज्य में आम आदमी पार्टी की राह आसान नहीं होने वाली है। खुद अरविंद केजरीवाल को भी इस बात का आभास तब हो गया होगा जब उनकी यात्रा के अगले ही दिन प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष सहित अनेक पदाधिकारी भाजपा में शामिल हो गए।
पंजाब दौरे पर भी जाएंगे नड्डा
अपनी इस दो दिवसीय यात्रा में जेपी नड्डा पंजाब के दौरे पर भी जाएंगे। वहां वे शनिवार को स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए सुखदेव थापर के घर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वे लुधियाना में पार्टी पदाधिकारियों के अलावा पंजाब विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रत्याशियों के साथ बैठक भी करेंगे।