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हाईकोर्ट जज: 50 प्रतिशत प्रस्तावित नामों में मिली गड़बड़ी, खुफिया एजेंसी से करवाई जांच

Mon, 13 Aug 2018 10:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Aug 2018 10:40 AM IST
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High Court Judgeship: Government found 50 percent of fault in recommended names

देश के उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार काफी चिंतित है। सरकार के पास जिन 126 नामों के लिए सिफारिश की गई है उनमें से करीब आधे शक के दायरे हैं। केंद्र की तरफ से कम से कम आय, ईमानदारी और क्षमता को इसका मानदंड बनाया गया है। सरकार ने खुफिया एजेंसी की मदद से उन सभी वकीलों के बैकग्राउंड के बारे में पता किया है जिनका नाम जज बनने की सूची में शामिल है। 

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जांच के बाद इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम को दे दी गई है। सूत्रों के अनुसार कानून मंत्रालय ने हाईकोर्ट कोलेजियम की तरफ से भेजे गए नामों की जांच के लिए एक तंत्र स्थापित किया है। जिन लोगों का नाम सूची में है उनका आंकलन सरकार कम से कम वार्षिक आय, उनके द्वारा किए गए निर्णयों, उनकी छवि, व्यक्तिगत और पेशेवर कामों के हिसाब से करती है।
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हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार ने कानून मंत्रालय में अपना एक तंत्र स्थापित कर रखा है जो सभी अनुशंसित नामों के बैकग्राउंड का पता लगाता है। इस प्रक्रिया के बाद ही मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर को अंतिम रूप दिया जाता है। सूत्रों का कहना है कि सरकार की नजर में 30-40 उम्मीदवार हाईकोर्ट के जज बनने के लायक नहीं हैं। इसके लिए पिछले 5 सालों में किसी वकील की वार्षिक आय 7 लाख होनी चाहिए।
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वकीलों के प्रदर्शन का भी मूल्यांकन किया गया है। मूल्यांकन के दौरान उम्मीदवारों के किए 1 से 2 हजार फैसलों को देखा गया है। खुफिया एजेंसी ने उम्मीदवारों की निजी और पेशेवर जानकारियों को इकट्ठा कर लिया है। कुछ लोग परिवारवाद और पक्षपात से तो कुछ के करीबी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में काम कर चुके हैं। ऐसे नामों की सिफारिश करने की वजह से हाईकोर्ट पर सवाल उठे हैं।

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